Indore Mukesh Mangal Column: गृहमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा को होगी इंदौर क्राइम ब्रांच की रिपोर्टिंग

Updated: | Tue, 28 Sep 2021 01:13 PM (IST)

Indore Mukesh Mangal Column: मुकेश मंगल, इंदौर, नईदुनिया। थाना प्रभारियों की तबादला सूची जारी होने के बाद क्राइम ब्रांच में हलचल मची है। कुछ लोग बोल रहे हैं कि क्राइम ब्रांच में क्या चल रहा, इसकी रिपोर्टिंग सीधे गृहमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा को होगी। बात में दम भी है। क्योंकि गृहमंत्री के पसंदीदा निरीक्षक धनेंद्रसिंह भदौरिया की तैनाती जो हुई है। यूं तो भदौरिया पूर्वी क्षेत्र के बड़े थाने में जाने के इच्छुक थे, लेकिन विभागीय जांच और खींचतान में उलझ गए। अव्वल तो क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी बनाना बड़ी चुनौती है। फिलहाल कमान 2007 बैच के एसआइ लोकेंद्र हिहोरे के हाथों में है। चार निरीक्षक कतार में लगे हैं। जाहिर है क्राइम ब्रांच पोस्टिंग से समझौता करने वाले भदौरिया थाना प्रभारी बनना चाहेंगे और ताल्लुक अच्छे होने के कारण गृहमंत्री से संपर्क भी रहेगा। क्राइम ब्रांच ऐसी शाखा है जहां पूरे जोन के आपरेशन आपरेट होते हैं। चर्चा होगी तो बात दूर तलक भी जाएगी।

संसाधन से लैस लेकिन अभियान में फेल

तमाम संसाधनों से लैस क्राइम ब्रांच माफिया विरोधी अभियान में फ्लाप हो गई। अफसर इस बात से खफा है कि दवा-गोली और कालाबाजारी के अलावा कुछ खास नहीं नहीं कर पाई। पिछले दिनों एक बैठक के बाद अफसर बाहर निकले तो एक ने तो इशारों ही इशारों में बोल दिया कि थानों में दूसरे काम भी हैं। सीएम हेल्पलाइन, लॉ एंड आर्डर, गश्त और विवेचना भी करनी पड़ती है। क्राइम ब्रांच क्या सिर्फ उगाही करेगी। पूर्वी क्षेत्र में 200 और पश्चिम में 100 से ज्यादा इनामी फरार हैं। कॉल डिटेल-लोकेशन और रिकार्डिंग के सारे साधन होने के बाद भी क्राइम ब्रांच किसी बड़े माफिया को नहीं पकड़ पाई। कई अफसरों को तो यह भी पता है कि भूमाफिया-राशन माफिया कहां फरारी काट रहे हैं लेकिन थानों को जिम्मा सौंप आंखें मूंद लेते हैं। जिनसे बात नहीं बनती उन्हें पकड़ लेते हैं।

बंदियों की बड़ी बहन बन गई जेल अधीक्षक

सेंट्रल जेल की नई अधीक्षक अलका सोनकर ने आते ही जेल का माहौल बदल दिया है। लंबे समय से एक जगह जमे जेलकर्मियों को इधर-उधर कर बंदियों से सीधा संवाद शुरू कर रही हैं। सोनकर उज्जैन से तबादला लेकर इंदौर आई हैं। राजनीतिक पकड़ होने के बावजूद सरलता से पेश आती हैं। जहां से आती हैं बंदी रोते हुए विदाई देते हैं। सेंट्रल जेल की कमान संभालते ही उन बंदियों की कतार लगा दी जो खुद को ताकतवर समझते थे। दबे-कुचले बंदियों से बोल दिया हक के लिए आवाज उठाते रहना। बंदियों को जो आवंटित होता है वह जरूर मिलेगा। मुझे बड़ी बहन समझना। सोमवार को पितरों के लिए श्राद्ध कार्यक्रम किया तो बंदियों की आंखों में आंसू आ गए। उधर जेल का माहौल बदलते ही जेलर स्तर के अफसरों ने बिचौलियों के माध्यम से जिला जेल जाने के लिए मंत्रालय में नोटशीट तैयार करवा ली है।

जांच की जद में आ गए एसटीएफ के पुराने अफसर

स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) में पदस्थ रहे पुराने अफसरों पर आफत आ गई है। एडीजी विपिन माहेश्वरी ने जांच बैठा दी है। सवाल-जवाब का सामना कर चुके अफसरों के बयान भी होने लगे हैं। कागजों में गड़बड़ी पकड़ना एडीजी विपिन माहेश्वरी की विशेषता है। उनके आने के पहले गोल्डन फारेस्ट, फर्जी एडवाइजरी फर्म और व्यापमं जैसे गंभीर मामलों की जांच एसटीएफ ही कर रही थी। इंदौर इकाई में पदस्थ रहे अफसरों ने खूब मनमानी की और नोटिस, पूछताछ के बहाने लोगों को तलब किया। एडीजी ने पहले तो ऐसे अफसरों की एसटीएफ से छुट्टी की फिर उन पर जांच बैठा दी। बताते हैं निरीक्षक, उप निरीक्षक स्तर के कई अफसर मुलजिमों की तरह रोज एसटीएफ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जांच अफसर डायरी सामने रखकर चालान में देरी और डायरी में गड़बड़ी के संबंध में घंटों पूछताछ करते हैं।

Posted By: Prashant Pandey