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गलियारा: मानवता के नाम पर खेल, पी गए 12 लाख का तेल

Updated: | Fri, 25 Jun 2021 09:47 AM (IST)

कॉलम : गलियारा : अंजुल मिश्रा

कोरोना संक्रमण काल के दौरान सामाजिक संस्थाओं के साथ लाल हवेली के अधिकारियों ने भी जमकर मानवता दिखाई। पांच रसोई खोलकर जरूरतमंदों को खाना बांटा। दानदाताओं से अपील कर उनसे राशन, सब्जी और तेल मांगा। दान में क्विंटलों से सामग्री आई। इसके बाद भी जरूरत पड़ी तो बाहर से सामान खरीदा गया। एक व्यापारी से साढ़े बारह लाख का तेल ले लिया लेकिन उसकी कहीं कोई लिखा-पढ़ी नहीं हुई। साल भर बीतने के बाद भी व्यापारी अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है लेकिन कोई भुगतान करने तैयार नहीं है। इतना नहीं निगम के कई अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने लाखों की सामग्री उधार में खरीद ली थी। उसका भी भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। एक कर्मचारी ने दमोहनाका तरफ के कार्यालय की मैडम के नाम पत्र भी लिख दिया है कि भुगतान नहीं हुआ तो वह आत्महत्या कर लेगा।

बिल्ली को मिली दूध की पहरेदारी

दूध की पहरेदारी यदि बिल्ली को सौंप दी जाए तो दूध का क्या हश्र होगा, इसका अंदाजा कोई भी लगा सकता है। कुछ ऐसी ही स्थिति लाल हवेली में है। यहां बड़े साहब ने फरमान जारी कर गुटखा खाने वालों पर चार पहरेदार बैठा दिए हैं। परिसर में गुटखा खाकर थूकने वालों पर इन्हें नजर रखनी है। कोई भी गुटखा थूकते मिला तो उससे तत्काल एक हजार रुपये तक जुर्माना वसूलना होगा। मजेदार बात यह है कि जिन लोगों को गुटखा खाने वालों पर नजर रखने की पहरेदारी सौंपी गई है उनमें से ज्यादातर खुद गुटखा खाते हैं। यह बिल्कुल बिल्ली को दूध की पहरेदारी सौंपने वाली बात है। तभी तो फरमान जारी होने के दो दिन बाद तक सिर्फ एक पर सौ रुपये का जुर्माना हो पाया है वह भी बाहरी व्यक्ति रहा जबकि लाल हवेली के 70 फीसद कर्मचारी खुद गुटखा खाते हैं।

अपर आयुक्त को बना दिया शोले का ठाकुर

लाल हवेली में दो अपर आयुक्त हैं। दोनों के पास विभाग बहुत हैं लेकिन वित्तीय अधिकार दोनों में से किसी को नहीं दिया गया। वित्तीय कामों की स्वीकृति के लिए इन्हें बड़े साहब से ही अनुमति लेनी होती है। पिछले साहब के कार्यकाल से यह स्थिति बनी हुई है। उससे पहले तक अपर आयुक्त के पास भी दो से पांच लाख के वित्तीय अधिकार होते थे। उधर हाल में बड़े साहब के एक फरमान ने अपर आयुक्त टीएन कुम्हरे की स्थिति शोले के ठाकुर जैसी बना दी है। दोनों हाथ उनके काट दिए गए हैं और काम सभी करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। हाल ही में बड़े साहब ने इन्हें करोड़ों के चेक साइन करने के अधिकार दे दिए लेकिन उसमें भी मजेदार बात यह है कि अपर आयुक्त चेक भी तभी साइन कर सकेंगे, जब निगमायुक्त की सहमति होगी।

अपना ही आदेश भूले साहब

अधिकारियों के तबादले के बाद निविदा समिति के पद भी खाली हो गए थे। इसको लेकर बड़े साहब ने निविदा समिति का पुनर्गठन कर दिया। पांच सदस्यीय समिति में अपर आयुक्त लोककर्म, अपर आयुक्त वित्त व कार्यपालन यंत्री कमलेश श्रीवास्तव और जीएस मरावी को रखा गया है। एक सदस्य उस विभाग का विभागीय प्रमुख होगा, जिससे संबंधित निविदा होगी, लेकिन निविदा समिति के पुनर्गठन में साहब अपने ही उस आदेश को भूल गए जो उन्होंने 11 जून को जारी किया था। उस आदेश के अनुसार लोककर्म विभाग के कार्यपालन यंत्री के रूप में आरके गुप्ता को प्रभार दिया गया था। नियमानुसार निविदा समिति में उन्हें ही रखा जाना था। बड़े साहब के इस फरमान से बाकी कार्यपालन यंत्री भी अचंभे में हैं कि आखिर लोककर्म विभाग का प्रभार किसे सौंपा गया है जब सभी प्रभारी हैं तो उस आदेश का औचित्य क्या था।

Posted By: Brajesh Shukla
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