हेलो डाक्टर इंदौर: नए वैरिएंट से घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत

Updated: | Thu, 02 Dec 2021 08:16 AM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन को लेकर सभी चिंतित हैं। इससे बचाव के लिए हमें उसी तरह सचेत रहना होगा, जिस तरह कोरोना से बचाव के लिए रहे। शारीरिक दूरी, मास्क का उपयोग, हाथ और मुंह को साफ रखना, सैनिटाइजर का इस्तेमाल हमें काफी हद तक इस वैरिएंट से बचाएगा। वैरिएंट से घबराने के बजाय सतर्क रहने की महती आवश्यकता है। यह वैरिएंट कोरोना से 20 गुना अधिक तीव्रता से फैलता है। इसलिए कम समय में संक्रमित होने वालों की संख्या अधिक होती है।

यह बात श्वसन तंत्र विशेषज्ञ डा. रवि डोसी ने नईदुनिया द्वारा आयोजित हेलो डाक्टर कार्यक्रम में कही। विषय था- कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर जिज्ञासाएं और उनका समाधान। डा. डोसी ने संबंधित विषय पर पाठकों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि चूंकि हमारे देश में अधिकांश लोगों को टीके की दोनों डोज लग चुकी हैं। इसलिए इससे संक्रमित होने पर भी बहुत ज्यादा चिंता की बात नहीं होगी। हां यह जरूर है कि जिन्हें गंभीर बीमारी है या जिन्होंने अभी तक टीके नहीं लगवाए, वे जरूर ज्यादा सतर्कता बरतें। इस वैरिएंट से बचाव का एकमात्र यही तरीका है जिसे कोरोना से बचाव के लिए अपनाया गया था। इस दौर में घबराने की नहीं, अपितु कोरोना के प्रोटोकाल का पालन करने की जरूरत है।

इन बातों का रखें ध्यान

* जांच कराने में लापरवाही नहीं करें और संक्रमित होने पर तुरंत खुद को सबसे अलग कर लें।

* 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप की नियमित दवाई लेने वाले, कैंसर, किडनी, टीबी, हृदय संबंधी रोगी विशेष सावधानी रखें।

* मन से ही मल्टी विटामिन नहीं लें।

* कैल्शियम, प्रोटीन की दवा भी डाक्टरी सलाह से लें।

* भीड़ में जाने से बचें।

* बाजार जाएं या सुबह-शाम टहलने जाएं तो मास्क जरूर लगाएं।

* मौसमी बुखार, सर्दी-जुखाम मानकर समस्या को अनदेखा नहीं करें।

* घबराएं नहीं सावधानी बरतें।

बच्चों को भीड़ का हिस्सा नहीं बनने दें, सैनिटाइजर व मास्क का उपयोग कराएं

सवाल : कोरोना और ओमिक्रोन में क्या अंतर है?

-राजू अग्रवाल, देवास

जवाब : यह कोरोना का ही वैरिएंट है और यह उससे 20 गुना अधिक तेजी से फैलता है। दोनों के लक्षण समान हैं।

सवाल : मुझे दोनों डोज लग चुकी हैं। इस वैरिएंट से बचने के लिए क्या बूस्टर डोज भी लगवाएं?

-चित्रा घोड़पकर, इंदौर

जवाब : भारत सरकार ने अभी बूस्टर डोज लगवाने की कोई घोषणा नहीं की। न ही इस बात की पुष्टि हुई है कि बूस्टर डोज लगवाकर इस वैरिएंट से पूरी तरह से बचा जा सकता है। यह जरूर है कि जिन्होंने टीके लगवा लिए, उनके संक्रमित होने पर भी गंभीर समस्या होने की आशंका कम हो जाएगी।

सवाल : मुझे कोरोना भी हो चुका है और दोनों डोज भी लग चुकी हैं। नए वैरिएंट से बचाव के लिए क्या सावधानी रखूं?

-असलम दुलावत, खरसोदकलां

जवाब : नया वैरिएंट अधिक तीव्रता से फैलने वाला है। यदि टीके की दोनों डोज लग चुकी हैं तो संक्रमित होने के बाद भी गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका कम हो जाएगी।

सवाल : नए वैरिएंट से बच्चों को कैसे सुरक्षित रखें?

-हुकुमचंद कटारिया,सनावद, विनोद पाटनी, इंदौर

जवाब : यह जरूर कहा जा रहा है कि तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे लेकिन इस पर अभी तक कोई शोध नहीं हुआ और न ही यह प्रमाणित बात है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है फिर भी हमें बच्चों से भी कोरोना प्रोटोकाल का पालन कराना चाहिए। बच्चों को भीड़ का हिस्सा नहीं बनने दें और उन्हें सैनिटाइजर व मास्क का उपयोग कराएं। यदि वे इन नियमों का पालन नहीं कर सकते तो उन्हें घर में ही रखें।

सवाल : नए वैरिएंट के लक्षण व उपचार क्या हैं?

-इंदिरा बड़जात्या, अनिल जोशी, इंदौर

जवाब : कोरोना की तरह ही इससे संक्रमित होने पर सर्दी-खांसी, गले में खराश व तेज बुखार आता है। इसमें स्वाद और गंध जाने की समस्या नहीं होती। यह तेजी से फैलने वाला वैरिएंट है और जिन्हें टीके लग चुके हैं या जो समय पर उपचार करा लेगा, उसे गंभीर समस्या नहीं होगी।

सवाल : मुझे कुछ दिन पहले ही टीका लगा तो क्या यह नए वैरिएंट को रोकने में कारगर होगा?

-इमरान मंसूरी, इंदौर

जवाब : कोरोना या उसका कोई भी वैरिएंट हों, सभी से बचाव में टीकाकरण मददगार साबित हो रहा है। नए वैरिएंट का अलग से अभी तक कोई टीका नहीं आया है। मौजूदा टीके ही कई हद तक संक्रमण के दुष्प्रभाव से बचाने में मददगार साबित हो रही है।

सवाल: मेरा बेटा 10 वर्ष का है। नए वैरिएंट से बचाव के लिए क्या करें और बच्चों को कब से टीके लगेंगे?

-आशुतोष शर्मा, भोपाल

जवाब: बच्चों को सर्दी-खांसी या बुखार आने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। यदि चिकित्सक जांच के लिए कहे तो अनदेखा न करें। बच्चों को अनावश्क रूप से घर के बाहर नहीं जाने दें और यदि बाहर जाते भी हैं तो मास्क लगवाएं। बच्चों के लिए फरवरी तक टीके आ सकते हैं। यदि किसी बड़े को सर्दी-खांसी या बुखार है तो वह बच्चों से दूर रहे।

सवाल : मुझे कोरोना हो चुका है और रात में सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसा क्यों?

-उर्मिला साहू, इंदौर

जवाब : यदि रात में सांस लेने में समस्या है तो फेफड़े संबंधी जांच कराएं और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। आप एक बार दमा व श्वसन तंत्र विशेषज्ञ से सलाह लें।

सवाल : किसी भी वैरिएंट से बचाव कैसे किया जा सकता है?

-ओमप्रकाश बिड़ला, बेड़िया

जवाब : किसी भी तरह के संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी है कि मास्क लगाएं। शारीरिक दूरी बनाए रखें। अनावश्यक रूप से घर के बाहर नहीं जाएं और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। मन से कोई भी दवा न लें।

Posted By: gajendra.nagar