Court News : किसी का जीवन छीनना जघन्य अपराध, उम्रकैद से कम सजा संभव नहीं

Updated: | Thu, 16 Sep 2021 03:55 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अदालत ने तल्ख टिप्पणी में कहा कि किसी का जीवन छीनना जघन्य अपराध है। ऐसे मामले में किसी तरह की नरमी की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। उम्रकैद से कम सजा संभव नहीं है। विशेष न्यायाधीश सुनील कुमार जैन की अदालत ने इस मत के साथ हत्या के आरोप में माढ़ोताल निवासी चार आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। न्यायालय ने आरोपितों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।मौके पर हो गई थी मौत : अभियोजन के मुताबिक माढ़ोताल थाना क्षेत्र निवासी सोनेलाल चौधरी ने पम्मू उर्फ प्रमोद यादव से दो हजार रुपये का कर्ज लिया था। पम्मू उर्फ प्रमोद यादव उससे 12 हजार रुपये की मांग कर रहा था। नौ दिसंबर 2014 को रात 11 बजे पम्मू उर्फ प्रमोद यादव, गोपू उर्फ रामगोपाल यादव, कालू उर्फ राजेश यादव और रक्कू उर्फ राकेश ठाकुर उसके घर पहुंचे। उन्होंने सोनेलाल चौधरी को घर से निकालकर उस पर फरसा और लोहे की छड़ से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल सोनेलाल की मौके पर ही मौत हो गई। विशेष लोक अभियोजक कृष्ष्णा प्रजापति के तर्क सुनने के बाद न्यायालय ने चारों आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

जमानत अर्जी खारिज : अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश जीसी मिश्रा की अदालत ने अधिवक्ता के कार्यालय में तोड़फोड़ के आरोपित जबलपुर निवासी रक्कू उर्फ राकेश पटेल की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कुक्कू दत्त ने जमानत अर्जी का विरोध किया। आपत्तिकर्ता अधिवक्ता आलोक जैन की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार साहू, अभिषेक पटेल, आशीष यादव ने जमानत न दिए जाने पर बल दिया। कोर्ट को अवगत कराया गया कि आरोपित ने शराब पीने के लिए रुपयों की मांग की थी। उसकी मांग पूरी न किए जाने पर वह बौखला गया। इसी बौखलाहट में वह लाठी लेकर आया और अधिवक्ता के कार्यालय में तोड़फोड़ मचा दी। यह देखते ही अधिवक्ता आलोक जैन व उनके स्टाफ ने किसी तरह जान बचाई। सभी गोरखपुर थाने पहुंचे और आरोपित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने धारा-427, 452, 327, 294, 323 व 506 के तहत अपराध कायम कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। उसे अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इस तरह के खतरनाक आरोपित को जमानत पर रिहा किए जाने से समाज में गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने तर्क से सहमत होकर जमानत अर्जी खारिज कर दी।

Posted By: Brajesh Shukla