लाभ जब लोभ में बदलता है, तब मनुष्य का नैतिक पतन होने लगता है - दीदी मां

Updated: | Fri, 03 Dec 2021 10:39 AM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । धन कमाना बुरी बात नहीं है, लेकिन धन का संग्रह करने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है। संसार का सबसे बड़ा दुख दरिद्रता है। लाभ जब लोभ में बदल जाता है, तब मनुष्य का नैतिक पतन होने लगता है। लाभ की प्रशंसा होती है और लोभ की निंदा। जब लोभ हमारे अंतःकरण में आ जाता है तब सोने के पहाड़ का न्यौता व्यक्ति स्वीकार कर लेता है।

अर्थ के बिना जीवन नहीं चलता, लेकिन जब वह अर्थ अनर्थ बनने लगता है तब मनुष्य अपने लक्ष्य से भटक जाता है। धन की लक्ष्मी देवी भी है और सरस्वती भी। जिस तरह हम दीपावली पर लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उसी तरह बसंत पंचमी पर सरस्वती की पूजा भी करना चाहिए। हनुमानजी ने लोभ का नहीं, रामजी की सेवा के लिए लाभ का मार्ग चुना। इसीलिए वे बिना विश्राम किए सीता मैया के पास अशोक वाटिका तक पहुंच सके। हमें भी अपने जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हनुमानजी से सीख लेनी चाहिए।

यह बात राम कथाकार दीदी मां मंदाकिनी श्रीराम किंकर ने संगम नगर स्थित राम मंदिर परिसर में कही। वे रामकथा ज्ञान यज्ञ में संबोधित कर रहे थे। सुंदरकांड पर केन्द्रित प्रवचनों का यह क्रम पांच दिसंबर तक प्रतिदिन शाम 4 से 6.30 बजे तक जारी रहेगा। संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, गीता भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपालदास मित्तल, सुभाष बजरंग, गजराजसिंह चौहान, गोविंद पंवार, अनूप जोशी, अरविंद गुप्ता, भूपेन्द्र कौशिक आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। सुबह संगम नगर बी सेक्टर स्थित चंदा विला पर सुंदरकांड का पाठ भी।। इस अवसर पर दीदी मां का स्वागत भी किया और राम दरबार की आरती में भी भाग लिया।

Posted By: Sameer Deshpande