इंदौर में पान के पत्तों से लगाई हल्दी-महेंदी, गूंजे मंगलाष्टक

Updated: | Wed, 08 Dec 2021 09:23 PM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। विवाह पंचमी पर बुधवार को 282 साल पुराने होलकरकालीन जानकीनाथ मंदिर गोराकुंड पर भगवान राम-सीता के विवाह का उल्लास छाया हुआ था।फूलों से सजे मंदिर में मंगलाष्टक की मंगल ध्वनि गूंज रही थी। दो पंडितों विवाह की रस्म विधि-विधान से संपन्ना करवा रहे थे। भगवान के विवाह के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु का हुजूम मंदिर में जुटा हुआ था। विवाह से पहले हल्दी और महेंदी की रस्म भी निभाई गई। साथ ही बधाई गीत भी गाए गए।

करीब तीन घंटे चले विवाहोत्सव से पहले सुबह भगवान का आकर्षक श्र्ाृंगार दुल्हा-दुल्हन की तरह किया गया था। दिनभर माता सीता और भगवान राम के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी हुई थी।विवाह के आयोजन की शुरुआत शहनाई की मंगल ध्वनि के साथ शाम 5 बजे हुई। इसके बाद भगवान को पान के पत्तों से हल्दी और मेहंदी लगाई गई।इस दौरान महिला मंडल की महिलाओं ने भजनों की प्रस्तुति दी। माहेश्वरी पंचायती ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश बाहेती ने बताया कि यहां पर भगवान की 1739 में स्थापित राम-सीता की अष्टधातु की मूर्तियां है।इनका पूजन कर विवाह की रस्म निभाई गई।इस अवसर पर राम-सीता का दुल्हा-दुल्हन की तरह श्र्ाृंगार किया गया। इस अवसर पर नंदू शर्मा दंपत्ति,ट्रस्टी मुरली नवाल, शांतिलाल गट्टानी आदि मौजूद थे।

संस्कारित जीवन के लिए श्रेष्ठ विचार की शक्ति जरूरी

कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा था, ज्ञान सभी दृष्टि से श्रेष्ठ होता है और सभी रहस्यों का समाधान भी करता है। गीता का ज्ञान सुनने वालों को शुद्ध बना देता है। यह ज्ञान स्पष्ट, सुनने योग्य, धर्म के अनुसार जीवन में उपयोगी और जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव डालने वाला है। हमारे जीवन का प्रत्येक मार्ग हमारे विश्वास पर निर्भर करता है इसलिए हम जो भी विश्वास अपने मन में रखते हैं, उनके प्रति हमें जागरूक होना होगा। संस्कारित जीवन के लिए श्रेष्ठ विचार शक्ति भी अत्यंत आवश्यक है। यह बात स्वामी मुकुंदानंद ने गीता से जीवन उपयोगी सीख विषय पर जाल सभागृह में आयोजित व्याख्यान में कही। वे द इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आफ इंडिया इंदौर शाखा, राधाकृष्ण सत्संग समिति एवं गीता भवन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अनेक बार ऐसा होता है कि हम अपनी इच्छा शक्ति और आत्म संयम पर नियंत्रण खो देते हैं। हम दो सप्ताह के लिए अपने खान-पान पर नियंत्रण का विचार करते हैं, लेकिन अचानक अपने आप पर नियंत्रण खोकर ठूंस-ठूंसकर खाने लगते हैं। इसी तरह कुछ दिन सोशल मीडिया से दूर रहने का प्रण लेते हैं, लेकिन थोड़े ही दिनों में इंटरनेट पर बिना मतलब घंटों अपना समय बर्बाद करते हैं। 9 दिसंबर को शाम 6 से 8 बजे तक व्याख्यान होगा।

Posted By: gajendra.nagar