HamburgerMenuButton

Indore Cleanest City: इंदौर में अब नदियों की बार, पानी से स्वच्छता का पंच मारने की तैयारी

Updated: | Fri, 30 Oct 2020 07:15 AM (IST)

इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि), Indore Cleanest City। लगातार चार बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बन चुका इंदौर अब 'पानी' के सहारे लगातार पांचवीं बार खिताब हासिल करने की कवायद में जुट गया है। निगम ने स्वच्छता अभियान का आगाज करते हुए सबसे पहले शहर से कचरा पेटियां हटाकर अपने मजूबत इरादों का संकेत दिया था। इसके बाद बीस साल पुराने कचरे के पहाड़ को हटाकर खूबसूरत उद्यान बनाया। 60 हजार से ज्यादा पौधे लगाकर पूरे क्षेत्र को हरा-भरा कर दिया। इस बार ऐसी नदियां जो नालों में तब्दील हो चुकी हैं, उनके आउटफॉल बंद कर नगर निगम स्वच्छता की दौड़ में फिर आगे रहना चाहता है। दिसंबर तक इसका लक्ष्य रखा गया है। यदि गंदे पानी से शहर ने निजात पा ली तो इंदौर की खान नदी पुराने स्वरूप में लौट आएगी। शहर और सुंदर हो जाएगा। निगम के सलाहकार अशद वारसी का कहना है कि पांचवीं बार पानी को लेकर किए जा रहे काम ही रैंकिंग में हमें आगे रखेंगे।

इस साल पानी का सहारा

- शहर में 5 हजार से ज्यादा आउटफॉल बंद किए जा रहे हैं जो गंदा पानी नदी में छोड़ते हैं।

- इन आउटफॉल को ट्रीटमेंट प्लांटों से जोड़ा गया है।

- शहर में आधा दर्जन ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं। यहां से उपचारित होने के बाद ही पानी को नदी में छोड़ा जाएगा।

ऐसा रहा सफाई का सफर

पहला साल : कचरा पेटी मुक्त हुआ शहर

चार साल पहले जब स्वच्छता की रैंकिंग के लिए शहर ने कवायद शुरू की, तब यहां सफाई का ढर्रा बिगड़ा हुआ था। कुछ वार्डों में डोर टू डोर कचरा संग्रहण शुरू किया गया और धीरे-धीरे इसे पूरे शहर में लागू किया गया। रैंकिंग में पहला खिताब पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण फैसला शहर को कचरा पेटी मुक्त करना ही रहा।

दूसरा साल : कचरा अलग-अलग देने लगे लोग

दूसरे साल खिताब बरकरार रखने में शहरवासियों की भूमिका अहम रही। गीला-सूखा कचरा अलग-अलग इकट्ठा करके उन्हें तय व्यवस्था के अनुसार निगम की गाड़ियों को देने की प्रक्रिया को उन्होंने मात्र तीन माह में ही अपना लिया और ट्रांसफर स्टेशनों तक अलग-अलग कचरा पहुुंचने लगा। लोग गीले कचरे से घरों में खाद बनाने लगे।

तीसरा साल : हटा कचरे का विशाल पहाड़

तीसरे साल स्वच्छता की रैंकिंग बरकरार रखने के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड पर फोकस किया गया। यहां 20-25 वर्ष पुराने कचरे के करीब 14 लाख मीट्रिक टन 'पहाड़' को हटाने काम शुरू हुआ। लैंडफिल प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देकर वहां उद्यान बनाया गया। 60 हजार से ज्यादा पौधे लगाकर पूरे इलाके को हरा-भरा कर दिया गया।

चौथा साल : दीवारें सजाई, कचरे से कमाई

चौथे साल फिर से शहर ने स्वच्छता का ताज बरकरार रखने के लिए शहर की खूबसूरती पर ध्यान दिया। दीवारों को, फ्लाई ओवरब्रिजों को सजाया। सड़कें भी ऐसी, जहां लोग बैठकर खाना खा सकें। कचरे से बने ईंधन ने सिटी बसों को ऊर्जा दी। थ्री आर यानी रिसाइकिल, रिड्यूज और रियूज के मंत्र को शहर ने बखूबी अपनाया।

वाटर प्लस रैंकिंग में है नंबर

स्वच्छता रैंकिंग में वाटर प्लस के लिए भी नंबर हैं। इस बार हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं। हमारे ट्रीटमेंट प्लांट भी संचालित हो रहे हैं। हमारा फोकस शहर के जलस्रोतों को साफ रखने पर है। - संदीप सोनी, अपर आयुक्त, नगर निगम, इंदौर

Posted By: sameer.deshpande@naidunia.com
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.