इंदौर में आलू की नई फसल निकलना शुरू, जिन किसानों के पास पानी है वे करेंगे गेहूं की पछेती बुआई

Updated: | Sun, 05 Dec 2021 02:38 PM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । मालवा में आलू की फसल निकलना शुरू हो गई है। अभी उन किसानों की फसल ही निकल रही है जिन्होंने पहले आलू बोया था, लेकिन नए आलू की ठीक से आवक 15 दिसंबर के बाद ही शुरू होगी। आलू निकालने के बाद कई किसान गेहूं की पछेती बुआई भी करेंगे। इनमें वे किसान होंगे जिनके पास खेतों में सिंचाई के साधन हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की इंदौर स्थित क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र के कृषि विज्ञानी डा. एके सिंह का कहना है कि गेहूं की पछेती यानी देर से बुआई के लिए पूसा अहिल्या और पूसा-111 प्रजाति हैं। इनकी बुआई करके किसान बेहतर उत्पादन ले सकते हैं।

कृषि के जानकारों का कहना है कि गेहूं की खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है। इसकी खेती के लिए अनुकूल तापमान बुवाई के समय 20-25 डिग्री सेंटीग्रेड उपयुक्त माना जाता है। गेहूं की खेती मुख्यतः सिंचाई पर आधारित होती है। गेहूं की खेती के लिए दोमट भूमि सर्वोत्तम मानी जाती है, लेकिन इसकी खेती बलुई दोमट, भारी दोमट, मटियार तथा मार एवं कावर भूमि में की जा सकती है। साधनों की उपलब्धता के आधार पर हर तरह की भूमि में गेहूं की खेती की जा सकती है।

गेहूं की फसल को अच्छे और समान बीज अंकुरण के लिए अच्छी तरह से चूर्णित लेकिन कॉम्पैक्ट बीज-बिस्तर की आवश्यकता होती है। सिंचित क्षेत्रों में पिछली फसल की कटाई के बाद डिस्क या मोल्ड बोर्ड हल से खेत की जुताई कर दें। वर्षा सिंचित क्षेत्रों में खेत की तैयारी सावधानी से की जाए क्योंकि इस पर नमी संरक्षण निर्भर करता है। खेतों को आमतौर पर एक गहरी जुताई के बाद हल और फिर तख्ती से दो से तीन बार जुताई करके तैयार किया जाता है।

इन क्षेत्रों में शाम के समय जुताई कर दें जिससे ओस की नमी को सोखने के लिए पूरी रात का समय मिल जाता है। इसके बाद सुबह जल्दी ही प्लैंकिंग कर लें। 10-30 मीटर चौड़ाई का मध्यवर्ती क्षेत्र को अजैविक क्षेत्र से बचने के लिए रखी जाए।

Posted By: Sameer Deshpande