Anwarat Theater Group Indore: उम्मीदों की किरण जगाए दुखांत से खत्म हुई बादशाहत

Updated: | Sun, 01 Aug 2021 10:21 AM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Anwarat Theater Group Indore। शायद ही कोई ऐसा हो जिसे गुलामी पसंद हो। आजादी से रहना और बादशाह की तरह जीवन जीना हर किसी की ख्वाहिश होती है पर जब वह बादशाहत खत्म होती है तो उसका दुख भी असहनीय होता है। फिर चाहे यह दुख खुद को हो या उससे जुड़े व्यक्ति को। इसी बात को लेखक सआदत हसन मंटो ने जितनी खूबसूरती से लिखा उसका उतना ही बेहतर ढंग से अख्तर अली ने नाट्य रूपांतरण किया और संस्था अनवरत थियेटर के कलाकारों ने उसे मंच पर उतारा।

शनिवार की रात अभिनव कला समाज के सभागृह में नाटक 'बादशाहत का खात्मा" का मंचन हुआ। यह नाटक एक ऐसी प्रेम कहानी पर आधारित था जिसमें सुकून के भाव भी थे तो दुखांत का दंश भी था। यह नाटक मनमोहन नामक युवा की दास्तां बयां करने वाला था जो अपने स्पष्टवादी स्वभाव के चलते न तौ नौकरी कर पाता है और ना ही परिवार के साथ रह पाता है। फुटपाथ पर जीवन बसर करने वाले मनमोहन का मित्र राकेश उसका एकमात्र साथी था। राकेश किसी काम से शहर से बाहर जाता है तो मनमोहन को अपने आफिस में छोड़ जाता है। यहां एक दिन एक फोन आता है और फोन करने वाली लड़की से उसकी बात होती है। यहां से दोनों के जीवन में एक नया अध्याय प्रेम का शुरू होता है।

स्पष्टवादी मनमोहन उस लड़की को बता देता है कि उसकी बादशाहत केवल तब तक ही है जब तक की राकेश वापस नहीं आ जाता। लड़की विश्वास दिलाती है कि जिसदिन बादशाहत खत्म होगी उस दिन वह उससे मिलेगी लेकिन इससे पहले ही मनमोहन की मौत बीमारी से हो जाती है और जिस लड़की से मिलने का इंतजार वह करता रहा अब वह लड़की उसका इंतजार करती है। नितेश उपाध्याय द्वारा निर्देशित इस नाटक में मनमोहन की भूमिका किशन ओझा, लड़की का किरदार कीर्तिका पटेल व राकेश की भूमिका अतुल पैठारी ने निभाई थी।

Posted By: gajendra.nagar