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Fever Clinic in Indore: फीवर क्लीनिक पर किट की कमी, नहीं हो पा रही रैपिड एंटीजन जांच

Updated: | Sun, 09 May 2021 10:21 AM (IST)

इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि), Fever Clinic in Indore। कोरोना संक्रमण की तुरंत जांच कराने वाले लोगों के लिए फीवर क्लीनिक व केंद्रों पर रैपिड एंटीजन किट की कमी बताकर जांच नहीं की जा रही है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए कोरोना वायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ने से लोगों को थोड़े भी लक्षण दिखते हैं तो वे जांच कराने के लिए पहुंच रहे हैं। इस कारण जांच सेंटरों पर भीड़ लगने लगी है। एक दिन में ही 10 हजार से अधिक लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। इनमें आरटीपीसीआर और रैपिड एंटीजन जांच कराने वाले मरीज होते हैं। प्रशासन की ओर से रैपिड एंटीजन किट की पर्याप्त सप्लाई नहीं होने से सैंपलिंग की प्रक्रिया लड़खड़ा गई है। ज्यादातर केंद्रों में रैपिड एंटीजन सैंपलिंग की बजाय आरटीपीसीआर जांच की जा रही है। जिले में रैपिड एंटीजन किट की कमी के कारण जांच की गति धीमी है। इसके पीछे किट की कमी बताई जा रही है।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि रैपिड एंटीजन किट की कमी नहीं है और नियमित सैंपल टेस्टिंग की जा रही है। कोरोना की दूसरी लहर शुरू होते ही शुरुआती दिनों में रैपिड एंटीजन किट से हर दिन चार हजार से अधिक लोगों के सैंपल टेस्ट होते थे, लेकिन पिछले 15 दिनों से 2000 से 3000 के बीच ही सैंपल लिए जा रहे हैं।

दो-तीन दिन भटकते रहते हैं मरीज

कोरोना संक्रमण का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक लापरवाही की वजह से मांगीलाल चुरिया अस्पताल, बिचौली मर्दाना, परदेशीपुरा फीवर क्लीनिक पर पड़ताल की तो लक्ष्य से अधिक लोगों की जांच नहीं की जाती। लक्ष्य से अधिक होने पर उन्हें अगले दिन आने को कह दिया जाता है। ऐसे में संक्रमित मरीज बिना जांच कराए ही दो से तीन दिनों तक भटकता रहता है। साथ ही कई लोगों के संपर्क में भी आ जाता है। हालांकि जिनमें लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं, ऐसे मरीजों को तो आरटीपीसीआर सैंपल देने पड़ रहे हैं, क्योंकि अस्पताल प्रबंध्ान तब तक मरीज को भर्ती नहीं करता जब तक रिपोर्ट न देख ले।

बीमार व्यक्ति तोड़ रहे दम

सांस फूलने, सर्दी, खांसी, बुखार से अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन इन मौतों की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग नहीं कर रहा है। ऐसी मौत जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रही है। कुछ लोगों की मौत अस्पतालों में तो कुछ की घर पर और कुछ की इलाज के दौरान हुई है। कई लोग जांच ही नहीं करा पाते, जिससे उनकी हालत बिगड़ जाती है और अस्पताल भी बीमारी कंट्रोल नहीं कर पाता और मौत हो जाती है।

घर-घर जाकर की थी जांच : पिछली बार स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर पहुंचकर लोगों की जांच कराई थी। इस बार इस तरह की कोई व्यवस्था प्रशासन ने नहीं की है। कई वार्डों को स्वास्थ्य विभाग की टीम की जांच के बाद ही कंटेनमेंट एरिया में बदल दिया गया था। दवाइयां भी बांटी थीं, लेकिन इस बार संक्रमण रोकने के लिए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।

Posted By: Prashant Pandey
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