Jabalpur Court News: हत्या के मामले में सही तरीके से नहीं की गई पैरवी, हाई कोर्ट ने नियुक्त किया कोर्ट मित्र

Updated: | Sun, 24 Oct 2021 03:02 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हत्या के मामले में निचली अदालत से आजीवन कारावास से दंडित एक कैदी के मामले में संज्ञान लिया है। न्यायमूिर्त अतुल श्रीधरन व जस्टिस सुनीता यादव की युगलपीठ ने कहा कि अपीलकर्ता को विधिक सहायता से पैरवी के लिए मिले अधिवक्ता ने सही तरीके पक्ष नहीं रखा, इसलिए उसे सजा हुई। हाई कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता अहादुल्ला उसमानी को कोर्ट मित्र के रूप में नियुक्त किया है।

कोर्ट मित्र अहादुल्ला उसमानी ने एक घंटे के भीतर ही प्रकरण तैयार कर न्यायालय के समक्ष पक्ष रखते हुये अवगत कराया कि, जिला सिंगरौली निवासी अपीलकर्त्ता देवमूरत विश्वकर्मा को हत्या के एक प्रकरण में सत्र न्यायालय ने छह नवम्बर 2009 को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था, जिसकी अपील हाईकोर्ट में की गर्ई, चूंकि अपीलकर्ता निर्धन था इसलिये उसकी ओर से सत्र न्यायालय मे पैरवी करने हेतु जिला विधिक सहायता से अधिवक्ता उपलब्ध कराया गया था।

आत्महत्या दुष्प्रेरणा के मामले में अग्रिम जमानत : अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उमाशंकर अग्रवाल की अदालत ने आत्महत्या दुष्प्रेरण के मामले में अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। आवेदक सुहागी, अधारताल निवासी धर्मेद्र पटेल की ओर से अधिवक्ता ओमशंकर विनय पांडे व अंचन पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि शादी के सात साल बाद आवेदक की पत्नी ने आत्महत्या कर ली। इस मामले में ससुराल पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने आवेदक के खिलाफ धारा-306 यानी आत्महत्या दुष्प्रेरण का मामला पंजीबद्ध कर लिया। इस मामले में आपत्ति का बिंदु यह है कि घटना के 24 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई। मृतिका का कोई सुसाइड नोट भी नहीं है, जिसमें आवेदक पर आरोप लगाया गया हो। इसके बावजूद पुलिस ने दूसरे पक्ष के दबाव में एकतरफा कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायदृष्टांत में साफ किया है कि धारा-306 का अपराध कायम करने में कई बार पुलिस का व्यवहार पारदर्शी नहीं होता। इस मामले में यही तथ्य रेखांकित हुआ है। लिहाजा, अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए।

Posted By: Ravindra Suhane