इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म को लेकर संयुक्त संसदीय समिति बना रही नई गाइडलाइन

Updated: | Thu, 09 Dec 2021 10:05 AM (IST)

इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक, वाट्सएप, टि्वटर, इंस्टाग्राम आदि के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही जनहित याचिका में बुधवार को सुनवाई हुई। राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अभिभाषक विवेक तनखा वाट्सएप की तरफ से उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिका 2011 की गाइडलाइन को चुनौती देते हुए दायर हुई है। केंद्र सरकार इंटरनेट मीडिया को नियंत्रित करने के लिए नई गाइडलाइन बना रही है। संयुक्त संसदीय समिति ने इस पर काम शुरू भी कर दिया है इसलिए याचिका को निरस्त किया जाए। कोर्ट ने उनसे कहा कि जो भी आपत्ति है वे उसे छह सप्ताह के भीतर लिखित में पेश कर सकते हैं। याचिका में अब इंटरनेट मीडिया कंपनियों के विदेशी भागीदार भी पक्षकार होंगे। अगली सुनवाई फरवरी में होगी।

जनहित याचिका संस्था मातृ फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अमेय बजाज ने दायर की है। कहा है कि इंटरनेट प्लेटफार्म पर आनलाइन जुआ, आर्थिक धोखाधड़ी सिखाई जा रही है। इससे लोगों की निजता भंग हो रही है। ये प्लेटफार्म सांप्रदायिक हिंसा फैलाने से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट फैलाते हैं। इन पर अश्लीलता भरे फोटो व वीडियो की भरमार है। कापीराइट व ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने के साथ-साथ ये प्लेटफार्म सरकार, सुरक्षा बल, न्यायपालिका व देश की धरोहरों का मजाक बना रहे हैं।

चलने योग्य नहीं है याचिका

बुधवार को एडवोकेट तनखा ने याचिका के चलन योग्य होने को चुनौती दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि एक ही मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिका नहीं चल सकती। इस पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिका में मुद्दे अलग हैं। इस पर कोर्ट ने वाट्सएप के वकील से कहा कि वे लिखित में आपत्ति दे दें। कोर्ट उस पर विचार करेगी।

Posted By: Prashant Pandey