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Indore News: दो साल से सोयाबीन की फसल हो रही है खराब, जानिये किसानों को कैसे मिल पाएंगे अब बीज

Updated: | Wed, 12 May 2021 06:23 PM (IST)

Indore News: जितेंद्र यादव, इंदौर, नईदुनिया। कोरोनाकाल में मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक और संकट आने वाला है। वह संकट है सोयाबीन के बीज का। दो साल से सोयाबीन की फसल खराब होने से इस साल बीज के लिए भारी किल्लत रहने के आसार हैं। प्रदेश में करीब 56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की फसल होती है और इसके लिए करीब 45 लाख क्विंटल बीज की जरूरत होगी। कृषि विभाग की निगरानी में मध्यप्रदेश बीज निगम, राष्ट्रीय बीज निगम, कृभको, नाफेड, बीज प्रमाणीकरण संस्था और बीज उत्पादक सहकारी संस्थाके जरिए बीज उपलब्ध कराया जाता है, लेेकिन प्रतिकूल मौसम और बीमारियाें के कारण इनका बीज उत्पादन कार्यक्रम भी खराब हुआ है। दूसरी तरफ निजी बीज उत्पादकों के बीज के सेंपल भी फेल हो रहे हैं। इस कारण पर्याप्त बीज मिलना मुश्किल है।

अधिकांश किसानों को खुले बाजार के बीज पर निर्भर रहना पड़ेगा, लेकिन वहां न केवल महंगा बल्कि अमानक बीज भी मिल सकता है। निजी बीज कारोबारी मुनाफाखोरी कर किसानों से मनमाने दाम वसूलने की तैयारी में हैं। दरअसल, इस समय साेयाबीन तेल में काफी तेजी है। इस तेजी का असर सोयाबीन के भाव पर भी है। पिछले साल खरीफ सीजन के बाद जो सोयाबीन 5300 से 5400 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी, वही अब लगभग 8 हजार रुपये क्विंटल बिक रही है। ऐसे में बीज की सोयाबीन तो इससे भी अधिक में मिलने का अनुमान है। दो साल से बेमौसम बारिश और सोयाबीन में फंगस के कारण सीड की क्वालिटी अच्छी नहीं रह पाई। ऐसे हालात में सरकार को चाहिए कि वह किसानों ने लिए रियायती दर पर बीज का इंतजाम करे।

अब तक कृषि विभाग भी बीज का आकलन नहीं कर पाया है। इंदौर जिले में बीज की उपलब्धता को लेकर उप संचालक कृषि एसएस राजपूत का कहना है कि इंदौर में विभिन्न शासकीय, सहकारी संस्थाओं और निजी संस्थाओं के माध्यम से 1.60 लाख क्विंटल सोयाबीन बीज उपलब्ध है। बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा इसकी टेस्टिंंग की जा रही है। अब तक करीब 60 हजार क्विंटल की जांच रिपोर्ट आ चुकी है, बाकी के परिणाम आना बाकी हैं।

इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि कितना मानक बीज उपलब्ध हो पाएगा। यह सही है कि इस बार सोयाबीन बीज की कमी रहेगी, लेकिन इंदौर की जरूरत पूरी हो जाएगी। आसपास के जिलों में परेशानी आ सकती है। इंदाैर जिले के जामली गांव के किसान संतोष पाटीदार का कहना है कि सोयाबीन खराब होने से हमने तो बड़नगर से परिचित किसानों से अच्छा बीज पहले ही ले लिया था, लेकिन कई किसानों को बीज का संकट आएगा।

कृषि अनुसंधान संस्थानों के पास भी ब्रीडर सीड की कमी

प्रदेश में भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर व राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्रों पर सोयाबीन का ब्रीडर सीड तैयार किया जाता है। बताया जाता है कि प्रतिकूल मौसम का असर इन अनुसंधान केंद्रों के ब्रीडर सीड उत्पादन पर भी पड़ा है। बताया जाता है कि यह अनुसंधान केंद्र मिलकर हर साल करीब 6 हजार क्विंटल ब्रीडर सीड उपलब्ध कराते थे, लेकिन इस साल 4 हजार क्विंटल ही हो पाएगा। ब्रीडर सीड से ही फाउंडेशन और फिर फाउंडेशन सीड से सर्टिफाइड सीड तैयार होता है जो किसानों को खेतों में उगाने के लिए उपलब्ध हो पाता है।

अपना बीज खुद तैयार करें किसान

सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और बीज अनुसंधान के प्रभारी डा. मृणाल कुचलान का कहना है कि किसानों को अपनी जरूरत के हिसाब से अपना बीज कार्यक्रम और योजना खुद भी तैयार करना चाहिए। अपने खेत में 10 प्रतिशत रकबे में बीज उत्पादन के लिए उत्तम गुणवत्ता का बीज बोना चाहिए। साथ ही गाइडलाइन के हिसाब से उसकी विशेष देखरेख, कटाई, सफाई, भंडारण करना चाहिए। भंडारण करने से पहले इनकी अंकुरण क्षमता जांचने के लिए कुछ बीज बोकर देखना चाहिए। जिन बीजों का बेहतर अंकुरण हो, उन्हें ही बीज के लिए रखें। अगले साल खेत में बोने से पहले एक बार फिर इसकी अंकुरण क्षमता को जांचना चाहिए।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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