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Gwalior Out of Syllabus Column News: सेवादार कहीं डुबो न दें नाव

Updated: | Thu, 15 Apr 2021 10:58 AM (IST)

Gwalior Out of Syllabus Column News: बलबीर सिंह, ग्वालियर नईदुनिया। विश्वविद्यालय की मुखिया काे सेवादार इन दिनों दिशा भ्रमित कर रहे हैं। राजभवन, लोकायुक्त व ईओडब्ल्यू से घेराबंदी हो रही है। इन जगहों से शिकायतों के पुलंदे पर जवाब भी मांगे गए हैं। इन शिकायतों को देखकर मुखिया को घबराहट तो हुई, लेकिन सेवादारों ने दिलासा देते हुए भ्रमित कर दिया कि कुछ नहीं होगा, लेकिन इस बार की शिकायतें हवा-हवाई नहीं हैं। कानून व दस्तावेजों के साथ शिकायतें की गई हैं। जांच एजेंसियों को दस्तावेजों से समझाया गया है कि कैसे घोटाले को अंजाम दिया है। शिकायत का जवाब देने की जिम्मेदारी भी सेवादारों ने ली है। घंटों बैठकर जवाब बनाया जा रहा है। सबकुछ अच्छा बताया जा रहा है। उधर शिकायतकर्ता को जानकारी मिलने पर वह भी सक्रिय हो गए हैं। जहां-जहां शिकायतें कीं, वहां-वहां सूचना के अधिकार लगाकर पूछ रहे हैं कि क्या कार्रवाई की है। लीगल नोटिस भी भेज रहे हैं।

मान्यता वाले साहब ने आपदा को बनाया अवसरः कहते हैं कि अफसर आपदा को अवसर बना लेते हैं। ऐसा ही विश्वविद्यालय के मान्यता वाले साहब ने किया है। कोरोना के आपदा में अपने लिए अवसर तलाश लिए। पहले कालेजों को भय दिखाया कि कमियों को दूर कर लें, नहीं तो मान्यता नहीं मिलेगी। उन्होंने ऐसा फार्मूला दिया कि निरीक्षण भी न हो और लिफाफों का काम भी बन जाए। इसके लिए मेंबरों को एक किया। मेंबरों को आगे कर निरीक्षण टाल दिए। लिफाफों को लेकर बदनाम भी नहीं हुए और काम भी हो गया। साहब की वसूली की चर्चा इन दिनों विश्वविद्यालय की गलियों में खूब है। इस बार उन प्रोफेसरों पर फिर से मार पड़ी है, जो निरीक्षण के इंतजार में थे। साहब को भी कोसने लगे हैं। जिनके ऊपर मार पड़ी है, वे बताने लगे हैं कि कहां से कितना आया। माध्यम का भी खुलासा करने लगे हैं।

फर्जीवाड़े ने लगाया साख पर बट्टाः जेयू की साख को इन दिनों खूब बट्टा लग रहा है। पहले नर्सिंग में फर्जी मार्कशीट कांड, उसके बाद इंटरनेट पर अश्लील वीडियो देखने का मामला आया। अब बीएससी की फर्जी मार्कशीट आ गई गई। इन तीनों कांड की गूंज भोपाल तक पहुंच चुकी है, क्योंकि इन तीनों कांड को लेकर जो छात्र संगठन उग्र हुआ है, वह सत्ताधारी दल से संबंध रखता है। इन कांड की आंच को कैसे ठंडा किया जाए, उसकी दादा से दवा पूछी जा रही है, लेकिन विरोधी सुर उठा रहे हैं। बीएससी फर्जी मार्कशीट कांड में जांच कर दो दिन में रिपोर्ट देने का वादा किया है। छात्र भी तैयार बैठे हैं कि यदि इस वादे पर खरे नहीं उतरते हैं तो फिर से आंदोलन की राह पकड़ी जाएगी। एक ओर चिंतित हैं कि संस्थान की जो साख को बट्टा लगा है, उसकी भरपाई कैसे की जाए।

प्रबंधन के आदेश भी ताक परः बिजली कंपनी के सिटी वाले साहब ने प्रबंधन के आदेशों को ताक पर रख दिया है। प्रबंधन ने कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए गाइड लाइन जारी की है। हफ्ते में पांच दिन काम कराएंगे और कर्मचारियों की क्षमता भी कम करेंगे, लेकिन सिटी वाले साहब इन्हें मानने को तैयार नहीं हैं। रविवार की छुट्टी के दिन भी घर नहीं बैठने दे रहे। वाट्सएप ग्रुप पर चेतावनी भरे मैसेज भेजकर अधिकारी व कर्मचारियों को सकते में डाल रहे हैं कि बिल वसूली का टारगेट पूरा किया जाए और कोई भी आराम नहीं करेगा। रविवार को लोगों के घरों तक जाएं। साहब के व्यवहार से हर कोई परेशान है। जो बात नहीं मानेगा, उसका स्थानांतरण करा दिया जाएगा। अधीनस्थ प्रबंधन तक इस बात को पहुंचा रहे हैं कि कोविड-19 के संक्रमण के बीच लोगों के घरों तक कैसे जाएंगे, लेकिन साहब नहीं मान रहे हैं।

Posted By: vikash.pandey
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