HamburgerMenuButton

इंदौर के वास्तुविद ने अक्षय तृतीया पर आनलाइन करवाया वास्तु विधान हवन

Updated: | Sat, 15 May 2021 10:19 AM (IST)

इंदौर। वास्तुविद और भूगर्भ शास्त्री डा. राजेंद्र जैन द्वारा अक्षय तृतीया के अवसर पर देश और विदेशों में भी एकसाथ वास्तु विधान हवन एवं पूजा आनलाइन संपन्न कराई गई। जिसमें सभी ने अपने अपने घरों में बैठकर प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभ नाथ भगवान एवं पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से विधान एवं पूजा की उक्त विधान में संपूर्ण घर का वास्तु दोष तो निवारण किया। राजेंद्र जैन ने बताया कि प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान ने अक्षय तृतीया के दिन 13 महीने की कठोर तपस्या का गन्ने का रस से पारणा किया था। जैन धर्मावलंबी जो पूरे वर्ष तपस्या करते हैं उनका वर्षी तप का पारणा अक्षय तृतीया के दिन ही होता है। इस शुभ अवसर पर सारा विधान संपन्न कराया गया।

अक्षय तृतीया पर 10 तपस्वियों ने किए आचार्य महाश्रमण के दर्शन, समाजजनों को दिया संदेश

जैन समाज में सालभर किए जाने वाले उपवास वर्षीतप का समापन अक्षय तृतीया पर किया गया। शुक्रवार को 10 तपस्वियों ने इंदौर आए आचार्य महाश्रमण के दर्शन किए। राऊ स्थित ला कालेज में ठहरे आचार्य श्री से शाम छह बजे इन तपस्वियों की मुलाकात हुई। जहां उन्होंने जीवन को मानवता के लिए समर्पित करने का संदेश दिया। दिनभर आचार्य श्री ने फेसबुक लाइव के जरिए समाजजनों को प्रवचन दिए। उन्होंने कहा वर्षीतप करने वाले कभी घर पर नहीं बैठते हैं। पुरुष तपसी जहां आफिस जाकर अपनी सामान्य दिनचर्या में व्यस्त रहते हैं। वहीं महिला तपसी अपने घर में कामकाज करती है। यह एक सुखद अनुभव है, क्योंकि वे ईश्वर की तपस्या के साथ ही अपने परिवार का भी बराबर ध्यान रखते हैं।

अपने दु:ख में कोई सहभागी नहीं : अंहिसा यात्रा पर निकले आचार्य महाश्रमण का शुक्रवार को इंदौर में दूसरा दिन था। दिन की शुरुआत तपस्वियों से भेंट और साधना से हुई। कोरोना प्रोटोकाल का ध्यान रखते हुए कोई भी आयोजन नहीं रखा गया है। सुबह 11 बजे उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए समाजजनों को अहिंसा और नैतिकता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एक आदमी दुखी है, लेकिन उसका दुख कोई बांट नहीं सकता है। भले ही उसके ईदगिर्द बहुत सारे लोग हैं, जिसमें मित्र, परिवार के सदस्यों के अलावा जानने-पहचाने वाले शामिल हो। मगर कोई आपका दुख नहीं बांट सकता है। यानी आपके दु:ख में कोई सहभागी नहीं बन सकता है। मनुष्य को जीवन में ऐसे कर्म करने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे किसी अन्य व्यक्ति का कोई नुकसान न हो। लोगों की मदद करने और सहायता करने से जीवन के दुख कम होते हैं। बाद में आचार्य महाश्रमण ने अहिंसा यात्रा और नशामुक्ति के बारे में समाजजनों को बताया।

Posted By: Prashant Pandey
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.