ग्‍वालियर व्‍यापार मेला: मेला न आरटीओ छूट की चाह, कारों की कमी के कारण आटोमोबाइल कारोबारी उदासीन

Updated: | Sun, 05 Dec 2021 07:15 AM (IST)

-मेला आयोजन व आरटीओ छूट के लिए प्रयास नहीं कर रहे कारोबारी, कोरोना का का भी डर

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। हर साल ग्वालियर व्यापार मेले के आयोजन व आरटीओ छूट के लिए दिसंबर के पहले से ही प्रयास शुरू हो जाते थे। मगर इस साल ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। शहर के आटोमोबाइल कारोबारी इस बार आरटीओ छूट के लिए प्रयासरत नहीं हैं। कारों की काफी कमी है, ऐसे में वे वर्तमान में भी कारों की डिलेवरी नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण हैं कि वे मेला आयोजन को लेकर भी काफी उदासीन हैं।

दिसंबर का पहला सप्ताह खत्म होने वाला है। यूं तो ग्वालियर व्यापार मेला आयोजन को लेकर तमाम व्यापारी सक्रिय हो गए हैं। मगर मेला के आयोजन पर ओमिक्रोन (कोरोना) की तलवार भी लटकती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा का दावा है कि 25 दिसंबर तक ग्वालियर व्यापार मेला का लगा देंगे। आयोजन की रूपरेखा वे ग्वालियर आगमन के बाद 7 दिसंबर को होने वाली मेला प्राधिकरण की बैठक में बनाएंगे। श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला व्यापारी संघ मेला आयोजन व तैयारियों को लेकर तमाम जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंप रहा है। झूले लगना भी शुरू हो गए हैं। मगर आटोमोबाइल कारोबारी नीरस दिखाई दे रहे हैं। कारोबारियों का उनका कहना है कि मेला लगे य न लगे, वे शायद ही मेले में अपने शोरूम लगाएंगे। कंपनियों से भी मेले में शोरूम बनाने की स्वीकृति शायद ही मिलेगी। क्योंकि इस कार्य में लाखों रुपये का खर्चा होता है। चूंकि लगभग सभी कंपनियों की कारों पर पहले से गाड़ियों की बुकिंग पर डिलेवरी देने में 2 से 8 महीने तक की वेटिंग है। ऐसे में अगर मेला लगता भी है, तो आटोमोबाइल कारोबारियों व जनता को इसका लाभ मुश्किल से मिलेगा। क्योंकि सेमीकंडक्टर चिप (इलेक्ट्रानिक डिवाइस) की सप्लाई में वैश्विक स्तर पर कमी के कारण कंपनियों द्वारा कारों की मेन्यूफेक्चरिंग कम हो रही है। ऐसे में वे मेला अवधि में कारों की डिलेवरी देने की स्थिति में नहीं होंगे।

गौरतलब है कि ग्वालियर व्यापार मेले में 50 फीसद छूट आरटीओ द्वारा दी जाती है। जिससे काफी अधिक बचत कार के खरीदारों को होती है।

--1100 करोड़ का हुआ था कारोबार, बिके थे 22317 वाहन

गौरतलब है कि 2019-20 के मेले का शुभारंभ 27 दिसंबर 2019 को हुआ था। 114 साल के इतिहास में यह मेला सबसे लंबी अवधि (61 दिन) का रहा था, जिसमें 1100 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ। वाहन खरीदी में 50% आरटीओ छूट मिलने के चलते आटोमोबाइल सेक्टर ने रिकार्ड कारोबार किया था। करीब 22317 वाहनों की बिक्री मेले से हुई थी, जिससे 44 करोड़ से अधिक का राजस्व शासन को प्राप्त हुआ था। 7810 कार, 12910 दोपहिया वाहनों के साथ ही 1597 अन्य वाहनों (आटो, बस आदि) की बिक्री मेले में हुई। इन वाहनों में 298 लग्जरी कारें (20 लाख से अधिक कीमत) भी मेले से डिलेवर की गई। खास बात यह है कि आटोमोबाइल सेक्टर में मारुति अर्टिका, वेगनआर, किया, बोलेरो, स्कॉर्पियो, क्रेटा समेत अन्य वाहनों की डिमांड पूरी नहीं हो सकी। अन्यथा मेले का कारोबार 1200 करोड़ के पार हो जाता।

2020-21 का मेला कोरोना के कारण 16 फरवरी 2021 से शुरू हुआ और अपनी तय अवधि से 15 दिन पहले 28 मार्च को मेला समाप्त हो गया। कोरोना के कारण 41 दिन मेले का आयोजन हुआ। जिसमें कुल 16823 वाहनों की विक्री हुई। जिनकी कीमत 857 करोड़ थी। 43.83 करोड़ का राजस्व परिवहन विभाग को प्राप्त हुआ। 7452 कार व 8622 दोपहिया वाहनों की विक्री पिछले मेले में हुई थी।

--मेले को लेकर अभी हम कुछ नहीं सोच रहे। कंपनियों की ओर से भी ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है। ओमिक्रोन का खतरा है, भलें शासन कुछ कह नहीं रहा मगर पिछली बार मेला 15-20 दिन पहले खत्म कर दिया था। ऐसे में व्यापारी बहुत सोच समझ कर जाएगा। गाड़ियों का स्टाक ही उपलब्ध नहीं होगा, तो मेले में क्या करेंगे? अब अगर ओमीक्रान आ गया तो मैन्यूफेक्चरिंंग पर फिर फर्क पड़ेगा। आटोमोबाइल कारोबारी कंपनियों के अधीन हैं, कंपनियां फैसला लेती हैं, डीलर अपने स्तर पर फैसले नहीं लेते हैं। हर डीलर के यहां 500-500 कारों की प्री बुकिंग पहले से हैं। जब बेचने के लिए हमारे यहां गाड़ियां ही नहीं हैं, तो मेले में क्या बेचेंगे और आरटीओ छूट का क्या करेंगे?

हरिकांत समाधिया, मैनेजिंग डायरेक्टर, रायल ग्रुप

फिलहाल गाड़ियों की काफी कमी है, आगे भी स्थिति जल्द ठीक होती दिखाई नहीं दे रही, इसलिए कुछ भी कहा नहीं जा सकता। कोरोना की तीसरी लहर (ओमिक्रान) के खतरे की आशंका भी है, हालांकि फिर भी मेला आयोजन की उम्मीद दिख रही है।

--चरणजीत नागपाल, मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रेम मोटर्स

Posted By: anil.tomar