वृंदावन में होलकरों के मंदिर और बावड़ी से हटाए शिलालेख

Updated: | Tue, 07 Dec 2021 08:15 AM (IST)

जितेन्द्र यादव, इंदौर। देश की प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक नगरियों में होलकर राजवंश द्वारा बनाए गए स्मारकों और पुरातात्विक धरोहरों की पहचान नष्ट की जा रही है। वृंदावन (मथुरा) में मल्हारराव होलकर और देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा करीब 250 साल पहले बनाए गए मंदिर, बावड़ी और घाटों से न केवल ऐतिहासिक शिलालेख गायब किए जा रहे हैं, बल्कि अवैध कब्जे भी हो रहे हैं। अखिल भारतीय होलकर महासंघ के सदस्यों के मुताबिक होलकरों द्वारा निर्मित श्री चैन बिहारी मंदिर के तीन प्रवेश द्वार पर लगे होलकरों के शिलालेख हटा दिए गए हैं। एक प्रवेश द्वार को बंद कर वहां यमुनाजी का छोटा-सा मंदिर बना दिया है, ताकि किसी को पता ही न चले कि कभी यहां प्रवेश द्वार था। यहां पास में ही लाल पत्थरों से बनी खूबसूरत बावड़ी का शिलालेख भी गायब कर दिया है और एक संस्था ने इसे अपने परिसर के कब्जे में ले लिया है।

यमुना नदी किनारे बने कालियादह और चीर घाट भी उपेक्षित हैं और यहां अवैध कब्जा किया जा रहा है। होलकर महासंघ ने धरोहर की पहचान बचाने के लिए महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य और पद्मश्री डा. विकास महात्मे को पत्र लिखा। इसके बाद महात्मे ने उत्तरप्रदेश के संस्कृति मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी को पत्र लिखकर इस पुरा संपदा को नष्ट करने से बचाने और संरक्षण करवाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि इंदौर के महाराजा मल्हारराव होलकर और देवी अहिल्याबाई होलकर ने वृंदावन में मंदिर, धर्मशाला, घाट और बावड़ी का निर्माण कराया था। कुछ आसामाजिक तत्व इन्हें नष्ट कर रहे हैं। इस धरोहर से धनगर और पाल समाज के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है।

मथुरा, ए डिस्ट्रिक्ट मेम्योर में ब्रिटिश अधिकारी ने भी किया है धरोहरों का जिक्र

होलकर महासंघ के प्रतिनिधि और इतिहासकार घनश्याम होलकर ने बताया कि वर्ष 1882 में मथुरा, ए डिस्ट्रिक्ट मेम्योर में तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारी एफएस ग्राउस ने भी वृंदावन में अहिल्याबाई द्वारा निर्मित प्राचीन धरोहरों का जिक्र किया है। इसमें लाल पत्थरों की बावड़ी, कालियादह, चीर घाट, मंदिर और धर्मशाला का उल्लेख शामिल है। वृंदावन में उस धर्मशाला को हम तलाश रहे हैं, लेकिन पता नहीं चल पा रहा है। अहिल्याबाई जब उत्तर भारत की यात्रा पर थी, तब मथुरा से वृंदावन जाने वाले मार्ग पर उन्होंने अहिल्यागंज के नाम से एक गांव बसाया था। आज इस गांव के प्राचीन चिह्न भी मिटा दिए गए हैं।

पूरे उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जा रहा है। वृंदावन में भी अहिल्याबाई होलकर से जुड़ी धरोहर का संरक्षण किया जाएगा। - डा. नीलकंठ तिवारी, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, धर्मार्थ कार्य, संस्कृति एवं पर्यटन, उत्तर प्रदेश

Posted By: Prashant Pandey