Indore Lokesh Solanki Column: मूल 39 लाख रुपये और ब्याज चुकाया चार करोड़ रुपये का

Updated: | Sun, 01 Aug 2021 11:08 AM (IST)

Indore Lokesh Solanki Column: लोकेश सोलंकी, इंदौर, नईदुनिया। सरकारी विभागों में अटके उद्योगों के भुगतान के निराकरण के लिए मध्य प्रदेश में फेसिलिटेशन काउंसिल काम कर रही है। उद्योगपति शिकायत कर रहे हैं कि दो-दो साल से उनके प्रकरणों का निराकरण नहीं हो रहा। जिस काउंसिल पर निष्क्रियता का आरोप लग रहा उसने खामोशी से एक कमाल कर दिया। बीएसएनएल जैसे बेहाल सरकारी उद्यम को आदेश दिया है कि एक खास सप्लायर को चार करोड़ 51 लाख से ज्यादा का ब्याज चुकाए। जबकि मूलधन महज 39 लाख 24 हजार रुपये है। इस आदेश की फाइल उद्योगपतियों के हाथ लगी। ब्याज का आदेश पारित करने वाले अधिकारी वो हैं जो इंदौर में उद्योगपतियों की बैठक में मंच पर ही झपकी लेते दिखे थे। उद्योगपति मुख्य सचिव से शिकायत करने भोपाल पहुंचे। उन्हें मुख्य सचिव तो नहीं मिले, विभागीय मंत्री ने जरूर कांड को मानवीय भूल करार देकर अधिकारी को अभयदान दे दिया।

पटरी वालों को चार का दम

राजवाड़ा क्षेत्र के व्यापारियों ने सड़क किनारे कब्जा कर दुकान लगाने वालों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। रेडीमेड कारोबारियों ने विरोध शुरू किया तो सराफा और अन्य बाजारों के कारोबारी भी साथ आ गए। दबाव में नगर निगम ने सड़क पर सजी दुकानें हटा दीं। अटाला गली के पटरी वालों के साथ सड़क पर दुकान लगाने वाले तीन नंबर के विधायक आकाश विजयवर्गीय के पास पहुंचे। विधायक ने मदद से इन्कार कर दिया। हालांकि दो दिन बाद पटरी पर दुकानें फिर सजने लगीं। व्यापारी समझ नहीं पा रहे कि विधायक के इन्कार के बाद आखिर पटरी वाले फिर कैसे आ गए। अटाला बाजार के पटरी वाले कह रहे हैं तीन नंबर से निराश होकर वे चार नंबर पहुंचे थे। नेता पुत्र ने आश्वासन दे दिया है कि दुकानें कोई नहीं हटा सकता। आखिर निगम में चलेगी तो उनकी ही। इधर नाराज रेडीमेड व्यापारियों ने बड़े आंदोलन की तैयारी कर ली है।

एसोसिएशन चुस्त, सीए सुस्त

बीते दिनों पुणे जीएसटी इंटेलीजेंस विभाग की टीम इंदौर पहुंची। ढक्कनवाला कुआं के पास एक सीए के दफ्तर में जीएसटी के अधिकारियों ने धावा बोला। अधिकारियों ने एक कारोबारी के इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले के मामले में सीए के दफ्तर की तलाशी ले ली। जबकि कारोबारी न तो इंदौर का था न सीए उसके अकाउंट मैनेज करते थे। टैक्स प्रोफेशनलों से जुड़े एसोसिएशनों तक खबर पहुंची कि बिना सर्च वारंट के तलाशी ली गई। इस दौरान सीए से बदसलूकी हुई और मोबाइल जब्त कर लिया गया। एसोसिएशनों को आवेश आया कि मनमानी के खिलाफ शिकायत की जानी चाहिए। पीड़ित सीए से संपर्क हुआ, कार्रवाई की निंदा के बाद शिकायत के लिए सीए से पत्र मांगा गया। पीड़ित सीए ने ही यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि अधिकारियों से बुराई मोल कौन ले। एसोसिएशन के पदाधिकारी कह रहे हैं कि मुद्दई सुस्त हो तो गवाह के चुस्त होने से क्या फर्क पड़ेगा।

बिजली कंपनी में नंबर दो है, नंबर एक

जो दो नंबर के अधिकारी हैं असल में वो ही एक नंबर की तरह सब कुछ चला रहे हैं। बिजली कंपनी के अधिकारियों, इंजीनियरों और आफिस स्टाफ तक के मुंह से यह बात सुनी जा रही है। कंपनी के एमडी अमित तोमर का नर्म रुख और बड़े-बड़े मामलों पर चुप्पी ने इस नारे को पोलोग्राउंड से लेकर 15 जिलों के वितरण केंद्रों तक में प्रचलित कर दिया है। तीन दिन पहले नंबर दो की भोपाल में खास व्यक्ति से मुलाकात हुई। इसके बाद नंबर दो की कंपनी से रवानगी की अफवाहें जोर पकड़ रही हैं। नंबर दो ने यह कहकर अफवाहों को जोर दे दिया है कि मुझे तो दो साल हो चुके हैं। दो नंबर से दूरी बनाने वाले अब प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द उनकी विदाई हो ताकि असल नंबर एक को फिर से एक नंबर की तरह काम करने का मौका तो मिले।

Posted By: Prashant Pandey