Product Indore News: उत्पादों की लागत पर भारी पड़ रही पैकिंग, 30 प्रतिशत महंगा पैकिंग मटैरियल

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 07:15 AM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Product Indore News। दिवाली पर बाजार से खरीदी कर रहे उपभोक्ता शायद ही कभी उत्पाद की पैकेजिंग की कीमत पर गौर करते हैं। उपभोक्ता द्वारा आमतौर पर अनदेखी की जाने वाली पैकेजिंग की लागत निर्माता उद्योगों पर भारी पड़ रही है। ईंधन से लेकर कृषि उत्पाद और रसायन से लेकर परिवहन की बढ़ती लागत से परेशान उद्योग अब पैकेजिंग सामग्री के दामों में आए उछाल से बेहाल हैं। पेपर से लेकर पालिथिन और कोरोगेटेड (गत्ते) बाक्स से लेकर नानवोवन थैले की कीमत उद्योगों पर भारी पड़ रही है।

दो महीनों में ही तमाम तरह की पैकेजिंग सामग्री के दामों में 30 प्रतिशत तक का उछाल आ चुका है।इसमें प्लास्टिक से लेकर कागज और गत्ते की पैकेजिंग सामग्री भी शामिल है। हाल यह है कि उद्योग पैकेजिंग की लागत का सामंजस्य उत्पादों की कीमतों से नहीं बैठा पा रहे हैं। आने वाले दिनों में तमाम उत्पादों की कीमतें बढ़ती है तो पैकेजिंग पर बढ़ा हुआ खर्च भी उसकी वजह होगा। एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मप्र (एआइएमपी) के उपाध्यक्ष योगेश मेहता के अनुसार प्लास्टिक का दाना जिसका उपयोग पालिथिन से लेकर तमाम पैकेजिंग सामग्री बनाने में होता है उसकी कीमत दो महीने में 30 प्रतिशत तक उछली है। 80 रुपये किलो मिलने वाला प्लास्टिक दाना (ग्रेन्युअल्स) अब 120 रुपये किलो के दाम बिक रहा है। प्लास्टिक दाना पेट्रोलियम का उत्पाद है। उत्पादन रिलायंस, ओएनजीसी जैसी कंपनियां करती है। बढ़े पैमाने पर विदेश से आयात भी होता है। कंटेनरों का भाड़ा बढ़ चुका है। पेट्रोलियम पदार्थ महंगे हैं। विदेश से कंटेनर और माल आसानी आ भी नहीं रहा हैै। इसके साथ ही तमाम कैमिकल व अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ी है।ये सब कारण तो असर डाल ही रहे हैं। भारत में आने वाला प्लास्टिक व अन्य तरह का स्क्रैप भी कम हो गया है। स्क्रैप को रिसायकल कर भी बड़े पैमाने पर पैकेजिंग सामग्री बनती थी। इंदौर में पैकेजिंग उद्योग संचालक मोहनसिंह रघुवंशी के कीमतों में वृद्धी का कुल हिसाब जोड़ा जाए तो छह महीने में दाम 50 से 75 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। डुपलेक्स पेपर हो या छपाई के काम आने वाली स्याही। पहले हमने मुनाफा घटाकर व्यापार करने की कोशिश की लेकिन अब कीमतें बढ़ाना ही पड़ी। हर दिन दाम बढ़ते हैं ऐसे में बाजार में व्यापार का नियम बन गया है कि आज की बुकिंग आज के दाम पर अगले दिन का भरोसा नहीं।

नमकीन में ढाई प्रतिशत लागत

पैकेजिंग सामग्री की कीमतें बढ़ने से अन्य तमाम उद्योगों के साथ स्वाद के शहर इंदौर में मिठाई-नमकीन उद्योग भी बेहाल है। मप्र मिठाई नमकीन निर्माता विक्रेता व्यापारी एसोसिएशन के सचिव अनुराग बोथरा के अनुसार पहले से खाने का तेल, बेसन व मसालों के साथ परिवहन और कुकिंग गैस महंगी हो चुकी है। अब पैकिंग मटैरियल भी परेशान कर रहा है। नमकीन में ढाई प्रतिशत लागत पैकिंग की होती है। इसमें फूड ग्रेड पालीबैग से लेकर कार्टन और नानवुवन बैग शामिल है।पहले जो पालिथीन 180 रुपये किलो थी अब हमें ढाई सौ रुपये किलो में मिल रही है।कोरोगेटेड बाक्स पर पहले 12 प्रतिशत जीएसटी लग रहा था। 1 अक्टूबर से 18 प्रतिशत लागू होने लगा है।कोरोना के बाद अब बाजार में रौनक दिख रही है। इस दिवाली पर तो हम दाम नहीं बढ़ा रहे लेकिन आगे नमकीन मिठाई के दाम बढ़ाना ही होंगे। इसमें पैकिंग के खर्च का भी योगदान रहेगा।

Posted By: gajendra.nagar