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इंदौर में पाकिस्तान से आए करीब 4000 विस्थापितों को लगाया जाएगा टीका

Updated: | Mon, 14 Jun 2021 09:25 PM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । इंदौर में करीब 15 से 25 साल पहले पाकिस्तान से आए हुए करीब चार हजार विस्थापित सिंधी परिवार रह रहे है। इनके पास अभी तक भारतीय नागरिकता नहीं होने के कारण आधार कार्ड या भारतीय मूल का पहचान पत्र नहीं है। ऐसे में इन लोगों को टीका लगवाने में परेशानी आ रही है। जिला टीकाकरण अधिकारी डा. प्रवीण जड़िया के मुताबिक इंदौर कलेक्टर और भोपाल स्तर इन लोगों के टीकाकरण के बारे में सुझाव मांगा गया था। इसके बाद यह तय हुआ है कि इनके पास जो पाकिस्तानी पासपोर्ट है, उसके आधार पर ही इन्हें टीका लगाया जाएगा। गौरतलब है कि इंदौर में बसे पाकिस्तानी सिंधी परिवार के सदस्य पिछले दिनों कलेक्टर व सांसद से भी टीके नहीं लगने की परेशानी को लेकर मिले थे।

निजी सुरक्षा कंपनियों के सिपाही हाईरिस्क जोन में, 10 दिन में लगाना होगा वैक्सीन

शहर के विभिन्न उद्योगों, निजी कार्यालयों और बहुमंजिला इमारतों में कार्यरत निजी सुरक्षा कंपनियों के सिपाही कोरोना संक्रमण की हाईरिस्क जोन में है। इसीलिए प्रशासन ने तय किया है कि निजी सुरक्षा एजेंसियों के सिपाहियों को अगले 10 दिन में वैक्सीनेशन कराना होगा। जो एजेंसियां अपने कर्मचारियाें और सिपाहियों का वैक्सीनेशन नहीं कराएंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर मनीषसिंह ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। साथ ही मंगलवार को रवींद्र नाट्यगृह में निजी सुरक्षा एजेंसी संचालकाें की बैठक बुलाई गई है। बैठक में प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहेंगे। निजी सुरक्षा एजेंसियों से कहा जाएगा कि वे अपने यहां कार्यरत सुरक्षा कर्मचारियों का जल्द से जल्द वैक्सीनेशन करवाएं। इंदौर जैसे शहर में रहवासी टाउनशिप, औद्योगिक क्षेत्र, कारखानों, बहुमंजिला इमारतों, निजी कार्यालयों आदि जगह निजी सुरक्षा एजेंसियों की सेवाएं ली जा रही हैं।

अपर कलेक्टर पवन जैन ने बताया कि पुलिस अधिकारियाें से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शहर में करीब 150 निजी सुरक्षा एजेंसियां कार्यरत हैं। इन एजेंसियों के करीब 50 हजार सुरक्षा गार्ड अलग-अलग तैनात होंगे। किसी भी रहवासी या व्यावसायिक परिसर में जाने पर गेट पर सबसे पहले इन सुरक्षा कर्मचारियों से ही संपर्क होता है। साथ ही यह सुरक्षा कर्मचारी गेट पर अलग-अलग लोगाें के संपर्क में आते हैं। ऐसे में निजी सुरक्षा एजेंसियाें के यह सिपाही अपने आप कोरोना के हाईरिस्क जोन में आते हैं। इन सुरक्षा कर्मचारियों का वैक्सीनेशन होना अनिवार्य है।

Posted By: Sameer Deshpande
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