Naidunia Exclusive: बारिश में पहाड़ियों से पानी सहेज कर कान्ह और सरस्वती नदियों को जीवनदान देगा इंदौर

Naidunia Exclusive: दस पहाड़ियोें से सहेजेंगे 4.08 लाख क्यूबिक मीटर पानी। नालियों के जरिये कच्चे तालाब में सहेजा जाएगा बारिश का पानी।

Updated: | Tue, 17 May 2022 09:36 AM (IST)

Naidunia Exclusive: उदय प्रताप सिंह, इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर अब बारिश का पानी सहेजने के संकल्प के साथ काम शुरू कर रहा है। शहर के आसपास की दस पहाड़ियों से बहकर नष्ट होने वाले पानी से कान्ह व सरस्वती नदियों को जीवनदान दिया जाएगा। यही नहीं शहर के तालाब भी इस पानी से लबालब हो जाएंगे। नगर निगम ने अनुमान लगाया है कि बारिश के सीजन में पहाड़ियों से चार लाख आठ हजार क्यूबिक मीटर पानी सहेजा जा सकता है। इस परियोजना की कुल लागत दो करोड़ रुपये आंकी गई है।

नगर निगम रालामंडल, देवगुराडिया, मोरोद, माचल, बिजासन टेकरी, बीएसएफ, गोम्मट गिरी, रेवती रेंज, पितृ पर्वत, सिटी फारेस्ट सहित दस पहाड़ियों पर गेबियन डैम (कच्चे तालाब) व ट्रेचेंस (नालियां/नाले) बनाकर पानी का संग्रह करेगा। बारिश के पहले इन पहाड़ियों के आसपास करीब 25 किलोमीटर हिस्से में पांच मीटर गहरे व पांच मीटर चौड़े नाले बनाए जा रहे हैं। पितृ पर्वत के आसपास कैचमेंट एरिया में भी नालियां बनाई जाएंगी।

इसके बाद निचले हिस्से में दो से तीन छोटे तालाब बनाकर पानी सहेजा जाएगा। इसी तरह सघन वनक्षेत्र की वजह से कभी शहर का आक्सीजन केंद्र रहे कस्तूरबा ग्राम के आसपास के पहाड़ों के पानी को भी एकत्र कर जल संग्रहण संरचनाएं बनाने की योजना बनाई गई है। बारिश के पहले निगम द्वारा इंदौर शहर के आसपास के करीब 27 इलाकों को रिचार्ज जोन बनाने की तैयारी है।

ताकि नदियां बन सकें सदानीरा

कान्ह और सरस्वती नदियों को नई पीढ़ी ने नाले के रूप में ही देखा है। 70 के दशक तक इन नदियों में दस माह से ज्यादा समय तक साफ पानी बहता था। लेकिन जैसे-जैसे नदी में पानी आने के स्रोत बंद हुए और नदियों में गंदे पानी को छोड़ा जाने लगा, ये नालों में बदल गई। पिछले सात साल से इन नदियों को फिर से शुद्ध करने की कवायद जारी है। 500 करोड़ रुपये खर्च कर सीवरेज नेटवर्क का विस्तार कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) बनाए गए हैं। साथ ही शहर के पांच हजार से ज्यादा नालों को नदी में मिलने से रोका गया है। अब पहाड़ों से बहकर आने वाला पानी जब इन नदियों तक पहुंचेगा तो ये फिर से पानीदार हो जाएंगी।

इनका कहना है

पहली बार इंदौर में पहाड़ों से होकर आने वाले पानी को सहेजने का नवाचार किया जा रहा है। नालियों के माध्यम से पानी को कच्चे तालाब में सहेजा जाएगा। इससे कान्ह व सरस्वती नदियों में पर्याप्त मात्रा में पानी रहेगा।

- सुनील गुप्ता, अधीक्षण यंत्री, नगर निगम।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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