Leopard Counting Indore: आनलाइन गणना के बीच बाघ-तेंदुए के लिए जंगल में लगेंगे कैमरे, दस स्थानों को किया चिन्हित

Updated: | Sun, 17 Oct 2021 03:56 PM (IST)

कपिल नीले, इंदौर Leopard Counting Indore । प्रदेशभर में वन्यप्राणियों की गिनती अगले साल जनवरी 2022 में एक साथ होना है। जंगल में बाघ-तेंदुए की मौजूदगी से जुड़े प्रमाणों को पहली मर्तबा आनलाइन दर्ज करवाना है। इसके लिए वनकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार गिनती के दौरान बाघ-तेंदुए पर नाइट विजन कैमरे से भी निगरानी रखेंगे। ये निर्देश वन विभाग मुख्यालय में बैठे वरिष्ठ अफसरों ने दिए है। अब ऐसे स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है जहां इनकी हलचल अधिक है। प्रत्येक वनमंडल को नवंबर तक इन वनक्षेत्रों की सूची देना है, ताकि जनवरी तीसरे सप्ताह में कैमरे लगाए जा सके।

गणना को लेकर नई व्यवस्था के तहत मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए वन्यप्राणियों से जुड़े प्रमाण इकट्ठा कर तस्वीरें अपलोड करना है। ये डाटा सीधे इंस्टीट्यूट आफ वाइल्डलाइफ देहरादून को मिलेगा। गिनती को ओर सुविधाजनक बनाने के लिए मुख्यालय ने कैमरे लगाने की सलाह दी है। अधिकारियों का मानना है कि कभी-कभार वन्यप्राणियों के पंजों के निशान व विष्ठा नहीं मिल पाता है। ऐसे में बाघ-तेंदुए की हलचल को कैमरे में कैद करना आसान है। इसके लिए उन स्थानों को चुना जा रहा है। जहां बाघ-तेंदुए अक्सर नजर आते है, जिसमें तालाब, नदी, घना वनक्षेत्र आदि शामिल है। इंदौर वनमंडल में चोरल, महू, मानपुर और इंदौर रेंज में जगह तय कर ली है। मगर वन्यप्राणियों की सुरक्षा को देखते हुए वनक्षेत्रों के नाम सार्वजनिक नहीं किए है। अधिकारियों के मुताबिक जगह बताने से शिकारी सक्रिय हो जाते है। गोपनीय तरीके से वरिष्ठ अधिकारियों को नाम बताए है।

ये होंगे प्रमाण

बाघ-तेंदुए की गिनती में कई प्रकार से प्रमाण इकट्ठा किए जाएंगे, जिसमें पंजों के निशान, विष्ठा, जमीन व पेड़ पर खरोंच, पेड़ों पर छोड़ी गई गंध शामिल है। इनकी तस्वीरें लेकर वनकर्मियों को आनलाइन अपलोड करना होगा। इतना ही नहीं कैमरे के फुटेज भी भेजना है।

3421 तेंदुए-526 बाघ

2018 में इंस्टीट्यूट अॉफ वाइल्ड लाइफ देहरादून ने गणना करवाई थी। देशभर में 2967 बाघ और 12852 तेंदुओं की मौजूदगी जंगलों में दिखी थी। अकेले मध्य प्रदेश में बाघों का आंकड़ा 526 और तेंदुए का 3421 पहुंच चुका है।

दिसंबर तक चलेंगी ट्रैनिंग

अगस्त में इंदौर वनमंडल से छह वनकर्मियों को ट्रैनिंग दी, जिन्हें मास्टर ट्रैनर बनाया है। ये वनमंडल के बाकी वनकर्मियों को प्रशिक्षण देने में लगे है। दिसंबर तक शिविर लगाएंगे। डीएफओ नरेंद्र पंडवा का कहना है कि वन्यप्राणियों की गिनती को लेकर वनकर्मियों को मोबाइल एप्लीकेशन की ट्रैनिंग दे रहे है। जंगल में कैमरे भी लगाएंगे। तीन दिन तक निगरानी की जाएगी। उसके बाद फुटेज निकालेंगे।

Posted By: Sameer Deshpande