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MP High Court news हाई कोर्ट ने वित्त सचिव सहित अन्य को भेजा अवमानना नोटिस

Updated: | Mon, 30 Nov 2020 08:03 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि ।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व आदेश की नाफरमानी के रवैये को आड़े हाथों लिया। इसी के साथ वित्त सचिव अनुराग जैन सहित अन्य को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अवमानना याचिकाकर्ता अधारताल, जबलपुर निवासी आरके श्रीवास्तव की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अवमानना याचिकाकर्ता जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में कार्यरत था। उसे नियमानुसार सातवें वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया। कायदे से यह लाभ एक जनवरी, 2016 से दिया जाना था। 2017 में सेवानिवृत्ति हो गई। लिहाजा, सेवानिवृत्ति के बाद भी इंसाफ की लड़ाई जारी रही। हाई कोर्ट ने पूर्व में याचिका का इस निर्देश के साथ निराकरण किया था कि नियमानुसार शिकायत दूर करते हुए अपेक्षित लाभ प्रदान किया जाए। इसके बावजूद निर्धारित समयावधि निकल गई और सातवें वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया। इसीलिए अवमानना याचिका के जरिये नए सिरे से हाई कोर्ट आना पड़ा।

पूर्व आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लिया:

अवमानना याचिका में वित्त सचिव अनुराग जैन के अलावा संयुक्त संचालक अमित विजय पाठक, जेएनकेविवि के कुलपति डॉ.पीके बिसेन, कुलसचिव रेवा सिंह सिंसोदिया, कंट्रोलर डॉ.अजय खरे को पक्षकार बनाया गया है। हाई कोर्ट ने सभी को अवमानना नोटिस जारी किए हैं। इन सभी से पूछा गया है कि पूर्व आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेकर क्यों न अवमानना कार्रवाई की जाए? अवमानना याचिका में उन सभी आवेदनों का हवाला दिया गया है, जिनके जरिये अवमानना याचिकाकर्ता निरंतर हक की आवाज बुलंद करता आया है। अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष जेएनकेविवि को देने के बावजूद अधिकार न मिलना चिंताजनक है।

Posted By: Sunil Dahiya
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