Gwalior NSA News: रासुका लगाकर लूटी वाहवाही, कोर्ट में एक भी नहीं टिक पाई

Updated: | Tue, 27 Jul 2021 07:46 PM (IST)

- एंटी माफिया मुहिम के तहत की थी कार्रवाई

Gwalior NSA News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। एंटी माफिया मुहिम के तहत प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर मिलावट का कारोबार करने वालों पर रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) की कार्रवाई की और खूब वाह वाही भी ली। लेकिन रासुका की कार्रवाई सतई होने से एक से डेढ़ महीने भी नहीं टिक सकी। हाई कोर्ट में रासुका को लेकर लिए गए फैसले पिट गए। कलेक्टर के रासुका के एक बाद एक लिए फैसलों को निरस्त कर दिया। रासुका को लेकर जो नियम बनाए गए हैं, उनका पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने रासुका की कार्रवाई को लेकर सख्त टिप्पणियां भी की है कि आंख बंद करके रासुका की कार्रवाई की जा रही हैं।

कोविड-19 की दूसरी लहर में अस्पतालों में दवाइयों की कालाबाजारी बढ़ गई थी। रेमडेशिविर इंजेक्शन को कई गुना कीमत पर मरीजों को बेचा गया। पुलिस ने मैक्स केयर अस्पताल के संचालक व स्टाफ इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था। जिला प्रशासन ने 14 रेमडेशिविर इंजेक्शन मरीजों के लिए दिए थे, जिनकी कालाबाजारी की गई थी। इसके बाद कलेक्टर ग्वालियर ने रवि रजक व सोनी माथुर पर रासुका के तहत कार्रवाई कर दी। इस कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से मामला इंदौर स्थानांतरित हो गया था। इंदौर बैंच ने दोनों पर की गई रासुका की कार्रवाई को निरस्त कर दिया गया। अबतक ग्वालियर के सात रासुका के आदेश हाई कोर्ट में पिटे हैं। भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, गुना-अशोकनगर जिले के के भी करीब 9 आदेश पिट चुके हैं।

केस-1:ग्वालियर कलेक्टर ने मुन्नालाल अग्रवाल व उनके भांजे राहुल अग्रवाल पर पीएडीएस के राशन में गड़बड़ी का आरोप था। थाने में एफआइआर के बाद दोनों के ऊपर कलेक्टर ने रासुका की कार्रवाई की। इस कार्रवाई को दोनों हाई कोर्ट में चुनौती दी। दोनों की याचिका को स्वीकार करते हुए कलेक्टर पर 10-10 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया था।

केस-2: लयर कलेक्टर ने संदीप बाल्मिक पर रासुका की कार्रवाई की थी। रासुका की कार्रवाई के बाद उसे कन्फर्म कराने के लिए प्रस्ताव 12 दिन में शासन के पास नहीं भेजा था। हाई कोर्ट ने बिना कारण 22 दिन जेल में रखने पर कलेक्टर पर 50 रुपये का हर्जाना भी लगाया और रासुका की कार्रवाई निरस्त की।

केस-3: डबरा के मासाला कारोबारी विनोद गोयल पर भी रासुका की कार्रवाई की थी। इनके ऊपर धनिया में मिलावट का आरोप था। विनोद के ऊपर लगी रासुका को निरस्त कर दिया था। कलेक्टर पर 10 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया था।

केस-4: सुरेश बाथम पर रासुका की कार्रवाई की गई थी। सुरेश पर पुलिस वालों पर हमला करने का अारोप था। कोर्ट ने सुरेश बाथम पर लगाई रासुका के अादेश को निरस्त कर दिया।

ये कमियां छोड़ रहे हैं कार्रवाई में

रासुका की कार्रवाई को लेकर सरकार ने नियम बनाए हैं, उनका पालन करना अनिवार्य है।

- जिस व्यक्ति पर रासुका की कार्रवाई की जा रही है, उसे नोटिस तामील कराना जरूरी है, ताकि वह अपना पक्ष रख सके। बिन पक्ष सुने रासुका की कार्रवाई की गई।

- यदि जेल में बंद आरोपित पर रासुका लगाई जा रही है उस अादेश में लिखना जरूरी है कि यह जेल से बाहर निकलने पर समाज के लिए खतरा बन सकता है। इस बात को नहीं लिखा जा रहा है।

- जिस व्यक्ति पर रासुका की कार्रवाई की गई है, उसकी सूचना सात दिन या दूसरे कार्य दिवस में सूचना गृह विभाग को भेजना जरूरी है। सात दिन में शासन की मंजरी लेना जरूरी है। सूचना देने के लिए कापी केंद्र शासन को भी भेजी जाती है। इस गाइड लाइन का पालन नहीं किया जा रहा है।

- जिस व्यक्ति पर रासुका लगाई जा रही है, उसे बताना चाहिए कि उससे समाज को क्या खतरा है। उसकी क्रिमिनल हिस्ट्री का भी जिक्र करना जरूरी है।

क्या है रासुका

- राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को 23 दिसंबर 1980 को बनाया गया था। यह कानून देश की सुरक्षा बनाने के लिए सरकार को शक्ति देता है। यदि सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा बनाने के कार्य में बाधा डाल रहा है उस संदिग्ध व्यक्ति को इस कानून के तहत हिरासत में लिया जा सकता है।

- इस कानून के तहत बिना किसी आरोप के व्यक्ति को एक साल तक जेल में रखा जा सकता है।

इनका कहना है

- रासुका की कार्रवाई को लेकर जो कमिया छोड़ी जा रही थी, उनको दूर करने के लिए कलेक्टरों को मार्गदर्शन जारी किया है। कोर्ट में रासुका की कार्रवाई को चुनौती दी जा रही है, उसमें शासन का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।

अंकुर मोदी, अतिरिक्त महाधिवक्ता, ग्वालियर

- रासुका की कार्रवाई की एक गाइड लाइन बनाई गई है, उसका पालन नहीं किया गया। यदि जेल में बंद व्यक्ति पर रासुका लगाई जा रही है, उसके आदेश में लिखना चाहिए कि यह जेल से निकलने पर समाज के लिए खतरा बन सकता है।

संजय बहिरानी, अधिवक्ता व कानून विशेषज्ञ

Posted By: anil.tomar