Blood Test Machines: धार और खंडवा में दिसंबर तक सिकल सेल की पहचान के लिए लगेंगी रक्त जांच की मशीनें

Updated: | Mon, 25 Oct 2021 09:22 AM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Blood Test Machines । इंदौर के आसपास के आदिवासी इलाकों में सिकल सेल के पांच से 10 फीसद मरीज हैं। अभी इंदौर में इस बीमारी की जांच के लिए एमजीएम मेडिकल कालेज में हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरोसिस तकनीक से रक्त की जांच कर सिकल सेल के मरीज का पता किया जाता है। जल्द ही इंदौर के आसपास के जिलों में सिकल सेल के मरीजों की पहचान के लिए इस तरह की जांच मशीनें लगाई जाएंगी। इन मशीनों के माध्यम से मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी और जो मरीज इस बीमारी से पीड़ित होंगे, उन्हें आगे उपचार व विशेष बचाव की जानकारी दी जाएगी।

संभागायुक्त डा. पवन शर्मा के मुताबिक संभाग के आठ जिलों में इस बीमारी के मरीजों की पहचान के लिए अभियान चलाएंगे। प्रथम चरण में धार व खंडवा जिलों में रक्त जांच की मशीनें लगाएंगे। इसके लिए जल्द ही टेंडर जारी कर रहे हैं और दिसंबर माह तक इन दोनों जिले में रक्त परीक्षण की मशीनें लग जाएगी। इन दो जिलों में मशीने लगने से आसपास के जिलों के मरीजों की जांच में भी आसानी होगी।

भ्रूण की जांच कर उसमें होने वाली संभावित बीमारियों का पता लगाएंगे

एमवाय अस्पताल के ब्लड बैंक के डायरेक्टर डा. अशोक यादव के मुताबिक इस बीमारी में मरीज का हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। मरीज को बार-बार पीलिया होता है। उसकी तिल्ली बढ़ जाती है। हाथ-पैर में असहनीय दर्द होता है। ऐसे मरीज को दूसरी बीमारियां भी जल्द पकड़ लेती है। यह बीमारी अनुवांशिक होती है। 25 से 30 साल बाद मरीज के शरीर में कांप्लीकेशन शुरू हो जाते हैं और उसकी मृत्यु भी होने की आशंका रहती है। इस वजह से इस बीमारी से बचाव के लिए स्क्रीनिंग कर मरीजों की पहचान की कोशिश की जा रही है।

चिकित्सकों के मुताबिक यदि मां व पिता को सिकल सेल की समस्या है तो उनके बच्चों में 25 से 30 फीसद यह बीमारी होने की आशंका रहती है। अब मेडिकल कालेज के माध्यम से सिकल सेल पीड़ित गर्भवती के भ्रूण की कोरियोनिक बायोप्सी कर यह पता लगाया जाएगा कि पैदा होने वाले बच्चे को सिकलसेल की बीमारी होगी या नहीं। एमवाय अस्पताल के ब्लड बैंक के द्वारा अभी प्रतिदिन थेलेसीमिया व सिकल सेल से पीड़ित के 20 से 25 बच्चों को रक्त दिया जाता है।

Posted By: Sameer Deshpande