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Jabalpur News : इलाहाबाद बैंक की कारगुजारी, एक ही प्लाट को दोबारा बेचने दूसरी बार की नीलामी

Updated: | Sun, 28 Feb 2021 05:57 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि इलाहाबाद अब (इंडियन बैंक) ग्राहकों के साथ धोखेबाजी पर उतर आया है। बैंक की कारगुजारी का ताजा मामला इलाहाबाद बैंक की शास्त्री मार्ग शाखा में सामने आया है। यहां बैंक प्रबंधक और मैनेजर ने एक प्लाट की न सिर्फ नीलामी की बल्कि हितग्राही से पूरी रकम भी जमा करा ली। लेकिन हितग्राही को प्लाट का विक्रय पत्र देने के बजाय उसी प्लाट को दोबारा नीलाम कर दिया।

मामला जब जिला उपभोक्ता फोरम पहुंचा तो बैंक के मैनेजर के साथ ही बैंक प्रबंधक भी सवालों के घेरे में आ गए। उपभोक्ता फोरम ने प्लाट की नीलामी पर रोक लगा दी। कानून विद्दो की माने तो इलाहाबाद बैंक के दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई किए जाने का प्रविधान है। दोषी बैंक मैनेजर और बैंक प्रबंधक के खिलाफ कानूनी दृष्टि से अपराध दर्ज होना चाहिए।

बैंक में गिरवी था प्लाट: जिला उपभोक्ता फोरम में दायर याचिका के मुताबिक नव निवेश कॉलोनी गंगानगर गढ़ा स्थित एक प्लाट दिनेश साहनी ने खाता खराब होने पर बैंक में गिरवी रखा था। बैंक ने प्लाट को नीलाम करने के लिए नीलामी निकाली। गुप्तेश्वर निवासी अनिल ठाकुर ने 26 मार्च 2018 को नीलामी के दौरान उक्त प्लाट पांच लाख 72 हजार रुपये में खरीद लिया। लेकिन प्लाट का विक्रय पत्र दिए बगैर बैंक ने हितग्राही से पूरे पैसे जमा करवा कर प्लाट की दोबारी नीलामी कर दी। मामला जिला उपभोक्ता फोरम पहुंचा तो फोरम ने सिर्फ प्लाट की नीलामी नहीं बल्कि उसके विक्रय पर भी रोक लगा दी।

बैंक ने लगवाए चक्कर : अनिल द्वारा उपभोक्ता फोरम में दायर याचिका में कहा किया गया कि बैंक मैनेजर ने प्लाट का विक्रय पत्र देने के एवज में पहले 25 फीसद राशि जमा कराई और बाकी राशि फायनेंस करने कहा। बैंक शेष राशि फायनेंस करने के लिए हितग्राही से चक्कर लगवाता रहा। हितग्राही ने अपनी पाई-पाई जोड़कर किसी तरह चार लाख 29 हजार रुपये जमा कर दिए।

नियम विरुद्ध तरीके से एनपीए में स्थानातंरित की राशि : याचिका में अधिवक्ता अरुण जैन और विक्रम जैन ने तर्क देते हुए कहा कि बैंक मैनेजर ने हितग्राही के साथ धोखाधड़ी करते हुए हितग्राही से राशि जमा करा ली और कोरे बाउचर पर दस्तखत करवाकर उक्त राशि प्लाट मालिक के लोन खाते या यूं कहे नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) में नियम विरुद्ध तरीके से जमा कर दी। एनपीए वह खाता होता है जिसमें फंसा हुआ कर्ज होता है। मसलन बैंक ऐसी राशि वसूल नहीं पाता।

दोबारा प्लाट बेचने की नीलामी : उक्त राशि एनपीए में जमा कराने के बाद बैंक ने दोबारा प्लाट की नीलामी निकाल दी। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष केके त्रिपाठी, न्यायिक सदस्य योमेश अग्रवाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए इलाबाद बैंक द्वारा दोबारा की गई प्लाट की नीलामी और विक्रय पर तत्काल रोक लगा दी।

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यह कहते हैं कानूनविद् :

प्लाट का दोबारा आक्शन तभी किया जाता है जब लेने वाला डिफाल्टर हो। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। हितग्राही से राशि जमा कराने के बाद विक्रय पत्र न दिया जाना कानून अपराध है। संबंधित दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रविधान भी है।

अमित सिंह, अधिवक्ता हाई कोर्ट

Posted By: Sunil Dahiya
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