सरकार नहीं बता सकी किस आधार पर लगाई पेनाल्टी

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 07:00 AM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सरकार हाई कोर्ट में नहीं बता सकी कि आरटीओ किस आधार पर अलग-अलग तरह की पेनाल्टी वसूल रहा है। इस संबंध में शासन को शुक्रवार को हाई कोर्ट में जवाब देना था लेकिन सरकारी वकील ने इसके लिए समय ले लिया। कोर्ट ने आरटीओ द्वारा वसूली जा रही अलग-अलग तरह की पेनाल्टी पर रोक जारी रखते हुए सुनवाई जनवरी के पहले सप्ताह तक आगे बढ़ा दी।

इंदौर आरटीओ को पांच जनवरी 2017 को मिले नोटिफिकेशन के बाद यहां वाहन चालकों से पेनाल्टी के रूप में अतिरिक्त राशि वसूली जा रही थी। यह राशि लायसेंस के लिए 300 के स्थान पर 1000 रुपये, नाम ट्रांसफर के लिए 300 रुपये साल के बजाय 300 रुपये प्रतिमाह जबकि व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस के लिए 200 रुपये साल के बजाय 50 रुपये प्रतिदिन तक बढ़ा दिया गया था। इसका विरोध करते हुए इंदौर टेम्पो एसोसिएशन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरटीओ द्वारा पेनाल्टी के रूप में की जा रही वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

10 लाख रुपये दिलवाएं मुआवजा

2017 में रानीपुरा क्षेत्र में पटाखे के अवैध गोदाम में हुए विस्फोट में मारे गए आठ लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका में शुक्रवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क रखा गया कि शासन जवाब में स्वीकार कर चुका है कि मामले में लापरवाही हुई थी। बावजूद इसके किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। शासन ने मृतकों की जान की कीमत सिर्फ दो लाख रुपये लगाई है। मृतकों के स्वजन को कम से कम 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिलवाया जाए। कोर्ट अब मामले में छह दिसंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में अंतिम बहस सुनेगी। इसके बाद तय होगा कि मुआवजे की रकम बढ़ेगी या नहीं।

उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2017 में रानीपुरा क्षेत्र में पटाखे के अवैध गोदाम में आग गई थी। हादसे में आठ लोगों की मौत हुई थी।

Posted By: gajendra.nagar