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Gwalior Out of Syllabus Column News: नाेडल की मेहरबानी से मिले दाे पद

Updated: | Thu, 24 Jun 2021 11:34 AM (IST)

Gwalior Out of Syllabus Column News: बलबीर सिंह, ग्वालियर नईदुनिया। निगम में बड़़े साहब ने कल छोटे कर्मचारियों का तबादला कर उन्हें सफाई के काम में लगा दिया। इसमें तोड़फोड़ करने वाले विभाग के कर्मचारी का नाम भी शामिल है, लेकिन यह कर्मचारी नोडल के काफी करीब हैं। विभाग में चर्चा है कि यह कर्मचारी तो नोडल साहब के यहां फल व मिठाई की डलियां पहुंचाता है। खैर ट्रांसफर का पता चलते ही कर्मचारी ने नोडल से गुहार लगाई की उसे बचाएं, वहीं नोडल साहब भी आजकल बड़े साहब के करीबी हैं। सुनने में आया है कि नोडल ने बोल दिया है कि ऊपर बात हो गई है तुम दोनों विभागों में काम करो। अब कर्मचारी ने भी खुलेआम कहना शुरू कर दिया है जब सिर पर हाथ हो नोडल का तो कोई क्या बिगाड़ पाएगा मेरा। वैसे भी तोड़फोड़ वाले विभाग में मलाई भी बहुत है। इसलिए इससे मोह नहीं छूटता है।

साहब तक पहुंचा कमीशन खाने वाले का नामः निगम सदर ने आते ही सबके सामने बोल दिया था मैं कमीशन लेने वालों को बर्दाश्त नहीं करूंगा। कुछ माह तक तो ठीक चला, लेकिन फिर लक्ष्मी के लालची अधिकारी ने साहब के नाम पर ही कमीशनखोरी शुरू कर दी। इस बात की जानकारी कुछ लोगों ने साहब को दी। साहब ने उनके नाम पर कमीशन खाने वाले का नाम पता करने अंदरखाने में तलाश शुरू की। तलाश के दौरान साहब के सामने लेखाशाखा के बड़े अधिकारी का नाम निकलकर आया है। अंदरखाने में कमीशनखोर की तलाश होने की जानकारी ठेकेदारों तक भी पहुंच गई और वह भी अब साहब के सामने जाकर अपना दुखड़ा रोने लगे हैं कि साहब पहले ही यह अधिकारी सबसे अधिक कमीशन लेता है और अब आपके नाम पर भी एक प्रतिशत काटने लगा हैं, अगर सब कुछ इन्हें ही दे दिया तो हम घर क्या लेकर जाएंगे।

दादा गए अज्ञातवास मेंः विवि के दादा इन दिनों अज्ञातवास में हैं। उनका अज्ञातवास में जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है। उनकी सेवानिवृत्ति अगस्त में है। आखिरी समय में वे नहीं चाहते हैं कि किसी फसाद में फंसे। किसी दस्तावेज पर ऐसे कोई हस्ताक्षर हो जाएं, जो बाद में मुश्किल खड़ी कर दें। 2018 में सत्ता परिवर्तन हुआ था, तब से विरोधियों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया था। इसके चलते वे छुट्टी पर चल गए हैं। छुट्टी भी काफी लंबी है। जब भी कोई बैठक होती है तो उससे दूरी बना लेते हैं। एक चर्चा और भी है, वह अपना छह महीने का कार्यकाल भी बढ़वाना चाहते हैं। इसका प्रस्ताव सरकार के पास जा चुका है। सेवानिवृत्त हुए तो सिटी सेंटर से उन्हें अपना अशियाना बदलना पड़ेगा। जब उनके चाहने वाले उनकी छुट्टी के बार में पूछते हैं तो वह शांति का हवाला दे रहे हैं।

विराेध भी नहीं आया कामः कचहरी में सरकार का पक्ष रखने के लिए सरकारी वकील बनाए गए थे। इन नियुक्तियों में दल छोड़कर आए नेता ही भारी दिखे हैं। शहर की छोटी व बड़ी कहचरी में एक ही आफिस का कब्जा हो गया है। इसके विरोध में कमल दल के वकील एक भी हुए। हर जगह अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं की पीड़ा भी बताई। उनकी कैसे अनदेखी की गई है, वह भी बताया। कचहरी में नियुक्तियों में योग्यता भी नहीं देखी। बड़ी कचहरी में आए दिन डांट भी खा रहे हैं। बैठकें कर एकजुट किया गया, लेकिन यह विरोध काम नहीं आया। जो आरोप लगाए जा रहे थे, उनको सत्ता में तवज्जो नहीं दी। अब स्थिति यह है कि विरोधी भी हारकर पस्त हो गए है। घेरने के दूसरे रास्ते तलाशे जा रहे है। अब लड़ाई को कानून तरीके से लड़ने की तैयारी की जा रही है।

Posted By: vikash.pandey
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