जिम्मेदार खुद स्वच्छ सर्वेक्षण को लगा रहे पलीता, सोलर डस्टबिन के नाम पर जबलपुर में रखवा दिए थे साधारण कूड़ादान

Updated: | Mon, 29 Nov 2021 10:18 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पिछले करीब पांच वर्षों से चल रहे स्वच्छता सर्वेक्षण में जबलपुर आज तक टाप-10 में जगह नहीं बना पाया। जबकि इंदौर पांच वर्षों से पहले पायदान बना हुआ है। क्योंकि शहर के हाल ये है कि जिन जिम्मेदारों के कंधों पर स्वच्छ सर्वेक्षण की जिम्मेदारी है वे खुद ही स्वच्छ सर्वेक्षण को पलीता लगा रहे हैं। जिसके चलते शहर आज तक स्वच्छता के शिखर पर नहीं पहुंच पा रहा।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कचरा संग्रहण के नाम पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने वर्ष 2018 में करीब 25 स्थानों पर सोलर डस्टबिन रखवाए गए। 25 स्थानों पर बाद में रखवाए जाने की योजना थी। एक डस्टबिन की खरीदी करीब दो लाख रुपये में की गई। यानी एक करोड़ रुपये सोलर डस्टबिन के नाम पर खर्च कर दिए गए। दावा किया गया कि इस डस्टबिन में डाला गया गीला, सूखा कचरा सूरज की रोशन से स्वत: प्रोसेस होगा, इसमें मोबाइल चार्जिंग और वाई-फाई की सुविधा भी रहेगी। लेकिन ये डस्टबिन साधारण कूड़ादान निकला। बहरहाल सोलर डस्टबिन के नाम पर किए भ्रष्टाचार का मामला अब कोर्ट तक पहुंच गया है। इसी तरह अन्य डस्टबिन के नाम पर पिछले पांच वर्षों में करीब 10 करोड़ रुपये फूंक दिए गए लेकिन सफाई व्यवस्था में आज तक सुधार नहीं आया।

आज भी मुंह चिढ़ा फर्जी डस्टबिन: डस्टबिन के नाम किए फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद भी इन्हें नहीं हटाया गया है। तैय्यब अली चौक, स्टेशन रोड, नेपियर टाउन, राइट टाउन, होमसाइंस कालेज रोड सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर सोलर बनाम साधारण डस्टबिन अब भी रखे हुए है। जो जिम्मेदारों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। जबकि सोलर डस्टबिन के नाम पर किया गया फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव संजय दुबे ने इन्हें हटाने के निर्देश दिए थे।

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इस तरह किया फर्जीवाड़ा:

- एसएस कम्यूनिकेशन से डस्टबिन की खरीदी की गई, उसके रखरखाव का अनुबंध किया गया। दावा किया गया कि सोलर डस्टबिन में सोलर गीला-सूखा व अन्य तरह के कचरा रखने तीन विंग बने हैं। जो कचरे को स्वत: प्रोसेस करेंगे।

- डस्टबिन भरने के बाद कचरा न फैले इसके लिए सेंसर लगा हुआ है। सेंसर से सूचना मिलने के बाद स्वत: कचरा नीचे दब जाएगा। बदबू न फैले उसके लिए स्प्रे सिस्टम भी है। जो बदबू खत्म कर देगा।

- डस्टबिन में एक चिप लगी है जो नेटवर्किंग का काम करेगी। इससे जीपीएस कनेक्ट रहेगा, ताकि कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तक कचरा प्रोसेस और कचरा भरने की सूचना मिलते ही इसे खाली कराया जा सके। डस्टबिन के दायी तरफ मोबाइल चार्ज करने और वाई-फाई की भी सुविधा होगी।

- दो लाख रुपये एक डस्टबिन में की खरीदी में खर्च किए गए। 50 डस्टबिन की खरीदी के एवज में करीब एक करोड़ रुपये फूंक दिए गए।

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क्या कहते हैं जिम्मेदार

उक्त प्रकरण कोर्ट तक पहुंच गया है। इस पर ज्यादा टिपण्ण्ी नहीं की जा जा सकती। डस्टबिन का उपयोग कचरा संग्रहण के लिए किया जा रहा है।

कमलेश श्रीवास्तव, तत्कालीन प्रोजेक्ट प्रभारी स्मार्ट सिटी

Posted By: Ravindra Suhane