मालवा-निमाड़ में जहरीली शराब का जानलेवा कारोबार, ढाबों से किराना दुकान तक अवैध मयखाने

Updated: | Wed, 28 Jul 2021 08:41 AM (IST)

मालवा-निमाड़ (टीम नईदुनिया)। जहरीली शराब से मंदसौर और खरगोन जिले के आठ लोगों ने जान गंवा दी। गत वर्ष उज्जैन में भी 14 लोगों की मौत हुई थी। बावजूद अवैध शराब बनाने और बेचने का काला कारोबार नहीं थम रहा है। मालवा-निमाड़ में नईदुनिया ने पड़ताल की तो सामने आया कि ढाबों से लेकर किराना दुकान तक शराब परोसी जा रही है। गुजरात की सीमा से सटे जिलों के शराब माफिया वहां की शराबबंदी का फायदा उठा रहे हैं। आदिवासी बहुल जिलों में हाल और भी बुरे हैं। यहां गांव-फलिये तक महुआ की शराब बनाई और बेची जा रही है। आबकारी विभाग और पुलिस के दावे हैं, मगर जानलेवा कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा।

खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध के बैक वाटर क्षेत्र में नर्मदा नदी के किनारे जंगलों में अवैध रूप से शराब बनाकर बेचने का कारोबार चल रहा है। शराब माफिया खंडवा और खरगोन जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में भट्टियां लगाकर शराब बनाते हैं। ओंकारेश्वर के निकट ग्राम डुकिया और गुंजारी के बीच जंगल में पुलिस ने दो माह पहले कार्रवाई कर करीब चार लाख रुपये का महुआ लहान और शराब नष्ट की थी। जिला आबकारी अधिकारी आरपी किरार ने बताया कि सात माह में 35 लाख रुपये से अधिक की शराब जब्त की है।

जिले में ढाबों से लेकर किराना दुकानों तक अवैध शराब जब्त हुई है। आबकारी विभाग ने जनवरी से 15 जुलाई तक 1624 स्थानों पर कार्रवाई कर देशी-विदेशी, हाथ भट्टी सहित केमिकल से तैयार एक करोड़ 95 लाख 49 हजार 371 रुपये की अवैध शराब जब्त की और 28 वाहनों को राजसात किया है। जिला आबकारी अधिकारी मनीष खरे ने बताया कि एबी रोड सहित हाईवे के माध्यम से पड़ोसी राज्यों से शराब विक्रय के लिए लाई जाती है। कार्रवाई लगातार जारी है।

रतलाम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ की शराब बनाकर बेची जाती है। तस्कर राजस्थान से भी लाते हैं, क्योंकि वहां यह सस्ती है। पास के झाबुआ से भी अवैध शराब लाई जाती है। पिपलौदा रोड, थूरिया रोड, सरवन के पास, बाजना क्षेत्र के कच्चे रास्तों से परिवहन किया जाता है। आबकारी विभाग ने छह माह में 20 से अधिक स्थानों पर कार्रवाई की है।

झाबुआ : गुजरात में शराबबंदी का फायदा उठा रहे

झाबुआ जिले के शराब माफिया गुजरात में शराबबंदी का फायदा उठा रहे हैं। यहां से शराब गुजरात में खपाई जा रही है। यही कारण है कि जिले के सरकारी ठेकों से शासन को हर साल 203 करोड़ रुपये का राजस्व मिल रहा है। गुजरात की सीमा से सटे पिटोल, मदरानी, वट्ठा जैसे छोटे कस्बो में सरकारी शराब के ठेके करोड़ों रुपये के होते हैं। सहायक जिला आबकारी अधिकारी एएस डंडीर का कहना है कि निरंतर कार्रवाई की जा रही है।

बड़वानी जिले में नर्मदा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर महुआ लहान से शराब बनाने का काम होता है। छह माह पूर्व आबकारी टीम ने नाव से शराब का अवैध परिवहन करते पकड़ा था। सहायक आबकारी अधिकारी जीएस धुंध ने बताया कि अप्रैल, मई व जून में 755 प्रकरण बनाए गए। शाजापुर जिले में ढाबों और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब का विक्रय होता है। पुलिस और आबकारी विभाग का दावा है कि निरंतर कार्रवाई की जाती है।

धार जिले में भी अवैध रूप से शराब बनाई जाती है। 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक 4211 प्रकरण बनाए गए व 2880 लोगों को गिरफ्तार किया गया। तीन करोड़ 30 लाख 68 हजार की शराब जब्त की गई, वहीं तीन करोड़ 10 लाख के वाहन जब्त किए गए। माफिया गुजरात तक अवैध ढंग से शराब पहुंचाने के लिए जिले से गुजर रहे इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और लेबड़-मानपुर फोरलेन का उपयोग करते हैं।

उज्जैन : 14 मौतों के बाद एसपी का हुआ था तबादला

उज्जैन जिले में अक्टूबर 2020 में जहरीली शराब पीने से 14 लोगों की मौत हुई थी। मामले में तीन आरक्षकों सहित 16 लोगों को आरोपित बनाया गया था। आरक्षकों को बर्खास्त भी कर दिया गया था। इसके अलावा तत्कालीन एसपी मनोज सिंह और एएसपी रूपेश द्विवेदी का तबादला हो गया था। जिले में नौ महीनों में 500 से ज्यादा अवैध शराब बेचने के प्रकरण दर्ज हुए हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay