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IIT Indore News: मलेरिया के साथ कोविड का उपचार जानलेवा, शोध के आधार पर आइआइटी ने चेताया

Updated: | Wed, 12 May 2021 03:52 PM (IST)

इंदौर , नईदुनिया प्रतिनिधि,IIT Indore News। लक्षणों के आधार पर किसी बुखार से पीड़ित ऐसे व्यक्ति को कोविड का परंपरागत उपचार दिया गया जो मलेरिया से ग्रसित है तो ऐसे मरीज की जान जा सकती है। आइआइटी इंदौर ने अपने शोध के आधार पर यह निष्कर्ष दिया है। कोरोना के साथ मलेरिया से पीड़ित मरीजों के समूह पर हुए अध्य्यन के आधार पर आइआइटी ने यह नतीजे जारी किए है। अध्ययन में देखा गया कि मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को यदि कोविड के उपचार में काम आ रहे स्टेराइड्स की खुराक दी जाती है तो मरीज में गंभीर न्यूरोलाजिकल साइडइफेक्ट पैदा होते हैं। इससे मरीज की जान जा सकती है।

आइआइटी इंदौर ने मलेरिया के परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम और सार्स कोविड वायरस दोनों ही संक्रमणों से एक साथ प्रभावित मरीजों पर अपने अध्ययन को अंजाम दिया। अध्ययन आइआइटी इंदौर में इंफेक्शन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप के प्रमुख डॉ हेम चंद्र झा, शोध छात्र ओमकार इंदारी और बुद्धदेव बराल के साथ ही आइएमएस ओडिशा के प्रोफेसर निर्मल कुमार मोहाकुड की टीम ने मिलकर किया है।

मलेरिया परजीवी और कोविड-19 वायरस के दोहरे संक्रमण के कारण घातक न्यूरोलाजिकल प्रभावों को बताने वाला दुनिया का यह पहला अध्ययन है। डा. झा के अनुसार कोविड महामारी के बीच भारत जैसे देशों में मलेरिया के मरीज भी बने हुए हैं। आने वाले बरसात के मौसम में मलेरिया के मामले और बढ़ेंगे ऐसे में यदि लक्षण के आधार पर मलेरिया के मरीज को कोविड का उपचार दे दिया गया तो ऐसे मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। झा के अनुसार मलेरिया और कोरोना दोनों में बुखार, शरीर में दर्द, मतली, सांस लेने में कठिनाई आदि जैसे कई अतिव्यापी लक्षण हैं। परजीवी और वायरस की जोड़ी के खिलाफ मरीज के प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का अतिरेक हेमेटोलाजिकल और जैव रासायनिक रिपोर्टों के संदर्भ में देखा गया है। कोरोना उपचार में व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले कार्टिकोस्टेराइड-डेक्सामेथासोन ने मस्तिष्क मलेरिया के खिलाफ बेहद बुरा असर डाला।

अध्ययन ने ये दिखाया है कि सहसंक्रमित हालत में बहुत कम समय में स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ सकती है। स्टेराइड्स देने में असामान्य न्यूरोलाजिकल लक्षणों के विकास को देखा गया। न्यूरोलाजिकल लक्षणों जैसे कि परिवर्तित चेतना, कोमा आदि को विकसित कर सकता है, जो घातक हो सकता है। अध्ययन के आधार पर सुझाव दिया है कि कोविड के लक्षणों के नजर आने पर मरीजों का मलेरिया की जांच भी हों। यदि मलेरिया होता है तो स्टेराइड्स न दिए जाएं।

Posted By: gajendra.nagar
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