Jabalpur Column: प्रोटोकाल की लिस्‍ट में नाम नहीं, मंत्री को घुसने नहीं दिया

Updated: | Sun, 19 Sep 2021 09:55 AM (IST)

कॉलम- नगर सरकार, सुनील दाहिया। बड़े बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले..। मशहूर शायर मिर्जा गालिब का ये शेर प्रदेश के कबीना मंत्री पर एकदम सटीक बैठ रहा है। दरअसल, संस्कारधानी में आयोजित अमर शहीद शंकर शाह, कुंवर रघुनाथ शाह के 164 वें बलिदान दिवस के अवसर कबीना मंत्री भी पहुंचे। इस उम्मीद के साथ कि वे भी अमर अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री की सुरक्षा में लगे जवानों ने उन्हें प्रतिमा स्थल पर पहुंचने से पहले ही रोक दिया। यह कहते हुए कि प्रोटोकाल की लिस्ट में उनका नाम ही नही है। सरेआम इस तरह रोके जाने से मंत्री जी पहले तो सुरक्षा प्रहरियों पर बिफर पड़े। यहां केंद्रीय मंत्री भी पहुंचने वाले थे लिहाजा ज्यादा बखेड़ा न करते हुए मंत्री जी कार में बैठे और निकल लिए।

स्वच्छता में नंबर वन आने की काबिलियत तो है: लंबे समय बाद आधा ही सही पर शहर साफ- सुधरा, सुंदर और व्यविस्थत था। कोना-कोना सफाई के बाद उसमें छिड़के जाने वाले ब्लीचिंग पाउडर से दमक भी रहा था। सड़कों तक पसरी दुकानें सिमटी हुईं थीं, पार्किंग भी कसी हुई थी। शहर का ये बदला रूप देख शहरवासी भी हैरान रहे। उनके जहन में रह-रह कर ये सवाल भी कौंध रहा था कि जबलपुर में स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन पर अाने की काबिलियत तो है लेकिन ये काबिलियत रोज क्याें नहीं दिखती। जब कोई वीवीआइपी आता है तब ही अधिकारियों का हुनर क्यों जागता है। यदि रोजाना ही ऐसी सफाई हो तो मजाल है स्वच्छता में हम पिछड़ जाएं। लेकिन शहर की ये नियती है कि भरपूर मानव संसाधन, करोड़ों की मशीनरी होने के बावजूद हम स्वच्छता में नंबर वन तो क्या टाॅप 10 में नहीं आ पा रहे।

खल रही नगर सत्ता की कमी: लाल बिल्डिंग के अधिकारियों के साथ ही अब अधिकारियों को भी नगर सत्ता की कमी खलने लगी है। क्योंकि नगर सत्ता के रहते देर से ही सही पर नागरिकों से जुड़े और विभागीय काम तत्काल हो जाया करते थे। लेकिन प्रशासक राज में जनता तो दूर विभागीय कार्य ही नहीं हो पा रहे। हद तो तब हो गई जब प्रशासक के सचिव कार्यालय का खराब इनवर्टर तक नहीं सुधर पा रहा। जबकि नोटशीट चले 15 दिन गुजर गए। जिनके हाथ शहर की कमान है उन्हीं के कक्ष के सीसीटीवी बंद पड़े हैं । लेकिन लाल बिल्डिंग के साहब अपने में ही मस्त हैं। अधिकारी, कर्मचारी भी अब ये कहने लगे हैं कि यदि लाल बिल्डिंग सहित शहर की कमान महापौर के हाथों में होती व्यवस्थाएं इस तरह यूं न गड़बड़ातीं। नगर सरकार की कमी जनता के बाद अधिकारी-कर्मचािरियों को खलती देख जानकार भी हैरान हैं।

अभी और चढ़ेगा सीवर का फीवर: पिछले 14 साल से सीवर का फीवर झेल रहे लोगों को अभी सीवर के काम से निजात नहीं मिलेगी। अभी सीवर का फीवर और चढ़ेगा। क्योंकि अभी तो सिर्फ शहर के मुख्य मार्गो में सीवर की लाइन बिछाई जा रही है। शहर के बाकी हिस्सों में लाइन बिछाने और उसे घरों से जोड़कर सीवर प्लांट तक पहुंचाने का काम बाकी है। इसके लिए न सिर्फ शहर के अन्य हिस्सों को खोदा जाएगा, बल्कि घरों से लाइन जुड़ने के बाद बतौर टेस्टिंग भी की जाएगी। यदि सीवर लाइन का काम सही रहा तो ठीक वरना जिस इलाके में सीवर जुड़ेगी उस क्षेत्र में आफत आना तय है। क्योंकि यहां फिर नए सिरे से खुदाई की जाएगी। विदित हो कि नगरवासी सीवर लाइन के लिए खोदे जाने वाले गड्डे, धूल, मिट्टी से तंग आ चुके हैं। रांझी, मानेगांव में तो ये गड्ढे नासूर बन चुके हैं।

Posted By: Ravindra Suhane