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शहरनामा : केंद्रीय मंत्री नहीं, पर उनसे कम भी नहीं

Updated: | Wed, 12 May 2021 03:08 PM (IST)

शहरनामा : अमित जलधारी

भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पिछले महीने इंदौर के लिए ताबड़तोड़ जिस तरह से आक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की व्यवस्था करवाई, उससे यह साबित हो गया है कि केंद्र स्तर पर इंदौर की सुध लेने वाला एक नेता तो अभी बाकी है। विजयवर्गीय भले ही अभी केंद्रीय मंत्री नहीं बन पाए हों, लेकिन उनका प्रभाव किसी केंद्रीय मंत्री से कम नहीं है। यह बात स्थानीय नेताओं को समझने की जरूरत है ताकि विजयवर्गीय की मदद से शहर हित में ज्यादा से ज्यादा विकास कार्यों और सुविधाओं की मंजूरी दिलवाई जा सके। सूत्र कहते हैं कि विजयवर्गीय खुद आगे रहकर ऐसा करेंगे, तो इसे हस्तक्षेप कहा जाएगा। भाजपा महासचिव को शहर के लिए कुछ करने में कोई गुरेज नहीं हैं, बशर्ते इसका प्रस्ताव खुद सांसद या अन्य जनप्रतिनिधि दें। हालांकि, ऐसा करके कोई भाजपा नेता प्रदेश के आला नेताओं को नाराज नहीं करना चाहेगा। जाहिर है, इस राजनीति में नुकसान इंदौर का होता रहेगा।

16 मई के बाद क्या होगा

कोरोना और लाकडाउन से परेशान जनता बेसब्री से स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रही है। लोगों को उम्मीद है कि इस साल भी जून से बंद व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू होने लगेंगी। इसका फैसला स्थानीय स्तर पर गठित जिला आपदा नियंत्रण समितियां लेंगी। इंदौर के बारे में चर्चा है कि 16 मई के बाद जनता और व्यापारियों को कुछ राहत दी जा सकती है। पहले चरण में किराना और सब्जी विक्रेताओं को लेकर जिला प्रशासन कुछ राहतें दे सकता है। फिर स्थितियां देखकर बाकी गतिविधियों पर फैसला होगा। बहरहाल, लाकडाउन को लेकर गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने खेल चल रहा है। पहले केंद्र सरकार ने इसका फैसला प्रदेश सरकारों पर छोड़ा और प्रदेश सरकार ने जिलास्तरीय समितियों पर। अब ब्लाक, गांव और वार्ड स्तर पर आपदा प्रबंधन समूह बनाकर सरकार ने एक तरह से सारे अधिकार स्थानीय स्तर पर सौंप दिए हैं।

फर दिखाएंगे हरी झंडी?

पिछले साल अनलाक के बाद सांसद शंकर लालवानी ने बंद ट्रेनों के शुरू होने पर खूब हरी झंडियां दिखाई थीं। उन्होंने जितनी गाड़ियों को झंडी दिखाई, उनमें से ज्यादातर फिर बंद हो चुकी हैं। कोरोना महामारी का प्रकोप थमने पर दोबारा सिलसिलेवार बंद ट्रेन शुरू होंगी। अब सवाल यह है कि क्या सांसद फिर ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने जाएंगे। खैर, यह जानना जरूरी है कि सांसद के कार्यकाल में इंदौर-अजमेर-जयपुर लिंक एक्सप्रेस और काशी महाकाल एक्सप्रेस फिलहाल स्थायी रूप से बंद हो गई हैं। ज्यादातर रेल परियोजनाओं को नाममात्र की धनराशि मिल पाई है। यानी रेलवे के मामले में इंदौर ऊपर जाने के बजाय नीचे आ रहा है। कहने वाले कह रहे हैं कि दिल्ली में इंदौर की आवाज पूरी मजबूती से उठाने की जरूरत है। केवल मुस्कुराकर ज्ञापन देकर आने से कुछ नहीं होगा। ऐसे कई ज्ञापन केंद्रीय मंत्रियों के पास पड़े रहते हैं।

चैतन्य की छटपटाहट का अंत

इंदौर में बतौर नगर निगम अपर आयुक्त पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) 2013 बैच के अधिकारी एस कृष्ण चैतन्य करीब सालभर से छटपटा रहे थे। यह पद उन्हें रास नहीं आ रहा था और कई बार वे आला स्तर पर पीड़ा बता चुके थे। लंबे इंतजार के बाद ही सही, लेकिन सरकार ने 7 मई को उन्हें दमोह कलेक्टर बनाकर उन्हें इंदौर से मुक्त कर दिया। हाल ही में कोरोना बीमारी से ठीक हुए चैतन्य तत्काल दमोह रवाना हो गए और जाइनिंग दे दी। निगम में राजस्व, बिल्डिंग परमिशन, स्टोर, वर्कशाप और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालते हुए उन्होंने पूरी शिद्दत से काम किया और राजस्व चोरी बचाकर निगम की कमाई भी बढ़ाई। बिल्डिंग परमिशन के इंजीनियरों की छोटी से छोटी गलती या कारस्तानी वे तुरंत पकड़ लेते थे, इसलिए इंजीनियर उनसे खौफ खाते थे। जनप्रतिनिधियों को भी चैतन्य ने कभी ज्यादा हावी नहीं होने दिया।

Posted By: Prashant Pandey
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