शनिचरी अमावस्या पर मिलती है शनि दोष से मुक्ति, जानें कैसे

Updated: | Fri, 03 Dec 2021 09:56 AM (IST)

विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। अगहन अमावस्या शनिवार 4 दिसंबर को मनाई जाएगी। ये अमावस्या शनिवार को होने के कारण शनिचरी अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इस दिन चतुर्ग्रही योग भी बनेगा। जिसमे सूर्य, चंद्र, बुध एवं केतु मंगल की राशि वृश्चिक में विराजमान रहेंगे। अमावस्या तिथि दोपहर 1:13 बजे तक रहेगी। इस दिन शनि पूजा से पितृ दोष, साढ़े साती, संतान हीन योग व राहु के दुष्परिणामों से छुटकारा मिलता है।

जीवाजीगंज स्थित नवग्रह मंदिर पर लगेगा मेलाः नवग्रह शनि मंदिर के पुजारी पंडित मुरारी लाल भारद्वाज ने बताया कि ये मंदिर लगभग 200 साल पुराना है। यहां श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। शनिचरी अमावस्या पर सुबह 5 बजे से रात्रि 12 बजे तक मंदिर खुला रहेगा। कोविड 19 के नियमो का पालन होगा। सभी को मास्क लगाकर ही प्रवेश दिया जाएगा। सुबह शनि देव को स्नान के पश्चात इमरती व बूंदी का भोग लगाया जाएगा। उसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। इसी प्रकार बहोड़ापुर पर भी प्राचीन शनि नव ग्रह मंदिर है, जहां श्रद्धालु शनि की पूजा के लिए जाते है। गेंडे वाली सड़क, शेख की बगिया में भी पुराना शनि मंदिर है, यहां भी भक्तों की भीड़ रहती है।

शनि अमावस्या पर पड़ेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहणः शनि अमावस्या पर पड़ने वाला ग्रहण भारत मे दिखाई नही देगा। इसका यम-नियम सूतक नही लगेगा। खगास सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, आस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र, साउथ अफ्रीका के दक्षिण भाग में दृश्य होगा। ग्रहण का भारतीय समय मे स्पर्श दिन में 10:49 बजे से एवं मोक्ष दिन में 03:07 बजे होगा। इस ग्रहण का धार्मिक दृष्टि से भारत मे कोई महत्व नही है।

Posted By: vikash.pandey