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MP High Court News: हाई कोर्ट ने पूछा-रेमडेसिविर आपूर्ति के लिए दिल्ली की तर्ज पर क्यों नही बना सकते व्यवस्था

Updated: | Fri, 07 May 2021 08:21 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि निजी अस्पतालों को रेमडेसिविर की आपूर्ति व वितरण के लिए प्रदेश में दिल्ली की तर्ज पर व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती? मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस अतुल श्रीधरन की युगलपीठ ने केंद्र सरकार से भी पूछा कि मप्र के लिए रेमडेसिविर का कोटा पूर्व निर्देश के तहत 20 फीसदी क्यों नही बढ़ाया जा रहा है? कोर्ट ने 17 मई तक जवाब मांगा है। प्रदेश में कोरोना महामारी के इलाज में अव्यवस्था की शिकायतों पर स्वतः संज्ञान लेकर हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस मामले के साथ इस विषय मे प्रदेश भर से दायर अन्य याचिकाएं व हस्तक्षेप अर्जियों की भी सुनवाई की जा रही है।

कोई भी निजी अस्पताल आक्सीजन से वंचित न हो : कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने कोर्ट को बताया कि 19 अप्रैल के आदेश के बाद अब राज्य में आक्सीजन की कमी नही रह गई। लेकिन इसके वितरण में भेदभाव हो रहा है।आक्सीजन आपूर्ति में सरकारी अस्पतालों को निजी अस्पतालों की तुलना मे प्राथमिकता दी जा रही है। समय पर पर्याप्त आक्सीजन न मिलने से कई मरीजों की दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से मौतें हो रही हैं। इस पर कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा कि वे अगली सुनवाई पर आक्सीजन वितरण व्यवस्था कितनी पर्याप्त है, कोर्ट को यह बताएं।

कंपनियों को सीधे आपूर्ति की दो अनुमति : महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव ने कोर्ट को बताया कि विगत एक मई को राज्य सरकार की ओर से प्रकाशित विज्ञापन के तारतम्य में निजी कंपनियों ने राज्य को सीधे रेमडेसिविर की आपूर्ति में उत्सुकता दिखाई है। लेकिन केंद्र सरकार की बंदिश के चलते वे राज्य को सीधे आपूर्ति नही कर पा रहे हैं। इसके लिए केंद्रीय ड्रग कंट्रोलर जनरल को सरकार की ओर से लिखा गया है। कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार के वकील विक्रम सिंह से कहा कि केंद्र इस पर विचार करे। बताया जाए कि यह अनुमति क्यों नही दी जा रही। कोर्ट ने यह भी बताने को कहा कि 19 अप्रैल के आदेश के अनुसार राज्य को आवंटित रेमडेसिविर का कोटा 20 फीसदी क्यों नही बढ़ाया गया ?

कालाबाजारी रोकने महानगरों में बनाओ टीम : कोर्ट ने कहा कि सभी याचिकाकर्ताओं, हस्तक्षेपकर्ताओं के अधिवक्तागण ने एकस्वर में रेमडेसिविर व जीवनरक्षक दवाओं की जमकर कालाबाजारी की शिकायत की है। इसे देखते हुए कोर्ट ने डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) को निर्देश दिए कि जबलपुर, भोपाल, इंदौर व ग्वालियर सहित अन्य बड़े शहरों में यह कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष टीमें बनाई जाएं। कालाबाजारी करने वालों को सख्ती से तलाश कर उन्हें ही नही बल्कि उसे भी गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाए, जिससे उसने वह दवा या इंजेक्शन प्राप्त किया। निजी अस्पतालों की ओर से अधिक शुल्क वसूली के मामले पर कोर्ट को बताया गया कि 4 मई को इसके लिए जिला स्तरीय समितियां गठित कर दी गई हैं। ऐसी किसी भी शिकायत पर ये समितियां कार्रवाई करेंगी।

Posted By: Sunil Dahiya
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