सावरकर को भारत रत्न देना, इस सम्मान का होगा सम्मान : डा. विक्रम संपत

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 08:22 AM (IST)

ईश्वर शर्मा, इंदौर। 'इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल" में चर्चित लेखक व इतिहासकार डा. विक्रम संपत ने कहा कि वीर सावरकर को 'भारत रत्न" देना एक मायने में इस सम्मान का सम्मान होगा। शुक्रवार से शुरू हुए फेस्टिवल में यह बात उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली के प्रोफेसर व चर्चित लेखक डा. आनंद रंगनाथन के एक प्रश्न के उत्तर में कही। गौरतलब है कि डा. संपत ने स्वाधीनता संग्राम सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर चर्चित पुस्तक 'सावरकर : इकोस फ्राम अ फारगोटन पास्ट, 1883:1924" लिखी है। उक्त दोनों लेखक उसी पुस्तक पर आधारित विषय 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर : व्यक्ति, मिथक और भ्रांतियां" पर आयोजित सत्र में चर्चा कर रहे थे।

जब डा. संपत से पूछा गया कि सावरकर पर लिखते समय आपको डर नहीं लगा तो वह बोले- 'मुझे अवार्ड, सम्मान, पुरस्कार की लालसा नहीं इसलिए सावरकर पर लिख पाया। 15 वर्ष पहले तक देश का माहौल ऐसा था कि सावरकर पर लिखने की कोई हिम्मत नहीं करता था। यदि करता तो उसकी नौकरी और जीवन संकट में आ जाते थे।" उन्होंने ख्यात गायिका लता मंगेशकर के भाई ह्दयनाथ मंगेशकर का उदाहरण दिया कि एक बार आल इंडिया रेडियो पर देशभक्ति की कविता गा देने पर उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ गया था। देश में तब इतनी असहिष्णुता थी। अभिनेत्री कंगना रनोट द्वारा बीते दिनों दिए गए बयान '1947 में जो आजादी मिली, वह तो भीख में मिली थी" पर उन्होंने कहा- 'कंगना ने चरम पर जाकर अपनी बात कही, लेकिन जो कहा वह तार्किक रूप से तो ठीक है।" एक श्रोता के सवाल पर उन्होंने कहा- 'नमाज, पूजा, अरदास जो भी करना हो, वह घर में की जाए। सार्वजनिक स्थलों, सड़कों पर यह करना कतई उचित नहीं।"

बढ़ता जा रहा है विचारों में पक्षपात

दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया द्वारा प्रायोजित सत्र 'विचारों में पक्षपात" में नईदुनिया के राज्य संपादक सद्गुरु शरण अवस्थी व डा. सरिता राव से बातचीत में जेएनयू के प्रोफेसर डा. आनंद रंगनाथन ने कहा कि 'इंटरनेट मीडिया पर विचारों में पक्षपात बढ़ता जा रहा है।" वह टि्वटर व फेसबुक पर भारत के विरुद्ध चलने वाले नैरेटिव पर अपनी बात कह रहे थे।

नारी सशक्तीकरण एक छलावा है : सोनल मानसिंह

एक अन्य सत्र में ख्यात नृृत्य साधिका पद्मविभूषण सोनल मानसिंह ने कहा कि नारी सशक्तीकरण की नारेबाजी एक छलावा है। यह भारत में बाहर से आया विचार है। भारत में तो सदियों से नारी पूज्य रही है। यहां तो नारी हमेशा से शक्ति का प्रतीक रही है। हमारी एक भी आराध्य देवी घूंघट में नहीं हैं। उन्होंने श्रीराम द्वारा पांव के अंगूठे से शिला को छूकर अहिल्या बना देने की कथा को क्षेपक और मिथ्या करार देते हुए कहा कि सत्य तो यह है कि जड़ होकर शिला स्वरूप हो चुकी अहिल्या ने भगवान राम के पांव छुए थे, जिससे उनकी जड़ता टूटी थी और वे चैतन्य हो उठी थीं। भगवान ने उन्हें पैर नहीं लगाया था। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, वह स्त्री को पैर लगा दें, यह संभव ही नहीं। यह हमारी मूल कथाओं में किया कया छद्म बदलाव है।


मोदी के उद्भव के बाद सुविधा वाली राजनीति खत्म हो गई : अनंत विजय

लेखक, आलोचक व वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय ने एक सत्र में कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उद्भव के बाद सुविधा वाली राजनीति खत्म हो गई है। उन्होंने सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी या राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि यदि गांधी परिवार को लगता है कि उनकी लोकप्रियता राष्ट्रव्यापी है तो उन्हें ग्रामीण सीटों के बजाय अपेक्षाकृृत बेहतर शिक्षा दर वाली शहरी सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए। वह अपनी लिखी पुस्तक 'अमेठी संग्राम : ऐतिहासिक जीत, अनकही दास्तान" पर आयोजित सत्र 'अमेठी के अंगूर खट्टे भी, मीठे भी" में बोल रहे थे।

Posted By: gajendra.nagar