World Tiger Day 2021: विश्व बाघ दिवस पर इंदौर के चिडि़याघर में पहली बार नजर आया काला बाघ

Updated: | Thu, 29 Jul 2021 04:53 PM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि World Tiger Day 2021। विश्व बाघ दिवस पर इंदौर के वन्य प्रेमियों को एक खास सौगात मिली। डेढ़ माह के इंतजार का बाद ब्लैक टाइगर विक्की बाड़े में नजर आया। विक्की को बाड़े में निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने गेट खोलकर छोड़ा। इस मौके पर निगमायुक्त ने कहा अब चिड़ियाघर में पीले, काले, सफेद तीनों रंगों के बाघ है। इन्हें देखने का उत्साह बच्चों में बहुत है। अब प्राणी संग्रहालय में कई और नए जानवरों को लाएंगे। जल्दी चिड़ियाघर में जेब्रा को लाया जाएगा। इसके लिए प्रयास किए जा रहे है।

जू प्रभारी डॉ. उत्तम यादव ने बताया कि विश्व बाघ दिवस पर चिड़ियाघर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। इसमें चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसके लिए 1800 प्रविष्टि आई है। शाम को 4.30 बजे टाइगर फीडिंग शो होगा।

अोडिशा से लाए ब्लैक और व्हाइट टाइगर को

व्हाइट और ब्लैक टाइगर को अोडिशा से लाया गया था। दो सप्ताह पहले व्हाइट टाइगर को शैल से बाड़े में छोड़ा गया था। इसके बाद आज ब्लैक टाइगर को भी खुले बाड़े में छोड़ा गया। 'टाइगर स्टेट' मध्यप्रदेश के इंदौर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (चिड़ियाघर) बाघों के मामले में खास स्थान रखता है। प्रदेश के किसी चिड़ियाघर में परंपरागत पीले बाघ के साथ सफेद और काला बाघ भी देखना हो तो यहां देखे जा सकते है। यह विशेषता इंदौर के अलावा सिर्फ ओडिशा के नंदन कानन जूलाजिकल पार्क में है।

डॉ. यादव ने बताया कि बाघों के संरक्षण के लिए सरकार, वन विभाग, पर्यावरण प्रेमी तो अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं है। इसमें चिड़ियाघर भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसका नतीजा है कि यहां रहने वाले बाघ औसत से ज्यादा आयु तक जीते है। एक करोड़ 70 लाख की राशि से एक एकड़ में नया बाड़ा बनाया गया है। जंगल सा माहौल देने के लिए इसमें पत्थरों से पहाड़, तालाब, मचान और गुफा बनाई गई है। चिड़ियाघर में बाघों की उम्र व संख्या बढ़ने का कारण सही वक्त पर उपचार और सही मात्रा में भोजन मिलना है।

आहार में उन्हें हर दिन आठ किलो मांस दिया जाता है। सप्ताह में एक दिन उपवास भी रखते हैं। दो महीने में एक बार पेट के कीड़े मारने की दवाइयां दी जाती हैं। शिकार या क्षेत्र विशेष के लिए बाघों के बीच संघर्ष नहीं होता, जिससे वे घायल नहीं होते। इसलिए यहां बाघों की संख्या भी बढ़ी है। बाघ की औसत उम्र 16 से 18 वर्ष होती है। चिड़ियाघर में तीन बाघ ऐसे भी रहे हैं जो औसत से अधिक जीवित रहे। इनमें सफेद बाघ श्यामू 22, पीला बाघ बिहारी 21 व लालू बाघ 24 वर्ष तक जीवित रहा।

Posted By: Sameer Deshpande