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दलहन में देश अब भी आयात के भरोसे, बीते दिनों में गिरे दाल के दाम

Updated: | Sat, 08 May 2021 07:11 AM (IST)

इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि। मप्र के सबसे बड़े बाजार और दाल उत्पादक गढ़ कहे जाने वाले इंदौर के बाजार में बीते महीनों में दालों की कीमत नरम होती नजर आई है। इन दिनों मंडी और बाजार बंद है। मिलों ने उत्पादन सीमित कर रहा है और कई मिलों तो उत्पादन बंद ही कर रखा है। शुक्रवार को थोक बाजार में चना और मूंग दाल के दामों में एक रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ। हालांकि कारोबारियों के अनुसार दालों की कीमतों में बीते महीनों में खास तेजी नहीं आई है। बल्कि देखा जाए तो कीमतों में नरमी ही दर्ज हुई है।

आल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार कुछ महीनों पहले जो तुवर दाल 107 रुपये किलो मिलों से बिकी थी अब वह 97 से 99 रुपये किलो बिक रही है। दालों के दामों में गिरावट आई है और बीते दिनों से लगभग स्थिर ही है। दरअसल प्रदेश और बाहर भी लाकडाउन की स्थिति है। मिलों में माल तो पर्याप्त है लेकिन सप्लाय रुका है।

दालों के थोक व्यापारी दयालदास अजीतकुमार के अनुसार दालों के दामों में अभी तेजी की उम्मीद भी नहीं है। शुक्रवार चना और मूंग दाल में एक रुपये किलों की बढ़ोत्तरी स्थानीय स्तर पर माल कम आने से हुई। प्रदेश में ही नई मूंग की फसल आ चुकी है। ऐसे में आगे तो मूंग की दाल के दाम गिरना ही है। इस समय चना और मसूर दाल 70 से 75 रुपये किलो के दाम पर थोक में बिक रही है। तुवर, मूंग और उड़द दाल के दाम भी 100 रुपये तक सीमित है। दालों में इन दिनों उपभोक्ता मांग भी ज्यादा नहीं है। सब्जियों की उपलब्धता बनी हुई है। ऐसे में दाम बढ़ने की उम्मीद भी नहीं है।

लाखों टन का निर्यात

आल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार दलहन के मामले में देश बहुत हद तक आयात पर निर्भर है। बीते दिनों में 4 लाख मेट्रिक टन तुवर और 4 लाख मेट्रिक टन उड़द का आयात किया जा चुका है। डेढ़ लाख टन मूंग आयात की जा रही है। जो जल्द देश के बंदरगाहों तक पहुंचेगी। इस बीच उड़द की अगली खेप आयात के लिए लायसेेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मिलर्स से सरकार ने 15 अप्रैल तक आवेदन मांगे थे। हमने आवेदन दे दिए हैं। विदेेश व्यापार महानिदेशालय में आवेदन लंबित है। आने वाले दिनों में आयातित दलहनों का ये स्टाक भी दालों के दाम स्थिर रखने में मददगार होगा।

खाद्य तेल काट रहा जेब

दाल से उलट खाद्य तेल की महंंगाई अब घर के राशन का बजट बिगाड़ रही है। खाद्य तेलों के दाम एतिहासिक स्तर पर पहुंच गए हैं। सोयाबीन और सोया तेल का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद मप्र में सोयाबीन तेल 150 रुपये लीटर के पार बिक रहा है। शुक्रवार को मूंगफली तेल के दाम भी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए। मूंगफली तेल खेरची मेें 180 रुपये लीटर के दाम पर बिका। सनफ्लावर तेल भी इसी स्तर पर बना हुआ है। कारोबारी चेतन आहूजा के अनुसार तेल की महंगाई से ग्राहकी घट गई है। सट्टेबाजी और वायदा कारोबार बेतहाशा महंगाई का कारण बन रहा है। सरकार कदम उठाए तो तेल के दाम नियंत्रित हो सकते हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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