In what condition in bal gopal Gwalior: माता-पिता को खोने वाले बच्चे और किशोर सरकार के बाल गृहों में आने के लिए तैयार नहीं

Updated: | Sat, 24 Jul 2021 12:07 PM (IST)

In what condition in bal gopal Gwalior: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोविड काल में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चे और किशोर सरकार के बाल गृहों में आने के लिए तैयार नहीं हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन बच्चों के केयर टेकर से संपर्क साधा, लेकिन कोई आने को राजी नहीं है। ग्वालियर में न बच्चे रहने को तैयार हैं और न केयर टेकर ने सहमति दी। ऐसे बच्चों व किशोरों के लिए सिटी सेंटर में आदिम जाति कल्याण विभाग के हास्टल और कंपू थाने के सामने स्थित हास्टल को आरक्षित किया गया है। वहीं हैरत की बात यह कि मौजूदा स्थिति में ग्वालियर ही नहीं बल्कि ग्वालियर और चंबल संभाग के किसी भी जिले में बालिका गृह नहीं हैं। यही कारण है कि ग्वालियर में बेसहारा किशोरियों को रखने के लिए परेशानी है। दूसरा एक ही बालक गृह है जिसमें ज्यादा बच्चों को रखने की क्षमता नहीं है। बालक-बालिका गृह की कमी का कारण यह है कि शासन स्तर पर संस्थाओं के प्रस्ताव लंबित हैं।

ज्ञात रहे कि ग्वालियर में बालक और बालिका गृह की कमी लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री कोविड बाल कल्याण योजना के तहत बच्चों को गृहों में रखा ही नहीं जा सकता है। इन गृहों की कमी के कारण ही महिला एवं बाल विकास विभाग ने दो हास्टल आरक्षित किए हैं। यह आरक्षित जरूर किए हैं, लेकिन बच्चे यहां जाने को राजी नहीं हैं, इसलिए फिलहाल इनका कोई मतलब नहीं रह जाता है।

गृहों के बच्चों के लिए शासन से दो हजार रुपये का प्रविधानः बालक एवं बालिका गृहों में रहने वाले बच्चों के लिए शासन की ओर से दो हजार रुपये मासिक राशि दिए जाने का प्रविधान है। इसके अलावा जो बाल एवं बालिका गृह पात्र होते हैं उन्हें नियमानुसार अनुदान भी दिया जाता है। इसके अलावा गृह जनभागीदारी के माध्यम से भी मदद जुटाते हैं।

अनियमितताओं के कारण बंद हुए दो गृहः ग्वालियर में दो बालिका गृह थे जिनमें एक हजीरा क्षेत्र में आश्रम शांति निकेतन नाम से चलता था, यहां अनियमितताएं व आपराधिक घटनाओं के कारण इसे बंद करा दिया गया। वहीं लक्ष्मीगंज स्थित माधव बाल निकेतन भी बालिका गृह था जहां गड़बड़ पाए जाने पर बंद करा दिया गया।

प्रदेश में 3500 बच्चे अनाथ, ग्वालियर में सौ से ज्यादाः प्रदेश में बालक एवं बालिका गृह में रहने वाले बच्चों की संख्या 3500 है। ग्वालियर में बेसहारा बच्चे, शिशु गृह, बालक गृह और फिट फैसिलिटी से लेकर फास्टर केयर में रहने वाले बच्चों की संख्या सौ से ज्यादा है।

दाे संस्थाओं के प्रस्ताव लंबित: ग्वालियर जिले से बालक-बालिका गृह खोलने के लिए जन संवेदना समाज कल्याण एवं ग्रामीण विकास समिति और मिनी गोल्डन का प्रस्ताव लंबित है। शासन से इनकी मान्यता आने का इंतजार है। इनकी मान्यता आते ही ग्वालियर में गृहों की कमी खत्म हो जाएगी।

ग्वालियर में स्थितिः

एक बाल गृह: थाटीपुर

एक शिशु गृह: कुंदन नगर

बालिका गृह: एक भी नहीं

वर्जन-

ग्वालियर जिले में बालिका गृह और बालक गृह की कमी है। बालिका गृह तो एक भी नहीं है। दो संस्थाओं के प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित हैं। कोविड में अनाथ हुए बच्चों को शासकीय हास्टल में रखने को लेकर उनके केयर टेकर से बात की गई, लेकिन किसी ने सहमति नहीं दी।

शालीन शर्मा, असिस्टेंट डायरेक्टर, महिला एवं बाल विकास विभाग, ग्वालियर

Posted By: vikash.pandey