Indore Ujjwal Shukla Column: मालवा में अब नेता पुत्रों को चुननी होगी नई राह!

Updated: | Sat, 23 Oct 2021 08:58 AM (IST)

Indore Ujjwal Shukla Column: उज्जवल शुक्ला, इंदौर, नईदुनिया। मालवा समेत मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में भाजपा हो या कांग्रेस, राजनीति में सफल नेताओं के पीछे पुत्र-पुत्री की सक्रिय भूमिका रही है। निर्वाचन क्षेत्र में सियासत के सारे सूत्र ये ही संभाल रहे हैं। अब भाजपा नेताओं को अपने पुत्रों की चिंता सताने लगी है। वर्तमान में हो रहे उपचुनावों में भाजपा ने खंडवा और रैगांव में अपने दिवंगत सांसद, विधायक के पुत्रों को टिकट न देकर बड़ा संदेश दिया है। इस संदेश से कई नेता सकते में हैं। पार्टी के इस कदम से भाजपा के इंदौरी नेता खासतौर से भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और विधायक मालिनी गौड़ को अपने पुत्रों के लिए नई राह तलाशनी होगी। गौड़ के पुत्र एकलव्य अपने विधानसभा क्षेत्र में खूब सक्रिय रहते हैं और अगले चुनाव में वे टिकट की दावेदारी कर सकते हैं। विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विधायक हैं, पर यदि पार्टी इसी नीति पर चली तो अगले चुनाव में उनका पत्ता कट सकता है।

जल्द ही ट्रेन में बैठकर खाने का स्वाद ले सकेंगे इंदौरी!

स्वाद के शौकीन इंदौरियों को शहर में खाने का एक और नया ठीया जल्द मिलने जा रहा है। लालबाग के पीछे अर्बन हाट में कई दिनों से बनकर तैयार रखे रेल कोच रेस्टोरेंट को शुरू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। पर्यटन विकास निगम ने इस रेल कोच को भोपाल की एक कंपनी को ठेके पर देने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि करोड़ों की जमीन पर डेढ़ करोड़ की लागत से तैयार इस खाऊ ठीये को मात्र ढाई करोड़ रुपये में तीस साल की लीज पर दिया गया है। कंपनी दीपावली केबाद कभी रेल कोच रेस्टोरेंट शुरू कर देगी। पहले पर्यटन विभाग ही इसका संचालन करने वाला था, लेकिन लंबे समय तक मामला अटका रहा। रेस्टोरेंट का काम 2016 में शुरू किया गया था, जो लगभग एक साल में ही बनकर तैयार हो गया था।

मौसमी बीमारी बताकर डेंगू से पल्ला झाड़ रहा स्वास्थ्य विभाग

इंदौर और आस-पास के कई जिलों में डेंगू डंक मार रहा है, फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में मरीजों की संख्या कम आ रही है। अस्पतालों और निजी डाक्टरों केक्लीनिकों पर काफी संख्या में डेंगू के मरीज पहुंच रहे हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग इसे मौसमी बीमारी बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है। निजी अस्पताल में इलाज करा रहे डेंगू मरीजों की जांच रिपोर्ट नकारने के कारण स्वास्थ्य विभाग के डेंगू संबंधित आंकड़ों व जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। कई कालोनियों में हर दूसरे घर में कोई न कोई सदस्य बीमार है, बल्कि कहीं-कहीं तो पूरा परिवार चपेट में है। स्वास्थ्य विभाग इन्हें डेंगू का मरीज मानने को सिर्फ इसलिए तैयार नहीं है, क्योंकि इनका इलाज निजी डाक्टर के पास या निजी अस्पताल में चल रहा है। प्रशासन को चाहिए कि कोरोना की तरह डेंगू के मामले में भी निजी अस्पतालों के आंकड़ों को शामिल करे।

चुनाव प्रचार से सिंधिया समर्थक दूर क्यों?

मध्य प्रदेश में हो रहे उपचुनावों से सत्ता या विपक्ष की सेहत पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। फिर भी इन चुनावों में एक बात चर्चा का विषय बनी हुई है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक प्रचार अभियान में दिख क्यों नहीं रहे हैं? सांवेर में हुए उपचुनाव में भाजपा नेताओं की कड़ी मेहनत के कारण ही प्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट को भारी मतों से जीत मिली थी। सिलावट को जीत में मदद करने वाले नेता रमेश मेंदोला, उमेश शर्मा आदि तो वर्तमान चुनावों में भी सक्रिय नजर आ रहे हैं, पर सिंधिया के खास सिपहसालार तुलसी पहलवान कहीं नजर नहीं आ रहे। सिंधिया समर्थक अन्य कई नेता भी प्रचार से नदारद हैं। राजनीतिक पंडित इसके मायने तलाशने लगे हैं। सवाल है कि प्रदेश भाजपा उनका उपयोग नहीं करना चाहती या वे खुद दूरी बनाकर रखना चाहते हैं। यह भी माना जा रहा है कि संगठन अभी कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी नहीं देना चाहता।

Posted By: Prashant Pandey