IPL 2021: कभी वेंकटेश अय्यर को मप्र के रणजी ट्राफी के संभावितों में भी नहीं मिली थी जगह, अब आइपीएल के हीरो

Updated: | Sat, 25 Sep 2021 07:24 AM (IST)

कपीश दुबे, इंदौर IPL 2021। इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की भीड़ के बीच वेंकटेश अय्यर का नाम इन दिनों चर्चा में है। कोलकाता नाइटराइडर्स (केकेआर) को लीग के दूसरे चरण के दोनों मैचों में वेंकटेश ने जीत दिलाई। आज आइपीएल में छाए हुए इंदौर के वेंकटेश को कभी मप्र रणजी टीम के संभावितों में भी जगह नहीं मिल सकी थी। मगर जब मौका मिला तो वे टीम की जरूरत बन गए।

आइपीएल के पहले चरण में केकेआर की टीम का प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक नहीं था। टीम में कप्तान इयोन मार्गन, दिनेश कार्तिक, आंद्रे रसेल जैसे दिग्गजों के बीच वेंकटेश ने अपनी पहचान बनाई। पहले मैच में वे टीम को जीत दिलाकर नाबाद लौटे और फिर मुंबई केखिलाफ ताबड़तोड़ अर्धशतकीय पारी खेलकर जीत की नींव रखी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) के पूर्व सचिव संजय जगदाले बताते हैं, 'मैं वेंकटेश को 12 साल की उम्र से देख रहा हूं। उसके करियर में स्वर्गीय कंवलजीत सिंह खनूजा का सबसे ज्यादा योगदान है। वह बचपन में खनूजा क्लब से खेला करता था। अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उसे इंदौर संभाग की टीम में नहीं लेते थे तो वे दुखी होकर मेरे पास आते थे। मैं उन्हें धैर्य रखने को कहता था। करीब दो साल पहले की बात है।

अंडर-23 मैचों में उसका प्रदर्शन अच्छा था। बीमार होने से वह अस्पताल में था और तभी मप्र के संभावितों का चयन हुआ। इसमें उसका नाम नहीं था। मैं मप्र का क्रिकेट निदेशक था। मैंने टीम के कप्तान देवेंद्र बुंदेला और चयन समिति प्रमुख कीर्ति पटेल से कहा कि वेंकटेश को मौका दिए बिना खारिज करना ठीक नहीं। उसे कम से कम एक-दो ट्रायल्स मैच खिलाएं। जब वेंकटेश को मैच खिलाए गए तो वह टीम में आ गया और इसके बाद से मप्र के लिए लगातार खेल रहा है।

मप्र अकादमी के कोच रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर अमय खुरासिया ने बताया कि वह अकादमी में नियमित अभ्यास के लिए आता रहा है। यहां उसकी बल्लेबाजी में सुधार किया गया। खासकर उसकी गेंदबाजी में तकनीकी सुधार किया गया। वेंकटेश ने अपने खेल पर अब उसे उसकी मेहनत का फल मिल रहा है। वह आत्मविश्वास से भरा है।

खेल और पढ़ाई दोनों में अव्वल

वेंकटेश की मां उषा अय्यर शहर के एक अस्पताल में हेड नर्स हैं। वे बताती हैं, 'हम ब्राह्मण परिवार से हैं। हमारे यहां सोचते हैं कि पढ़ाई करो और अच्छी नौकरी करो। मैंने अपने पति (राजशेखरन अय्यर) से कहा कि हम कुछ अलग करेंगे। वेंकटेश को क्रिकेट का इतना शौक था कि एक बार आस्ट्रेलिया के खिलाफ सौरव गांगुली जल्दी आउट हो गया था तो इसे बुखार आ गया। जब गांगुली या सचिन का शतक होता तो घर में खीर बनती। उसने शहर के आइएमएस से एमबीए में टाप किया है। आइपीएल के दूसरे सत्र के दौरान मुझे यकीन था कि उसे मौका जरूर मिलेगा। मेरी सेहत ठीक नहीं है, इसलिए उसकी सफलता के लिए उपवास तो नहीं रखती, लेकिन भगवान से प्रार्थना करती हूं कि मेरे बेटे के लिए अच्छा करें।

बल्लेबाज, गेंदबाज और विकेटकीपर भी

वेंकटेश को बल्ला पकड़ना सिखाने वाले खनूजा क्लब के कोच शेख सादिक बताते हैं, '10-11 साल की उम्र में हमारे क्लब आया था। 19 साल की उम्र तक यहीं खेला। कम ही लोगों को पता है कि वह बहुत अच्छा विकेटकीपर भी है। बहुत से मैच बतौर विकेटकीपर खेला। कम उम्र में ही वह ए-ग्रेड टीम में खेलता था। एक मैच में गेंदबाज कम थे, तो उसने गेंदबाजी करने की इच्छा जताई। यहां से वह नियमित मध्यमतेज गेंदबाजी करने लगा।" खनूजा क्लब के बाद वेंकटेश महाराजा यशवंत राव क्रिकेट क्लब (एमवायसीसी) से खेलना लगा, जहां कोच दिनेश शर्मा ने उसके खेल में सुधार बहुत सुधार किया।

Posted By: Sameer Deshpande