Dengue in Jabalpur: डेंगू के दिन तो रात में काटते हैं मलेरिया फैलाने वाले मच्छर, पढ़िए पूरी खबर

Updated: | Sat, 25 Sep 2021 01:30 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। घरों में जहां-तहां पल रहे मच्छरों के लार्वा के विनष्टीकरण में नागरिकों की लापरवाही सेहत पर भारी पड़ने लगी है। घरों में रखे कूलर, पानी की टंकियां, कंटेनर, गमले, टूटे बर्तन, वाहनों के खराब पड़े टायर, पक्षियों के सकोरे में मच्छरों के लार्वा बिलबिला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम घरों में पहुंचती है तो नागरिकों की लापरवाही सामने आ जाती है। स्वास्थ्य अमला रोजाना 60-80 घरों में मच्छरों के लार्वा का विनष्टीकरण कर रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि नागरिक अपने घर व कार्यस्थल पर मच्छरों के लार्वा को न पनपने दें तो डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया को हराया जा सकता है। घरों में पल रहे लार्वा से बनने वाले मच्छर डंक मारकर डेंगू व मलेरिया फैला रहे हैं। फिर 67 घरों में मच्छरों के लार्वा मिले वहीं डेंंगू के 12 नए मरीज सामने आए। जिसके बाद डेंगू मरीजों की संख्या 600 के आंकड़े के करीब पहुंच गई। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा डेंगू नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियान की रोजाना समीक्षा कर रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. रत्नेश कुरारिया ने निर्देश दिया है कि घरों तक पहुंचने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी लोगों को जागरुक करने का प्रयास करें ताकि घरों के भीतर मच्छरों के लार्वा न पनपने पाएं।

13 सौ घरों में पहुंचा अमला: जिला मलेरिया अधिकारी डा. राकेश पहारिया ने बताया कि शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में एक हजार 292 घरों में सर्वे किया। घरों में 6 हजार 300 कंटेनर मिले जिनकी जांच की गई। 67 घरों में रखे 100 कंटेनरों में मच्छरों के लार्वा पाए गए। जिन घरों में मच्छरों के लार्वा मिले वहां सदस्यों की जांच की गई तो 744 लोग बुखार की चपेट में मिले। बुखार से पीडि़त मरीजों के रक्त की जांच की गई। जिनमें मलेरिया का आंकड़ा शून्य रहा तथा डेंगू के नए मरीज सामने आए। जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय के प्रवीण तिवारी, नवीन यादव, ब्रजेश मिश्रा द्वारा सर्वे टीमों का नेतृत्व किया जा रहा है।

अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर नजर: शहर के विभिन्न शासकीय व निजी अस्पतालों में भर्ती डेंगू के मरीजों की सेहत पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा नजर रखी जा रही है। जिला मलेरिया अधिकारी डा. पहारिया ने बताया कि कलेक्टर शर्मा के निर्देश पर कोविड कमांड सेंटर की तर्ज पर डेंगू कमांड सेंटर कार्य कर रहा है। जहां से डेंगू के मरीजों की सेहत पर नजर रखी जा रही है।

विवरण- मलेरिया, डेंगू, डेंगू हेमरेजिक बुखार और चिकनगुनिया मुख्य रोगवाहक जन्य रोग हैं। ये रोेग मादा एनाफिलीज और एडीज मच्छरों के काटने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचारित होते हैं। मलेरिया, डेंगू एवं चिकनगुनिया से संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ व्यक्ति को यह रोग प्रत्यक्ष रूप से नहीं देता। सामान्यतः एनाफिलीज और एडीज मच्छर किसी संक्रमित रोगी को काटते हैं और फिर वही मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटते हैं तो वे इस रोग को स्वस्थ व्यक्ति में संचारित कर देते हैं।

मलेरिया, डेंगू एवं चिकनगुनिया के लक्षण: मलेरिया: तेज बुखार, कंपकंपी, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, मतली और उल्टी। इसके गंभीर मामलों में रोगी में पीलिया, गुर्दे का काम बंद कर देना और एनीमिया। परिणामस्वरूप मरीज कोमा की स्थिति में चला जाता है।

डेंगू: तेज बुखार, सिर में दर्द, पीठ में दर्द, घुटनों में दर्द, उल्टी व मतली, आंखों में दर्द और त्वचा पर चकत्ते बनना इत्यादि। डेंगू के विषाणु के कारण रक्त वाहिकाएं फूल जाती हैं और इनमें रिसाव होता है। जिसके कारण त्वचा पर बैंगनी रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाएं बाद में इतनी फैल जाती हैं कि वे आवश्यक रक्त के साथ-साथ विभिन्न ऊतकों को पहुंचाने वाली आक्सीजन की आपूर्ति करने में असमर्थ हो जाती हैं। इससे शरीर को सदमा लगता है और शरीर के मुख्य अंग जैसे हृदय एवं गुर्दे को हानि पहुंचती है।

चिकनगुनिया: तेज बुखार, शरीर में दर्द, गठिया के कारण शरीर के सभी मुख्य जोड़ों में दर्द एवं सूजन। कुछ मामलों में त्वचा पर चकत्ते बनना, तेज़ सिर दर्द और आंखों में संक्रमण।

एनाफिलीज व एडीज मच्छर: एनाफिलीज मच्छर मलेरिया का संवाहक होता है। मादा एनाफिलीज मच्छर ज्यादातर रात के समय काटती हैं। ये मच्छर मुख्यतः साफ पानी जैसे तालाब, पोखर, धान के खेत, सीमेंट के टैंक में प्रजनन करते हैं। एडीज प्रजातियां में विशेष प्रकार के छोटे मच्छर होते हैं। जिनके शरीर एवं टांगों पर सफेद एवं काले रंग की धारियां होती हैं।

सामान्यतः इन मच्छरों का जीवन चक्र 7-10 दिन का होता है जो 500 मीटर की दूरी तय कर सकते हैं। मादा मच्छर लगभग 30 दिन तक जीवित रहती है और हर दो दिन के अंतराल में 80 से 180 अंडे देती हैं। मादा एडीज मुख्य रूप से दिन में ही काटती हैं। ये मच्छर चुपचाप हमला करते हैं। एडीज एजिप्टी कूलरों, पानी एकत्रित करने वाले टैंकों, अनुपयोगी बर्तनों, पुराने टायरों, प्लास्टिक के पात्रों, जंग लगी वस्तुओं, फूलदान, मिट्टी के बर्तन, पक्षियों के सराेके, फव्वारों के पौधों एवं नारियल के अवशेष मेें प्रजनन करते हैं।

Posted By: Ravindra Suhane