Jabalpur Column Kah Gae Bhaiya : हाथ पकड़ा नहीं, मिलाया था भैया

Updated: | Fri, 22 Oct 2021 11:45 AM (IST)

कालम- कह गए भैया- अतुल शुक्‍ला, जबलपुर नईदुनिया। इन दिनों रेलवे स्टेशन पर एक रेल कर्मचारी के हाथ पकड़ने और हाथ मिलाने को लेकर बहस छिड़ी है। बात प्लेटफार्म एक पर बने कमर्शियल विभाग कार्यालय की है। यात्रियों की सुविधा के लिए यहां तैनात किए गए एक रेल कर्मचारी पर महिला डाक्टर के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है। इन आरोपों को लेकर स्टेशन से जबलपुर रेल मंडल तक कई तरह की चर्चा गर्म हैं। कोई कह रहा है कि जिस कर्मचारी पर आरोप लगा है उसने तो महिला का हाथ पकड़ा था, जिससे वह नाराज हो गईंं, तो वहीं कई ऐसे भी हैं जो यह कह रहे हैं कि उसने हाथ नहीं पक़ड़ा था बल्कि हाथ मिलाया था। खैर यह बात तो अब जांच के बाद ही पता चलेगी, लेकिन इससे एक सीख जरूर मिली है कि हाथ मिलाने से पहले सामने वाले की मंशा को जरूर टटोल लेना चाहिए।

होटलों की छत पर छलक रहे जाम :

बात काम की हो या इंजोयमेंट की, सभी का एक समय और एक जगह होती है, लेकिन कई बार हम इस बात को भूल जाते हैं। इन दिनों शहर की कई होटलों के छत और कमरों में जाम छलक रहे हैं। जिन होटलों में शादी और अन्य समारोह होना चाहिए, वहां अब महफिलें लगने लगी हैं, वो भी नियमों को नजरअंदाज कर। कोरोना काल के दौरान हुए घाटे को कम करने के लिए इन दिनों कई होटले बार में बदल गई हैं, वो भी बिना नियम और कागजों के। जिन जिम्मेदारों को इन पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी दी गई है, वो भी यहां आराम से बैठकर जाम झलका रहे हैं। बात जिला प्रशासन के जिम्मेदारों की हो या पुलिस थाने में तैनात प्रभारियों की। दोनों ने ही इन दिनों शराब और शराबी, दोनों को न देखने की कसम भी खा ली है।

भवन तो बन गया भव्य, अब गेट की बारी :

घर कितना भी सुंदर हो, लेकिन प्रवेश द्वार यदि भव्य नहीं तो सुंदरता आधी रह जाती है। इस बात को किसी ने समझा हो या न समझा हो, लेकिन नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ने यह बात अच्छी तरह से समझ ली है और उसने इस पर अमल भी कर लिया है। इन दिनों विवि के प्रवेश द्वार को भव्य बनाने की तैयारी जोरों पर है। इसकी डिजाइन बनाते वक्त इंजीनियर ने यह बात खास तरह से ध्यान में रखी गई कि यह प्रदेश का पहला और एक मात्र वेटरनरी विवि की झलक इनमें दिखाई दे। इतना ही नहीं जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार को भी खास तरह से निहारा गया था, ताकि वेटरनरी विवि नए प्रवेश द्वार की और सुंदर बनाया जा सके। इसका बजट न बढ़े, इसलिए पुराने प्रवेश द्वार में किसी तरह की टूट-फूट नहीं की।

साहब ने बदल दी परंपरा :

रीति-रिवाज और परंपराएं जैसी भी हों, इन्हें हर हाल में निभाना पड़ता है, भले ही वह आप को पसंद हो या न हो। रेलवे जोन मुख्यालय के एक नए वरिष्ठ अधिकारी एक परंपरा को लेकर चर्चा गर्म हैं। उन्होंने अपना प्रभाार संभालते ही अधिकारियोंं के कार्य शैली और गति, दोनों में सुधार किया है, लेकिन इस बीच एक नई परंपरा भी बना दी है, जिसको लेकर कई अधिकारी खुश हैं तो कई चिंता में। साहब ने दौरा के दौरान आला अधिकारियोंं को प्रदेश के मुखिया से भेंट करने पहुंचे। चर्चा है कि अभी तक जितने भी बड़े साहब आए और रहे, उन्होंने सौजन्य भेंट को नजरअंदाज ही किया, लेकिन नए साहब के मेलमिलाप ने जोन में एक नई परंपरा की शुरूआत कर दी है। यह परंपरा किसी को पसंद आए या न आए, लेकिन अब आगे इसे निभाना ही होगा।

Posted By: Brajesh Shukla