Diwali market in Jabalpur: चीनी से परहेज, देसी झालरों पर भरोसा

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 02:37 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। ये सोच में बदलाव ही कहेंगे कि दुकानदारों ने चीनी माल से तौबा कर ली है। खासतौर पर दिवाली पर जगमग रोशनी देने वाली झालर से। इस साल झालर तो भरपूर दुकानों में रोशनी फेक रही हैं लेकिन चीनी नहीं बल्कि स्वदेशी। सिर्फ दुकानदारों ने ही नहीं ग्राहकों ने भी देश में बनी झालर को पसंद किया है। यही वजह है कि चीनी झालर से दाम ज्यादा होने के बावजूद ग्राहक स्वदेशी झालर पर अधिक भरोसा जता रहे हैं। महाकोशल अंचल में 25 करोड़ से ज्यादा की रोशनी का कारोबार दीवाली पर हेोता है।

व्यापारी भी मानते हैं कि राष्ट्र हित सर्वोपरि है। लोग विश्व व्यापी कोरोना महामारी के लिए अपरोक्ष रूप से चीन को जिम्मेदार मानते हैं ऐसे में इस संकट से पहले ही व्यापार बाधित हो चुका है ऐसे में चीनी माल उन्हें लेने में अब रूचि नहीं है। इसके अलावा सरकार की तरफ से भी चीनी उत्पाद पर लगने वाली बंदिशों के कारण पर्याप्त मात्रा में माल नहीं पहुंच रहा है। लोग समझ रहे हैं कि स्वदेशी उत्पाद उनके लिए बेहतर है।

रोशन है बाजार: रोशनी को लेकर ग्राहकों में अच्छा रूझान रहता है। नवरात्र से ही घर-मंदिरों को अलग-अलग रंग की रोशनी से सजाने का चलन है। ऐसे में इससे पहले ही दुकानदार अलग-अलग वैरायटी की रोशनी दुकानों में रखते हैं। इसमें झालर,पट्टे वाली झालर,जगमग दिए,स्ट्रिप लाइट की खास मांग होती है। पहले चीनी उत्पादों को ग्राहक पसंद करते थे इसकी वजह ये थी कि स्थानीय स्तर पर इनका निर्माण नहीं होता था। चीनी उत्पादन भरोसेमंद नहीं होने के कारण ग्राहक इसका विकल्प खोज रहे थे।

शहर में होता है निर्माण: जबलपुर में बनी झालर का क्रेज आसपास के जिलों में खूब है। यहां एलईडी लाइट को झालर के रूप में असेंबल किया जाता है। 5 से 8 करोड़ रुपये का माल सालाना जबलपुर में तैयार किया जाता है। इसके अलावा दिल्ली और फिरोजाबाद में भी बड़ी मात्रा में आकर्षक लाइट बनती है। यहां से आसपास के जिलों में थोक खरीददार माल सप्लाई करते हैं। दुकानदार और ग्राहकों का मानना है कि स्वदेशी लाइट खराब होने पर दोबारा सुधारी जा सकती है लेकिन चीनी उत्पाद में ऐसा नहीं होता है उनका सामान कम कीमत का जरूर होता है लेकिन उसकी लाइफ और विश्वसनीयता अधिक नहीं होती है। हर साल रोशनी के लिए खर्च करना होता है जबकि स्वदेशी झालर को कई साल उपयोग किया जा सकता है।

देसी दिए बेचने वालों को न करे परेशान: मिट्टी के बने देशी दिए बेचने वालों को प्रशासन ने प्रोत्साहित किया है। कलेक्टर ने आदेश जारी किया है कि मिट्टी के बने दिए बेचने आने वालों को किसी तरह से परेशान न किया जाए। प्रशासन ने मिट्टी से बने दिए को बढ़ावा देने के लिए ये आदेश दिया है ताकि उनका त्योहार में अच्छा व्यापार हो सके।

------------------------------

बाजार में इस साल पूरी तरह से स्वदेशी झालर ब्रिकी में रखी गई है। दुकान में खरीददार भी अब देशी झालर को पसंद करते हैं। चीनी माल को अब लोग पसंद नहीं करते हैं हमे भी अच्छा लगता है। अब दाम में भी बहुत अंतर नहीं है।

मनीष ताम्रकार, लाइट विक्रेता

.....

चायनीज झालर और रोशनी से जुड़ी सामग्री कम आ रही है। स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर झालर का उत्पाद हो रहा है जो चीनी झालर से बेहतर और टिकाऊ है। लोगों के बीच भी अब चीनी झालर का क्रेज नहीं है।

मुकेश हांडा, व्यापारी

....

भारतीय बाजार में अब स्वदेशी झालर की मांग बनी हुई है। 75 फीसद झालर इस समय स्वदेशी ही है। 25 फीसद पुराने स्टाक का माल ही कुछ दुकानों में दिखाई देगा। नया माल कोई नहीं खरीद रहा है। महाकोशल क्षेत्र में करीब 25 करोड़ रुपये का झालर का कारोबार होता है।

सुबीर जैन, सदस्य, इलेक्टिकल एसोसिएशन

...

दशहरा, दिवाली पर पहले चीनी माल से मार्केट सजा रहता था अब परिस्थिति बदल गई है। दुकानदार चायनीज माल पसंद नहीं कर रहे हैं। ग्राहक के पूछने पर भी दुकानदार खुद देशी और चीनी माल को लेकर विकल्प पूछते हैं। शहर में ही छोटे-बड़े करीब 500 से ज्यादा स्थानों पर झालर का निर्माण होता है।

अखिल मिश्र, संयुक्त सचिव महाकोशल चेम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री

Posted By: Ravindra Suhane