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सरकारी दरबारी : काहे का महिला दिवस, छह महीने से वेतन नहीं

Updated: | Mon, 08 Mar 2021 02:35 PM (IST)

जितेंद्र यादव

आज महिला दिवस है। महिलाओं के सम्मान में समर्पित आयोजनों का एक दिन। पर अफसोस की बात है कि महिलाओं के लिए ही काम करने वाला महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी ही कुछ महिला कर्मचारियों को छह महीने से वेतन नहीं दे पाया है। शर्मनाक बात यह है कि यह सब विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की वजह से हुआ है। दरअसल, विभाग की शहरी परियोजना-1 बाल निकेतन को सरकार से अनुदान मिलता है। इस परियोजना के अमले ने शासन की योजनाओं का लक्ष्य फरवरी में ही पूरा कर दिया, पर दुर्भाग्य की बात है कि यहां की महिला कर्मचारियों को अक्टूबर से वेतन नहीं मिला है। विभागीय योजनाओं के लक्ष्य की पूर्ति के लिए निचले अमले के पीछे पड़े रहने वाले अधिकारियों ने यह देखने की जहमत भी नहीं उठाई कि इन कर्मचारियों का घर कैसे चल रहा होगा। अब जाकर बिल और फाइल भोपाल भेजी है। यानी 8 मार्च को महिला दिवस पर भी वेतन मिल पाना मुश्किल है। धन्य है ऐसा विभाग।

कोरोना के कारण नहीं भर पाया खनिज का गड्ढा

सरकार को राजस्व कमाकर देने वाले कुछ शासकीय विभागों को भी कोरोना ने अपने प्रभाव से संक्रमित कर दिया है। ऐसे में खनिज विभाग तो बहुत आफत में आ गया। वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना मार्च चल रहा है और राजस्व का लक्ष्य कहां से पूरा करे, यही समझ में नहीं आ रहा है। पिछले साल इंदौर जिले ने 14 करोड़ का राजस्व कमाकर सरकार को दिया था, लेकिन इस बार इतने के भी लाले पड़ रहे हैं। ऊपर से शासन ने 18 करोड़ का लक्ष्य दे रखा है। लिहाजा विभाग के स्थानीय अफसर बोझ से खुद को दबा हुआ महसूस कर रहे हैं। अब अधिकारी शासन से अनुरोध करने जा रहे हैं कि हमारा लक्ष्य घटा दिया जाए। खूब कोशिश करने के बाद भी वे रायल्टी और जुर्माने की राशि वसूल नहीं पा रहे। अवैध खनन करने वालों पर प्रशासन ने इस बार जुर्माना भी जमकर लगाया, लेकिन कुछ आरोपित कोर्ट चले गए। ऐसे में वसूली रुक गई।

शासन का योग, प्रशासन का संयोग

सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं की जमीन पर भूमाफिया का कब्जा हो या अवैध कालोनियों में भूखंड को लेकर परेशान होते पीड़ित लोग, इस समय ज्यादा हल्ला इंदौर के पांच नंबर विधानसभा क्षेत्र में ही हो रहा है। यहां के भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया उर्फ बाबा पीड़ित लोगों के लिए लंबे समय से आवाज बुलंद कर रहे हैं, लेकिन शासन का ध्यान अब गया है। अयोध्यापुरी और पुष्प विहार में सदस्यों को उनके भूखंड मिलते देख विधानसभा पांच में भूमाफिया से पीड़ित अन्य लोगों ने भी बाबा का दामन थाम लिया है। बाबा भी पीड़ितों के राबिन हुड बने हुए हैं। सभी समस्याओं को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के सामने रखकर समाधान निकलवा रहे हैं। मुख्यमंत्री की मंशा भांपकर प्रशासन भी एक सीध में काम कर रहा है। सब योग-संयोग की बात है, वरना पीड़ित तो कबसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, सुनवाई कहीं नहीं थी।

दो पाटन के बीच में सहकारिता

सहकारिता विभाग के स्थानीय अधिकारी और कर्मचारी इन दिनों दो पाटों के बीच पिस रहे हैं। एक पाट जिला प्रशासन का है तो दूसरा विभाग के आला अफसरों का। एक पाट इंदौर में बारीक पिस रहा है तो दूसरी चक्की का पाट राजधानी भोपाल से पिसाई कर रहा है। इंदौर में कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं में जमे भूमाफिया के खिलाफ चलाए गए अभियान में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की खूब परेड हो रही है। कर्मचारी महसूस करने लगे हैं कि वे अपने विभाग से ज्यादा जिला प्रशासन के कर्मचारी हैं। बहरहाल विभाग के आला अधिकारी और मंत्री भी इस अभियान में योगदान को उत्सुक हैं। शायद इसीलिए विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जिले की सभी गृह निर्माण संस्थाओं की कुंडली मांगी है। स्थानीय अधिकारी-कर्मचारी तीन दिन से इसमें जुटे हैं। बताया जाता है, पहले पीएस समीक्षा करेंगे, फिर मंत्री अरविंदसिंह भदौरिया।

Posted By: Sameer Deshpande
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