आचार्य विद्यासागर महाराज ने कहा- आरोग्य को सुधारो तो वैराग्य मिल जाएगा

Updated: | Sun, 17 Oct 2021 04:05 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इस कॉल में बहुत से रोगों का विस्तार हो रहा है और कुछ रोग हमारे देश में सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इस रोग को मधुमेह, शुगर - डायबिटीज की बीमारी कहते हैं । अनेक चिकित्सकों ने मुझे बताया है कि इस रोग का पूर्ण निदान तो नहीं है, किंतु चिकित्सा पूरे समय की जानी चाहिए। जापान के कई वैज्ञानिकों ने इस बीमारी पर शोध करके बताया है कि उपवास से इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

आचार्य समद्रभक्त स्वामी द्वारा लिखित श्रावकाचार ग्रंथ में भी उपवास का महत्व बताया गया है, अभ्यास के तौर पर सप्तमी के दिन और नवमी के दिन एक आसन यानी एक समय भोजन किया जा सकता है, अष्टमी के दिन उपवास रखना चाहिए, उस दिन केवल पानी पिया जा सकता है। यह तीन दिन एक साथ मिलकर के स्वास्थ्य के लिए हितकर होते हैं। यह हमारे ग्रंथों में भी लिखा है और वैज्ञानिक शोधों से भी साबित हो रहा है अब यह आप पर है कि आपको किस पर विश्वास, वही पालन करें।

हमारे आचार्यो ने तो पहले ही यह शोध लिख चुके है। आज आप लोग सिर्फ पैसा कमाने के लिए व्यवसाय में लगे रहते है। अपने आप को निरोग बनाने के प्रति सचेत रहना चाहिए, यह सोचने वाली बात है कि भारत में ऐसा क्यों हो रहा है हमने सैकड़ों वर्षो तक नियमों का पालन किया है और निरोगी भारत रहा है। आज जिन दवाइयों का सेवन कर रहे हैं उनके साइड इफेक्ट भी हो रहे हैं, यदि आप निरोगी रहना चाहते हैं तो सप्तमी और नवमी को एक आसन करें और अष्टमी का उपवास लेकिन किसी भी दिन ज्यादा भोजन ना करें।

आप शास्त्र- ग्रंथों पर विश्वास रखें। हमारे यहां चारित्र संहिता में लिखा है की जल उपवास किया जाना चाहिए, जल आहार में नहीं आता नहीं ना ही जल पेय पदार्थ में आता है क्योंकि पेय पदार्थ है दूध, रस, मठा आदि पेय पदार्थ में आते हैं , जल तो जो कुछ खाया पिया है उसे पचाने में अपना योगदान देता है, इसलिए भारतीय पुरातत्व ग्रंथों में आचार्यो ने जो लिखा है उसका पालन किया जाए तो बहुत से रोगों से बचा जा सकता है।

अपने आरोग्य को सुधारो तो वैराग्य भी मिल जाएगा।

Posted By: Ravindra Suhane