Jabalpur Highcourt News : हाई कोर्ट ने दिव्यांग छात्रा को एमबीबीएस सीट से वंचित करने पर मांगा जवाब

Updated: | Fri, 22 Oct 2021 07:30 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवि विजय कुमार मलिमथ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने दिव्यांग छात्रा को एमबीबीएस सीट से वंचित किए जाने के रवैये पर जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में राज्य शासन, प्रमुख सचिव व संचालक चिकित्सा शिक्षा, नेशनल मेडिकल कमीशन व डीन मेडिकल कालेज, शहडोल को नोटिस जारी किए गए हैं। याचिकाकर्ता होशंगाबाद निवासी प्रिशांशी मीना की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता अत्यंत मेधावी छात्रा है। उसने अपनी प्रतिभा के बल पर महज 17 साल की अल्पायु में नीट जैसी कठिन परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण कर ली। लिहाजा, उसे शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस की सीट आवंटित हो गई। लेकिन डीएमई के नेतृत्व वाली वैरीफिकेशन टीम ने उसे एमबीबीएस के लिए अयोग्य करार देते हुए सीट छीन ली।

याचिकाकर्ता सिर्फ 65 फीसद दिव्यांग : अधिवक्ता संघी ने कोर्ट को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता महज 65 फीसद दिव्यांग है। जबकि एमसीआइ का रूल है कि 80 फीसद से अधिक दिव्यांग होने पर एमबीबीएस सीट के लिए पात्रता नहीं होगी। इस दृष्टि से याचिकाकर्ता का हक नहीं मारा जा सकता। लेकिन डीएमई के नेतृत्व वाल वैरीफिकेशन टीम ने यह तर्क देकर एमबीबीएस सीट से वंचित कर दिया कि एमसीआइ रूल के अनुसार यदि आवेदक का एक भी अंग कटा है, तो वह एमबीबीएस की पढ़ाई के योग्य नहीं होगा।

समानता के अधिकार का उल्लंघन : बहस के दौरान दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद-14 के अनुसार समानता का अधिकार दिया गया है। इस मामले में इसका साफ तौर पर उल्लंघन हो रहा है। यही नहीं संयुक्त राष्ट्र द्वारा दी गई व्यवस्था को भी दरकिनार किया जा रहा है। गुजरात, बाम्बे व दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायदृष्टांतों की रोशनी में भी दिव्यांग को उच्च शिक्षा से वंचित करना सर्वथा अनुचित है।

Posted By: Brajesh Shukla