Organ Donation In Indore: इंदौर की डेंटल सर्जन के निधन के बाद उनकी किडनी और लिवर जरुरतमंद मरीजों को लगाई

Updated: | Thu, 16 Sep 2021 10:46 PM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Organ Donation In Indore । चार दिन से अस्पताल में जिंदगी-मौत के बीच संघर्ष कर रही इंदौर की डेंटल सर्जन डा. संगीता पाटिल को गुरुवार सुबह चोइथराम अस्पताल में ब्रेनडेथ घोषित किया गया।

उनकी एक किडनी चोइथराम अस्पताल में भर्ती डिंडोरी जिले के शाहपुरा निवासी 32 वर्षीय युवक को लगाई गई। शाम पांच बजे चोइथराम अस्पताल से ग्रीन कारिडोर बनाकर उनकी दूसरी किडनी सीएचएल अस्पताल में भर्ती कोटा के 60 वर्षीय मरीज को लगाई गई। पहली बार इंदौर से भोपाल तक ग्रीन कारिडोर बनाकर डेंटल सर्जन का लिवर बंसल अस्पताल, भोपाल में भर्ती 34 वर्षीय युवक के लिए भेजा गया।

दोनों आंखे एमके इंटरनेशनल आई बैंक और त्वचा चोइथराम अस्पताल को दान की गई है। करीब दो साल बाद शहर में ग्रीन कारिडोर बना। यह 40वां ग्रीन कारिडोर है। इसके पूर्व 23 अक्टूबर 2019 को ग्रीन कारिडोर बना था।

अनूप नगर में रहने वाली डेंटल सर्जन डा. संगीता पाटिल के साथ 11 सितंबर को सुखलिया चौराहे पर लूट की वारदात हुई थी। झूमाझटकी के दौरान 51 वर्षीय डेंटल सर्जन घायल हो गई थीं। उन्हें सिर पर गंभीर चोटें आईं थीं। बेटी निहारिका ने उन्हें ब्रेनडेथ घोषित किए जाने के पूर्व ही अंगदान की इच्छा जता दी थी।

इंदौर से गुरुवार की शाम 7.35 बजे ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एक लिवर भोपाल रवाना किया गया था। इंदौर प्रशासन ने सीहोर, देवास और भोपाल एसपी को निर्देश दिए थे कि इंदौर से रवाना हुई इस एम्बुलेंस को टोल नाकों और चौराहों पर लेन खाली मिले, वह इस बात का इंतजाम करें।

यह होता है ब्रेनडेथ

चोइथराम अस्पताल के लिवर व पेटरोग विशेषज्ञ डा. अजय जैन के मुताबिक जब किसी व्यक्ति के मस्तिष्क की क्रियाएं ब्रेन स्टेम रिफ्लेक्सेस बंद हो जाती है। इन क्रियाओं मस्तिष्क में पुन: चालू होने की संभावना नहीं होती है। ऐसे व्यक्ति के शरीर के अन्य अंग दवाओं और वेंटीलेटर के द्वारा सुचारु से चालू रखे जाते है। ऐसे मरीज को ब्रेनडेथ कहा जाता है। इस प्रक्रिया की वैज्ञानिक रुप से पुष्टि के लिए सरकार द्वार बनाए गए नियमों के अनुसार एपनिया टेस्ट और ब्रेन स्टेम के रिफ्लेक्सेस टेस्ट चार चिकित्सकों की कमेटी के द्वारा छह घंटे के अंतराल पर दो बार किए जाते है।

इसमें मरीज का रक्त नमूना, मरीज के ब्रेन के फंक्शन का टेस्ट किया जाता है। जब दो बार जांच होने के पश्चात यह कंफर्म हो जाता है कि मस्तिष्क पुन: काम नहीं करेगा तब मरीज को ब्रेनडेथ घोषित किया जाता है। अंगदान के दौरान जरुरी अंगों मरीज के शरीर से निकालने तब तक मरीज के शरीर का रक्तचाप व श्वास को नियमित रुप से वेंटीलेटर व दवाओं के माध्यम से चालू रखा जाता है।

Posted By: Sameer Deshpande