दो साल बाद भी इंदौर की तरफ से शुरू नहीं हुआ इंदौर-उज्जैन रेलखंड पर डबल लाइन का काम

Updated: | Sat, 21 Sep 2019 04:00 AM (IST)

इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

इंदौर से उज्जैन रेलखंड पर डबल लाइन बिछाने का काम रेलवे दो साल बाद भी पूरा नहीं कर पाया है। उज्जैन से देवास के बीच ही लगभग एक साल से काम चल रहा है, लेकिन यहां 10 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो सका है। वहीं इंदौर की तरफ से अब तक काम की शुरुआत ही नहीं हुई है, जबकि इंदौर से देवास के बीच ट्रेनों का दबाव 140 फीसदी है और उज्जैन से देवास की तरफ 100 से भी कम। ऐसे में इंदौर से देवास की तरफ पहले काम होना था, लेकिन मंडल की लापरवाही और मनमर्जी के कारण उज्जैन की ओर से काम किया जा रहा है। इस रूट पर भी बारिश के कारण जून से ही काम बंद है। काम में लेटलतीफी के कारण इस रूट पर चलने वाली ट्रेनें रोजाना दो से तीन घंटे देरी से स्टेशन पहुंच रही हैं। वहीं इंदौर से उज्जैन जाने वाली बसों का किराया भी बढ़ा है।

इंदौर से उज्जैन के बीच डबल लाइन के काम का 17 मार्च 2018 को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भूमिपूजन किया था। इसके बाद रतलाम मंडल ने टेंडर जारी किए। जुलाई 2018 में डीआरएम आरएन सुनकर ने इंदौर से देवास तक निरीक्षण किया और काम शुरू करवा दिया। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि इंदौर-देवास के बीच बरलई में नई स्टेशन बिल्डिंग बनाने का काम शुरू हो चुका है। बरलई और बिंजाना स्टेशन के बीच करीब एक किमी का अर्थवर्क का काम हुआ है। इसी तरह देवास-उज्जौन के बीच विक्रम नगर और करछा के बीच अर्थवर्क का काम लगभग पूरा हो चुका है। करछा में नई स्टेशन बिल्डिंग तैयार की जा रही है। बारिश के चलते 15 जून से अब तक काम पूरी तरह से बंद है। 15 सितंबर से काम शुरू होना था, लेकिन बार-बार हो रही बारिश के कारण काम अक्टूबर में ही शुरू होने की उम्मीद है।

जमीन अधिग्रहण का बहाना बना रहे अधिकारी

चार दिन पहले हुई अधिकारियों व सांसदों की बैठक के दौरान जब मंडल के अधिकारियों से पूछा गया कि इंदौर से देवास की ओर ट्रेनों का दबाव ज्यादा है, जबकि देवास से उज्जैन के बीच कम, फिर भी रेलवे देवास-उज्जैन के बीच काम पहले करवा रहा है। जब अधिकारियों ने जमीन अधिग्रहण का बहाना बनाया तो सांसद प्रतिनिधियों ने साफतौर पर कहा कि जमीन अधिग्रहण दोनों तरफ नहीं हुआ है। अधिकारी अपनी मर्जी से ही काम की दिशा तय कर रहे हैं।

इसलिए होती हैं ट्रेनें लेट

इंदौर-उज्जौन-देवास रूट पर 33 ट्रेनों का दबाव है। 19 ट्रेनें नियमित हैं। कुछ ट्रेनें हफ्ते में एक, दो, तीन, चार और पांच दिन ही आती हैं। अभी सिंगल लाइन और सिंगल प्लेटफॉर्म होने से यहां क्रॉसिंग की सुविधा नहीं है। इसके चलते कई गाड़ियां लेट हो रही हैं। सिंगल लाइन होने से एक ट्रेन को निकालने के लिए दूसरी ट्रेन को रोकना पड़ता है। इससे गाड़ी आधे घंटे से लेकर तीन घंटे तक लेट हो जाती है। नए प्लेटफॉर्म और लाइन डबल हो जाने पर ट्रेन को क्रॉसिंग के लिए नहीं रुकना पड़ेगा। रेलवे इंदौर-देवास-उज्जौन रूट पर मांगलिया, बरलाई, बिंजाना, नारंजीपुर, करछा और विक्रम नगर में बड़ी लेन के हिसाब से ऊंचे और लंबे प्लेटफॉर्म बना रहा है। बिंजाना में एक तरफ का नया प्लेटफॉर्म बन गया है। अधिकारियों का दावा है कि नए प्लेटफॉर्म बन जाने से ट्रेनों की क्रॉसिंग में आसानी होगी और इंदौर-उज्जौन के बीच ट्रेनों में लगने वाला समय भी कम होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network
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