जबलपुर में कोरोना व डेंगू के बाद टायफाइड का मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में

Updated: | Mon, 06 Dec 2021 11:19 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना व डेंगू के बाद ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) ने टायफाइड के मरीज पर अटैक कर दिया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कर मरीज का उपचार किया जा रहा है। मरीज विगत माह टायफाइड की चपेट में आ गया था। उसने जान पहचान के एक छद्म चिकित्सक से उपचार कराया था।

उपचार के दौरान उसे अधिक मात्रा में स्टेरायड वाली दवाएं खिलाई गईं। स्टेरायड के सेवन से मरीज को टायफाइड से राहत मिल गई परंतु वह ब्लैक फंगस की चपेट में आ गया। मरीज की हालत पर मेडिकल के चिकित्सक स्टेरायड के बेजा इस्तेमाल को लेकर चिंतित हो गए हैं। मेडिकल कालेज अस्पताल में यह पहला मामला है जब टायफाइड के मरीज को ब्लैक फंगस ने घेरा है। इससे पूर्व डेंगू के चार मरीज ब्लैक फंगस से संक्रमित हो गए थे। खास बात यह है कि ब्लैक फंगस की चपेट में आए टायफाइड व डेंगू के उक्त मरीजों को कोरोना नहीं हुआ था। टायफाइड व डेंगू के उपचार के दौरान स्टेरायड वाली दवाएं ब्लैक फंगस की वजह बनी।

नागपुर में मस्तिष्क का आपरेशन: मेडिकल में ब्लैक फंगस के छह मरीज उपचाररत हैं। मरीजों में नागपुर से आई महिला शामिल है। महिला के मस्तिष्क तक ब्लैक फंगस का संक्रमण फैल गया था। नागपुर में मस्तिष्क का आपरेशन कराने के बाद महिला जबलपुर पहुंची। मस्तिष्क के आपरेशन के बाद नाक में ब्लैक फंगस का पता चला। जिसका आपरेशन कराने के लिए स्वजन उसे नागपुर से जबलपुर ले आए। वहीं ब्लैक फंगस से घिरे टायफाइड के मरीज की नाक व जबड़े का आपरेशन करने की तैयारी की जा रही है।

फैक्ट्री कर्मी को डेंगू के बाद ब्लैक फंगस: आर्डनेंस फैक्ट्री कटनी के एक कर्मचारी को डेंगू के बाद ब्लैक फंगस का खतरा सामने आया। हालात यह बने कि उसकी आंखों तक बीमारी का संक्रमण जा पहुंचा। फंगस के कारण एक आंख की रोशनी लगभग क्षीण हो चुकी थी। मेडिकल में भर्ती कर नेजल एंडोस्कोपी से आंख का अापरेशन किया गया। जिसके बाद धीरे-धीरे आंख की रोशनी लौटने की उम्मीद चिकित्सकों ने जताई है। फैक्ट्री कर्मी ब्लैक फंगस वार्ड में उपचाररत है।

सिर दर्द से पता चला ब्लैक फंगस का: मेडिकल कालेज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती रहे एक मरीज को ब्लैक फंगस वार्ड में स्थानांतरित किया गया है। 25 वर्षीय मरीज को सिरदर्द के उपचार के लिए स्वजन ने भर्ती कराया था। चिकित्सीय परीक्षण व जांचों से सिरदर्द के स्पष्ट कारण सामने नहीं आए। मरीज को पहले कोरोना का संक्रमण हो चुका है। जिसके बाद ब्लैक फंगस की आशंका पर चिकित्सकों ने उसे रेफर कर दिया। नेजल एंडोस्कोपी से ब्लैक फंगस के आपरेशन की तैयारी है।

फैक्ट फाइल-

-नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल में ब्लैक फंगस के उपचार के लिए करीब 15 सौ मरीज पहुंचे।

-सभी मरीजों की एंडोस्कोपी की गई। एंडोस्कोपी जांच से जिन मरीजों में ब्लैक फंगस का पता चला उनका आपरेशन किया गया।

-ब्लैक फंगस वार्ड में भर्ती कर 260 से ज्यादा मरीजों का उपचार किया गया। इनमें से 205 मरीजों के आपरेशन हुए।

-डेंगू के चार व टायफाइड का एक मरीज ब्लैक फंगस से ग्रस्त मिला। पूर्व में ये मरीज कोरोना संक्रमण से बचे रहे।

-मेडिकल में ब्लैक फंगस के 40 मरीजों की मौत हुई। ज्यादातर मरीज संक्रमण की गंभीर स्थिति में मेडिकल लाए गए थे।

-डेंगू मरीजों के खून में प्लेटलेट्स की कमी के कारण एंडोस्कोपी व आपरेशन के लिए चिकित्सकों को इंतजार करना पड़ा।

-ब्लैक फंगस से जान गंवाने वाले अधिकांश मरीजों के फेफड़े तक संक्रमण फैल गया था।

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ब्लैक फंगस के छह मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। 260 से ज्यादा ब्लैक फंगस के मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना के बाद डेंगू और अब टायफाइड से ब्लैक फंगस का मरीज सामने आया है। बीमारी के उपचार में स्टेरायड का ज्यादा इस्तेमाल ब्लैक फंगस की वजह बन रहा है।

डॉ. कविता सचदेवा, विभागाध्यक्ष ईएनटी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल

Posted By: Ravindra Suhane